Home > क्राइम > टूटी हड्डी का इलाज कराने अस्पताल में भर्ती हुई थी महिला, डॉक्टर्स ने कर दिया दिल का ऑपरेशन; मौत के बाद भारी हंगामा!

टूटी हड्डी का इलाज कराने अस्पताल में भर्ती हुई थी महिला, डॉक्टर्स ने कर दिया दिल का ऑपरेशन; मौत के बाद भारी हंगामा!

महिला की सड़क हादसे के चलते पैर की हड्डी टूट गई थी जिसका इलाज कराने के लिए पानीपत के एक निजी अस्पताल का रुख किया था. इलाज से पहले परिजनों से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी कराए लेकिन यह नहीं बताया कि वो पैरों के बजाए हार्ट का ऑपरेशन करने वाले हैं,

By: Kajal Jain | Published: July 28, 2026 11:11:45 AM IST



हरियाणा के पानीपत से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहां डॉक्टरों ने पैर में फ्रैक्टर का ऑपरेशन करना पहुंची महिला के हार्ट का ऑपरेशन  कर दिया जिसके बाद महिला की मौत हो गई. इस घटना के तुरंत बाद प्राइवेट अस्पताल मे कोहराम मच गया और परिजनों ने अस्पताल स्टाफ और डॉक्टर पर लापरवाही के आरोप लगाए और कहा कि उनसे फर्जी हस्ताक्षर लिए गए और विरोध करने पर धमकाने का भी आरोप लगाया. परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों के खिलाफ जांच-पड़ताल शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि एक सड़क हादसे के कारण महिला के पैर की हड्डी टूट गई थी जिसके इलाज कराने के मकसद से महिला ने प्राइवेट अस्पताल का रुख किया था.

इलाज करके घर भेजने का आश्वासन

यह घटना पानीपत के जीटी रोड स्थित पार्क अस्पताल की है जहां रमेश नगर की रहने वाली मृतका गुड्डी देवी अपने पैर का ऑपरेशन कराने डॉक्टर के पास आईं थी. महिला मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात की रहने वाली है. 24 जुलाई को महिला एक सड़क दुर्घटना की चपेट में आ गई थी जिसके कारण उसके पैर की हड्डी टूट गई. महिला को ऑर्थोपैडिक ट्रीटमेंट के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. परिजनों को पूरा आश्वासन दिया गया कि पैरों का इलाज सही ढंग से किया जाएगा और महिला को स्वस्थ करने के बाद ही घर वापस भेजेंगे.

पैर में फ्रैक्चर, हार्ट में डाल दिया स्टंट

आजतक की रिपोर्ट में मृतका गुड्डी देवी के परिजनों ने बताया कि 25 जुलाई को ऑपरेशन शेड्यूल किया गया लेकिन डॉक्टरों ने परिवार को बिना बताए महिला के दिल की एंजियोप्लास्टी कर दी और हार्ट में स्टंट फिट कर दिया. इसके बारे में न तो परिजनों को जानकारी दी गई और न ही उनकी अनुमति लेना जरूरी समझा. अस्पताल ने सहमति पत्र पर अपने आप हस्ताक्षर कर लिए जिसका नतीजा यह हुआ कि ऑपरेशन के बाद महिला की तबियत खराब हो गई और अस्पताल में ही उसने दम तोड़ दिया.

परिजनों से कराए फर्जी हस्ताक्षर

मृतका के बेटे कुलदीप का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं लिए, न अनुमति ली और न यह बताया कि हार्ट का ऑपरेशन करने वाले है. यदि दिल की कोई समस्या थी भी तो पहले परिवार को जानकारी देनी चाहिए थी. लेकिन डॉक्टरों ने बिना किसी जानकारी या अनुमति के अपनी मन मर्जी से इलाज कर दिया. परिवार का कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने अपनी लापरवाही छिपाने के लिए परिजनों पर दबाव भी बनाया. पुलिस को दी शिकायत में परिजनों ने आरोप लगाया है कि जब इलाज और ऑपरेशन को लेकर अस्पताल प्रशासन से बातचीत की गई तो बजाए गलती स्वीकारने या मरीज की हालत पर ध्यान देने के, स्टाफ ने साफ कह दिया कि जो करना है कर लो, हम पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

डॉक्टर के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा

मृतका के बेटे कुलदीप ने डॉक्टरों पर चिकित्सा लापरवाही, धोखाधड़ी और अनावश्यक प्रक्रिया करने का आरोप लगाया है, और उनका कहना है कि इस उपचार के कारण उनकी मां की मृत्यु हो गई. शिकायत के आधार पर, पानीपत के सेक्टर-29 पुलिस स्टेशन ने डॉक्टरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106, 318(4) और 351(2) के तहत एफआईआर दर्ज की है. पुलिस ने बताया कि आरोपों की जांच की जा रही है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) ने बताया कि गुड्डी देवी के शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा, जिससे मृत्यु के सही कारण का पता चलने की उम्मीद है.  संपर्क करने पर, पार्क अस्पताल की सीईओ सपना ने कहा कि वह कुछ समय बाद आरोपों का जवाब देंगी. 

डॉक्टरों ने प्रेस कांफ्रेंस में रखी अपनी बात

पानीपत के Park Hospital प्रशासन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में माना कि सहमति फॉर्म पर हस्ताक्षर की जगह स्टाफ ने खुद परिजनों का नाम लिख दिया था, जिसे उन्होंने ‘लापरवाही’ नहीं बल्कि स्टाफ की गलती बताया है. अस्पताल प्रबंधन ने सफाई देते हुए कहा कि वह हस्ताक्षर नहीं बल्कि स्टाफ द्वारा लिखा गया नाम था, जिसे नासमझी या गलती कहा जा सकता है, न कि मेडिकल लापरवाही. डॉक्टरों ने कहा कि परिजनों को मरीज के दिल की बीमारी और छल्ला डालने की बात बताई गई थी. पहली बार में महिला के परिजनों ने स्टंट डालने से मना कर दिया था लेकिन जब उन्हें इससे जुड़ी गंभीरताओं के बारे में बताया तो महिला के बेटे ने फोन पर अपना कंसेंट दिया था जिसके बाद दिल में छल्ला (स्टेंट) डाला गया. अस्पताल प्रबंधन का आरोप है कि महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल से पैसों की मांग की. जब अस्पताल प्रबंधन ने उनकी मांग पूरी करने से इन्कार कर दिया तो परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया.

अस्पताल प्रशासन ने एसपी  भूपेंद्र सिंह को लैटर लिखकर केस रद्ध करने की अपील की है. अस्पताल का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट/मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार, किसी अस्पताल या डॉक्टर पर एफआईआर दर्ज करने से पूर्व मेडिकल बोर्ड की ओर से जांच कराए जाना अनिवार्य है. यही जांच में आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो ही केस दर्ज किया जा सकता है, जबकि पुलिस ने बिना किसी मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के जल्दबाजी में एफआईआर दर्ज की है.

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