Covid-19 Booster dose

कोरोना के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहे देश के लिए कोरोना वैक्सीन को बेहद प्रभावी बताया जा रहा है. इसी क्रम में बीते दिन देश भर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर मेगा वैक्सीनेशन अभियान ( Covid-19 Booster dose ) चलाया गया. दोपहर डेढ़ बजे तक ही वैक्सीनेशन का आंकड़ा 1 करोड़ डोसेज को पार कर चुका था. जो शाम होते-होते 2 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया.

बता दें कि कल पूरे देश में एक लाख से भी ज़्यादा स्थानों पर वैक्सीन लगाई गई थी. जो कि खुद में ही एक रिकॉर्ड है. अभी तक देश में 79 करोड़ से ज़्यादा कोरोना वैक्सीन की डोज़ेज दी चुकी है. जिसके चलते भारत ने वैक्सीन के मामले में दुनिया के 18 देशो को पीछे छोड़ दिया हैं, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, फ़्रांस कनाडा, रूस, जापान सहित 18 देश रोज़ाना सिर्फ़ 8.17 मिलियन डोज़ लगा रहे हैं जबकि भारत अकेले इन सब पर भारी है और रोज़ाना औसतन 8.54 मिलियन वैक्सीन की डोज़ रोज़ दी जा रही है.

देश में अभी कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज की कोई जरूरत नहीं

भारत में कोरोना वैक्सिनेशन अभियान बड़ी तेज़ी से चलाया जा रहा है. जिसके चलते देश में फिलहाल 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों को कोरोना वैक्सीन दी जा रही है. इस बीच कई विकसित देशों ने कोरोना के खिलाफ वैक्सीन की बूस्टर डोज देने का निर्णय लिया है.

अब सवाल भारत के लिए यह है कि क्या वैक्सीन की एक बूस्टर डोज भारत को कोरोना के खिलाफ सुरक्षा प्रदान कर पाएगी. इसपर देश के विशेषज्ञों का कहना है कि हो सकता है कि एक आदर्श स्थिति में जहां अधिकांश लोगों को पूरी तरह से टीका लगाया गया हो तब यह कारगर साबित हो सकता है लेकिन एक ऐसा देश जहाँ आबादी का दवाब ज्यादा हो, सिर्फ एक चौथाई से भी कम वयस्क आबादी ने वैक्सीन की दोनों डोज ली हो तो यहाँ अभी कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज की कोई जरूरत नहीं. विशेषज्ञों का कहना है कि हमे पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि देश की पूरी आबादी को कम से कम वैक्सीन की पहली डोज़ लग जाए इसके बाद हम बूस्टर डोज़ के बारे में सोच सकते हैं.

 

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