मारबर्ग रोग एक खतरनाक वायरस है जो फिलोविरिडे नामक वायरस के परिवार से संबंधित है. इस वायरस को इबोला वायरस जितना ही गंभीर और घातक माना जाता है. मारबर्ग वायरस से होने वाली बीमारी को मारबर्ग वायरस रोग कहा जाता है.
नई दिल्ली: आंखों का एक नया संक्रमण दुनिया भर के लोगों को प्रभावित कर रहा है. इसे मारबर्ग वायरस या ब्लीडिंग आई वायरस के नाम से भी जाना जाता है. इस वायरस से रवांडा के 15 लोगों की जान जा चुकी है. इसके अतिरिक्त, पूरे अफ़्रीका में सैकड़ों लोग इस वायरस से संक्रमित हुए हैं. पिछले दो महीनों में, इसका प्रकोप 17 अफ्रीकी देशों में भी फैल गया है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ बढ़ गई हैं. आइए आगे जानते हैं इसके बचाव और संकेत के बारे में।
मारबर्ग रोग एक खतरनाक वायरस है जो फिलोविरिडे नामक वायरस के परिवार से संबंधित है. इस वायरस को जितना ही गंभीर और घातक माना जाता है. मारबर्ग वायरस से होने वाली बीमारी को मारबर्ग वायरस रोग कहा जाता है. यह बीमारी एक दुर्लभ बीमारी है, लेकिन कभी-कभी अफ्रीका के कुछ इलाकों में इसका प्रकोप बढ़ जाता है. इन प्रकोपों के दौरान, कुछ लोगों से लेकर सैकड़ों लोग एक ही समय में संक्रमित हो जाते हैं. इस वायरस के फैलने के कई कारण हैं जैसे दूषित रक्त, मूत्र, मल, थूक और शारीरिक संबंधों के संपर्क से भी फैलता है ये वायरस.
1. बुखार होता है, जिसमें शरीर का तापमान 38 डिग्री सेल्सियस या इससे भी अधिक हो सकता है
2. थकान, कमजोरी महसूस होना और गंभीर सिरदर्द जो फ्लू के समान है
3. गहरी सांस लेने में कठिनाई महसूस होना और पेट की समस्याएं जैसे उल्टी, दस्त और दर्द
4. इसमें आंखों, नाक, मसूड़ों, पेट या आंतों से ब्लीडिंग शामिल हो सकता है. यह संकेत बताता है कि स्थिति और गंभीर होती जा रही है.गला खराब होना।
1. इस वायरस से बचाव के तरीकों में सबसे पहले चमगादड़ों के संपर्क से बचना शामिल है
2. अगर नॉनवेज खा रहे हैं तो सबसे पहले मांस को अच्छे से साफ करके पकाएं
3. हाथों और पैरों की साफ-सफाई बनाए रखें और संक्रमित व्यक्तियों के निकट संपर्क से बचें
4. अल्कोहल-आधारित सैनिटाइज़र का उपयोग करें।
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