नई दिल्ली. इसी महीने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से खबर आई कि भारतीय मूल की एक लड़की ऑटो इम्यून एन्सेफलाइटिस से पीड़ित पाई गई है. समाचार एजेंसी के मुताबिक 20 बरस की यह लड़की पिछले 6 महीने से वेंटिलेटर के सहारे जिंदा है।

एन्सेफलाइटिस-दिमाग के कुछ हिस्सों में सूजन-इस साल की शुरूआत में भी चर्चा में था, जब बिहार के मुजफ्फरनगर में प्रदूषित लीची खाने के कारण 160 से ज्यादा बच्चों को जापानी एन्सेफेलाइटिस के कारण मौत का मुंह देखना पड़ा।

एन्सेफेलाइटिस की वजहों पर एक नजर-

दिमाग को बचाएं: एन्सेफेलाइटिस दिमाग के ऊतकों (टिश्यूज) की सूजन है। दिमाग में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष इन्फेक्शन दोनों ही इसकी वजह बन सकते हैं। आमतौर पर इन्फेक्शन की वजह एक वायरस होता है, लेकिन यह कोई अन्य रोगजनक (पेथोजन) भी हो सकता है।

एन्सेफलाइटिस के मरीजों में शुरुआती दौर में फ्लू जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। बुखार, सिरदर्द, थकान और कुछ मामलों में मरीज में शुरुआती दौर में यह लक्षण नहीं दिखते।

इन्फेक्शन एक बार दिमाग के बड़े हिस्से में फैल जाने के बाद मतिभ्रम, दौरे पड़ने और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। फ्लू जैसे लक्षणों के कारण एन्सेफलाइटिस की पहचान नहीं हो पाती। एन्सेफलाइटिस के मरीजों के लिए रोग की सही वक्त पर पहचान और तुरंत उपचार सबसे महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस रोग का असर रोगी दर रोगी बदलता रहता है और यह अप्रत्याशित होता है।.

थोड़ी कुछ और जानकारी
दिमाग की सूजन या एन्सेफलाइटिस की वजह वायरस, बैक्टेरिया, फंगी या प्रोटोजोआ भी हो सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को दिमाग में इन्फेक्शन के कारण सूजन होती है तो उसे प्राइमरी एन्सेफलाइटिस कहा जाता है। अगर दिमाग में सूजन की वजह शरीर के किसी अन्य भाग में इन्फेक्शन है तो इसे सेकंडरी एन्सेफलाइटिस कहा जाता है। यह तब होता है जब हमारी रोग प्रतिरोधक प्रणाली यह सोचकर दिमाग के टिश्यूज पर हमला बोल देती है कि इन्फेक्शन दिमाग से पैदा हुआ है.

सूजन प्राइमरी हो या सेकंडरी, इसकी वजह बनने वाले जीवाणुओं के नाम से उस विशेष एन्सेफलाइटिस को पहचाना जाता है। उदाहरण के लिए-

  • जापानी एन्सेफलाइटिस
  • हर्पिज सिम्प्लेक्स एन्सेफलाइटिस
  • सेंट लुईस एन्सेफलाइटिस
  • वेस्ट नाइल एन्सेफलाइटिस
  • वेरिसेला-जोस्टर एन्सेफलाइटिस
  • इक्विन एन्सेफलाइटिस

मीजल्स, पोलियो, रैबीज की वजह बनने वाले वायरस भी एन्सेफलाइटिस की वजह बन सकते हैं। एन्सेफलाइटिस की वजह बनने वाले वायरस या बैक्टिरीया, लोगों तक मच्छरों, घोड़ों, पक्षियों या पिस्सू जैसे वाहकों (वेक्टर्स) के जरिये पहुंच सकते हैं.

अधिकांश मामलों में एन्सेफलाइटिस बहुत तीव्र होता है यानी गंभीर लक्षण एकाएक दिखने लगते हैं.

इसी तरह के दिमाग के कामकाज में परिवर्तन के लक्षण दिख सकते हैं जब हमारी रोग प्रतिरोधक प्रणाली दिमाग के सेल्स को पहचान नहीं पाती और उस पर हमला कर देती है। यह दिमाग में सूजन की वजह बनता है.

एन्सेफलाइटिस का यह प्रकार, दौरे पड़ने, याददाश्त को नुकसान, मतिभ्रम, बेहोशी और अंतत: कोमा में चले जाने जैसे लक्षणों के साथ होता है.

इसका इलाज रोग प्रतिरोधक क्षमता पर लगाम लगाकर किया जाता है। इसके लिए इम्युनोओप्रेसिव ड्रग्स के इन्जेक्शन दिए जाते हैं। कुछ मामलों में ऑटोइम्युन एन्सेफलाइटिस का कैंसर से संबंध भी दिखाई देता है। ऐसे मामलों में मुख्य इलाज टय़ूमर को हटाना होता है। दिमाग के कामकाज को सामान्य बनाने के लिए सबसे जरूरी है शुरुआती दशा में ही इलाज, वरना मरीज का दिमाग दिन ब दिन बिगड़ता जाता है और अंतत: उसकी मौत का कारण बन सकता है।

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