जेन-ज़ी युवा प्रोटीन की मात्रा गिनते हैं, नींद के स्तर पर नज़र रखते हैं, थेरेपी के बारे में खुलकर बात करते हैं, छोटे सूटकेस जितने बड़े पानी की बोतलें लेकर चलते हैं, और कई फिटनेस ऐप्स, पेट की सेहत से जुड़े रुझानों और कोर्टिसोल से संबंधित चर्चाओं से अच्छी तरह वाकिफ हैं.
इसके विपरीत, मिलेनियल्स को अक्सर अत्यधिक काम करने वाली, तनावग्रस्त पीढ़ी के रूप में चित्रित किया जाता है जो कॉफी, डेडलाइन और पीठ दर्द के सहारे चलती रहती है. एक नजर में देखें तो ऐसा लगता है कि ये अंतर स्पष्ट बता रहा है कि जेन-ज़ी मिलेनियल्स से ज्यादा स्वस्थ हैं.
जेन-Z में जागरूकता अधिक
विशेषज्ञों का कहना है कि जेन Z, मिलेनियल्स की तुलना में अपनी उम्र में स्वास्थ्य के प्रति कहीं अधिक जागरूक हो सकती है, खासकर मानसिक स्वास्थ्य, निवारक देखभाल और वजन घटाने के अलावा शरीर के अन्य मापदंडों के मामले में. लेकिन वे चेतावनी देते हैं कि जागरूकता का मतलब यह नहीं है कि स्वास्थ्य परिणाम भी बेहतर होंगे. दरअसल, कई शारीरिक और मनोवैज्ञानिक मापदंडों पर, जेन ज़ी पीढ़ी के लोगों को अधिक संघर्ष करना पड़ सकता है.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
चेन्नई के कावेरी अस्पताल में वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और क्लिनिकल लीड, हार्ट फेलियर और ट्रांसप्लांट प्रोग्राम के प्रोफेसर पी मनोकर कहते हैं, “धारणा और वास्तविकता के बीच एक बड़ा अंतर है.” हालांकि जेन-ज़ी को अक्सर “अधिक स्वस्थ” पीढ़ी के रूप में देखा जाता है और मनोकर इस व्यापक धारणा से असहमत हैं.
मनोकर के अनुसार, “शारीरिक स्वास्थ्य के मामले में, मिलेनियल्स वास्तव में सही स्वास्थ्य संबंधी विकल्प चुनने को लेकर अधिक चिंतित हैं. वहीं, जनरेशन Z मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक है. मैं उन्हें जागरूकता की पीढ़ी कहूंगा.” मनोकर के अनुसार मिलेनियल्स उन पहले लोगों में से थे जिन्होंने उस चीज़ को मुख्यधारा में लाया जिसे अब वेलनेस मूवमेंट कहा जाता है, जैसे; योग कक्षाएं, स्वच्छ खानपान, जिम सदस्यता, ध्यान ऐप, स्वस्थ कार्य-जीवन संबंधी बातचीत और अंततः थेरेपी के बारे में बातचीत. वहीं, जनरेशन Z ने उस भाषा को अपनाया है और उसे और आगे बढ़ाया है. वे भावनात्मक कल्याण, थेरेपी, बर्नआउट, सीमाएं और निवारक स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर खुलकर बोलते हैं.
अधिक जागरूक होना, अधिक स्वस्थ होना नहीं
चेन्नई के एसआरएम प्राइम हॉस्पिटल में सलाहकार मनोचिकित्सक डॉ. विवियन कपिल कहते हैं, “जेनरेशन जेड थेरेपी, फिटनेस, नींद और निवारक स्वास्थ्य के बारे में अधिक खुले विचारों वाले हैं. लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वे समग्र रूप से अधिक स्वस्थ हैं.” विशेषज्ञों का कहना है कि जनरेशन Z की अत्यधिक जागरूकता उनके लिए तनाव का कारण भी बन सकती है. एसआईएमएस अस्पताल में एंडोक्रिनोलॉजी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. रविकिरण मुथुस्वामी बताते हैं कि आज के युवा वयस्क इस बात से भलीभांति अवगत हैं कि खराब जीवनशैली की आदतें किन परिणामों को जन्म दे सकती हैं.
उनके अनुसार, “जीवन को लेकर ही तनाव नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने को लेकर भी तनाव है.” दूसरे शब्दों में कहें तो: अधिक जानना हमेशा सशक्त महसूस नहीं कराता. कभी-कभी, यह एक और प्रदर्शन मापक जैसा लगता है. यह व्यापक शोध से भी मेल खाता है. अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की 2023 की एक रिपोर्ट में पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल सभी पीढ़ियों में से जेनरेशन जेड के वयस्कों ने लगातार सबसे खराब मानसिक स्वास्थ्य, उच्च तनाव स्तर और कम भावनात्मक कल्याण की शिकायत की.