Home > हरियाणा > टैक्स में अव्वल सुविधा में फिसड्डी, मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में हो रहा मिलियन्स का नुकसान, विधायक-सांसद मस्त, जाम और जलजमाव से बड़ी-बड़ी कंपनियां त्रस्त

टैक्स में अव्वल सुविधा में फिसड्डी, मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में हो रहा मिलियन्स का नुकसान, विधायक-सांसद मस्त, जाम और जलजमाव से बड़ी-बड़ी कंपनियां त्रस्त

Gurugram Business Loss: गुरुग्राम में जलजमाव की समस्या की वजह से हर साल 150 से 200 करोड़ का नुकसान हो रहा है. इस गंभीर समस्या की वजह से बड़ी-बड़ी कंपनियां अपने ऑफिस को कहीं शिफ्ट करने का सोच रहे हैं. सड़कों पर भारी जलजमाव से लोगों को मुसीबतों का सामना करना पड़ता है. बारिश के दिनों में गुरुग्राम की हालत गांव से भी बदतर हो जाती है.

By: Sohail Rahman | Published: September 2, 2026 3:07:03 PM IST



Gurugram Business Loss: दिल्ली-एनसीआर में स्थित मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों के ऑफिस हैं. लेकिन सुविधाओं की बात करें तो किसी गांव से भी बदतर हैं. अगर आप किसी गांव की बात करें तो वहां भारी बारिश में भी कहीं भी सड़कों पर पानी जमा नहीं होता है. लेकिन अगर आप गुरुग्राम की बात करें तो हल्की सी बारिश में भी गुरुग्राम की सड़के तालाब बन जाती है. हाल ही में हुई भारी बारिश में गुरुग्राम की सड़कें धंस गई थी और बड़ा सा गड्ढा बन गया था. इसके अलावा, भारी बारिश में अंडर पास बारिश के पानी से पूरी तरह भर गया और सड़कों पर पूरी-पूरी स्कूली बस डूबी हुई नजर आई. हद तो यह हो गई कि छोटे-छोटे बच्चे स्कूली बसों से बाहर घर जाने का इंतजार करते रहे और बिलख-बिलख कर रोते रहे.

इसके अलावा, अगर आप ऑफिस के समय में गुरुग्राम की सड़कों पर निकल जाएं तो आपका जीना मुश्किल हो जाएगा. गुरुग्राम में महंगी-महंगी बिल्डिंग्स, बड़ी-बड़ी कंपनियों के दफ्तर फिर भी लोगों को गांव से भी बदतर सुविधाएं मिल रही हैं. हरियाणा में बीजेपी लगातार तीसरी बार जीतकर सत्ता में आई है. केंद्र में भी बीजेपी की सरकार है. लेकिन गुरुग्राम की समस्या जश की तश है. कोई सुधार नहीं हुआ है. आपको जगह-जगह कचरे और कूड़ों का अंबार देखने को मिल जाएगा. सड़कों का तो पूछिए ही मत, सड़कों में गड्ढें हैं या गड्ढों में सड़क. इसका अंदाजा लगाने में आपको वर्षों लग जाएंगे.

कनेक्टिविटी की समस्या

गुरुग्राम में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम, विप्रो, एचसीएल टेक, इंफोसिस और अमेजन जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों के बावजूद बीजेपी सरकार और गुरुग्राम प्रशासन सुविधा नहीं दे पा रही है. गुरुग्राम में जाम और जलजमाव की समस्या वर्षों से चली आ रही है. मिलेनियम सिटी गुरुग्राम में महाजाम के बाद से ड्रेनेज और सीवरेज, अंडर पास फ्लाईओवर के अलावा अन्य साजो सामान पर करोड़ों खर्च किए जा चुके हैं लेकिन हर मॉनसूनी बारिश में साइबर सिटी को वाटर लॉगिंग जैसी शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ता है.

भारी बारिश के बाद जगह-जगह जलजमाव की समस्या से निजात दिलाने के लिए सड़कों पर कोई अधिकारी तक नजर नहीं आते हैं. काम के नाम सरकार और प्रशासन सिर्फ और सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं. करोड़ों खर्च होने के बावजूद गुरुग्राम की समस्या से निजात नहीं मिल पा रहा है.

गुरुग्राम में जलजमाव से मार्केट को कितना नुकसान होता है?

गुरुग्राम में जलजमाव की वजह से लोगों का सड़कों पर निकलना मुश्किल हो जाता है. जिससे खुदरा मार्केट को बिजनेस में भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है. गुरुग्राम के निचले इलाकों और सेक्टर बाजारों (जैसे सेक्टर 10, 14, 46 आदि) की दुकानों में पानी भरने से सामान, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब हो जाते हैं. जिसके दुकानदारों और बिजनेसमैन को करोड़ों का नुकसान हो जाता है. एक अनुमान के मुताबिक, मॉनसून में भारी बारिश के बाद सड़कों पर जलजमाव से गुरुग्राम में 150 से 200 करोड़ रुपये का हर साल नुकसान होता है. बाकि बड़ी-बड़ी कंपनियों को भी करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ता है.

gurugram business loss

वर्षों में पूरा नहीं हुआ निर्माण कार्य

जलजमाव और जाम की समस्या की वजह से लोग गुरुग्राम से शिफ्ट होने का सोच रहे हैं. बहुत सारे लोगों ने इसको लेकर सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. आप गुरुग्राम की हालत का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद इस समस्या से निजात नहीं मिल पा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले नौ सालों में ड्रेनेज पर 503 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. 2019-2020 में 280 करोड़ रुपये के एक ‘व्यापक ड्रेनेज प्रोजेक्ट’ को मंजूरी दी गई थी, जिसमें अरावली में 20 चेक-डैम और 200 ग्राउंडवाटर रिचार्ज कुएं बनाना शामिल था. छह साल बाद भी यह प्रोजेक्ट अभी तक पूरा नहीं हो पाया है.

पानी की तरह बहाया जा रहा पैसा

पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है लेकिन धरातल पर कोई समाधान होता नजर नहीं आ रहा है और लोगों को हर दिन समस्याओं से 2-4 होना पड़ रहा है. जाम और जलजमाव की वजह से बड़ी-बड़ी रियल इस्टेट कंपनियों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है. अब वो अपना प्रोजेक्ट कहीं दूसरी जगह शिफ्ट करने की सोच रहे हैं.

कर्मचारियों को करना पड़ता है वर्क फ्रॉम होम

जब भी गुड़गांव में भारी बारिश होती है बड़ी-बड़ी कंपनियों को अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देना पड़ता है. जिसकी वजह से कंपनी की प्रोडक्टिवीटी पर भी फर्क पड़ता है. फैक्टरियों में कई दिनों तक काम ठप पड़ जाते हैं. बारिश के बाद जलजमाव से हजारों कंपनियों और लाखों कर्मचारियों को मुसीबतों का सामना करना पड़ता है.

gurugram waterlogging situation

सबसे बड़ा नौंवा शहर टैक्स देने के मामले में

गुरुग्राम ने इनकम टैक्स के तौर पर केंद्र सरकार के खजाने में लगभग 48,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जो हरियाणा के कुल हिस्से का 65 प्रतिशत है. इस तरह यह भारतीय शहरों में इनकम टैक्स देने वाला नौवां सबसे बड़ा शहर बन गया है. गुरुग्राम में हरियाणा के कुल निवेश का एक बड़ा हिस्सा आता है, लगभग 70 प्रतिशत, जबकि राज्य का लगभग 60 प्रतिशत रेवेन्यू गुरुग्राम से ही आता है, जिसमें एक्साइज ड्यूटी, सेल्स टैक्स, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शामिल हैं. भारत में प्रति व्यक्ति आय के मामले में गुरुग्राम तीसरे नंबर पर है. इसके बावजूद, गुरुग्राम में न तो ठीक-ठाक सड़कें हैं और न ही कोई ड्रेनेज सिस्टम.

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