Gurugram Traffic Jam: देश की राजधानी दिल्ली से सटा गुरुग्राम देश के चुनिंदा शहरों में शुमार है, जहां बहुराष्ट्रीय कंपनियां, फैक्टरियां, बड़े-बड़े मॉल्स, रिहायशी फ्लैट्स के अलावा हजारों की संख्या में शॉपिंग कॉम्लेक्स और लग्जरी दुकानें हैं. इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGIA) से 10 किलोमीटर से भी कम की दूरी बसे गुरुग्राम को विदेशी मेहमान भी पसंद करते हैं. पिछले 3 दशक के दौरान एनसीआर के सबसे विकसित शहरों में गुरुग्राम ही है. बावजूद इसके इस शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या ने इसे लोगों के लिए कष्टकारी शहर में तब्दील कर दिया है. सुबह और शाम (पीक आवर) में यहां पर ऐसा जाम लगता है कि मिनटों का सफर तय करने में वाहन चालकों को घंटों में लग जाते हैं.
साइबर शहर से नर्क सिटी में तब्दील हो जाता है गुरुग्राम
मॉनूसन के दौरान हाईटेक और साइबर सिटी के नाम से मशहूर गुरुग्राम शहर नर्क सिटी में तब्दील हो जाता है. जरा सी बारिश में शहर की सैकड़ों सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती है. गाड़ियों से चलना दूभर हो जाता है. घुटने तक सड़कों पर पानी भरने से पैदल चलना भी मुहाल हो जाता है. हालत यह बन जाती है कि लोग घंटों जाम में फंसते हैं. कुछ साल पहले बारिश के बाद बने हालात और ट्रैफिक जाम की समस्या से हजारों लोग सड़कों पर फंस गए. शहर की कई सड़कों पर रातभर (7-8 घंटे) जाम लगा रहा. स्थानीय निकाय और प्राधिकरणों ने जलभराव और ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने की कवायद के तहत काफी प्रयास किए, लेकिन हालात जस के तस हैं.
गड्ढे बनते हैं मुसीबत का सबब
पिछले सप्ताह ही गुरुग्राम के IFFCO चौक पर बारिश के बाद सड़क धंसने से करीब 25 फीट गहरा गड्ढा बन गया. इस गड्ढे ने मिलेनियम सिटी की छवि पर सवाल खड़े कर दिए. IFFCO चौक गुरुग्राम शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शुमार है, यहां से रोजाना हजारों लोग दफ्तर, घर और बाजार जाने के लिए गुजरते हैं. ऐसी जगह पर सड़क का अचानक धंसना लोगों के लिए मुसीबत बन गया. IFFCO चौक के आसपास ऊंची इमारतें, बड़ी कंपनियों के दफ्तर और महंगे फ्लैट्स हैं, लेकिन बारिश के दौरान जलभराव और ट्रैफिक जाम शहर की दुर्दशा की कहानी अपने आप बयां कर देते हैं. जुलाई, 2025 की बात करें तो गुरुग्राम में मॉनसून की पहली बारिश ने प्रशासन की लापरवाही की पोल खोल दी. करंट, जलभराव और गड्ढों की वजह से 24 घंटे में 9 लोगों की जान चली गई.
कहां-कहां भरता है पानी
बारिश के चलते सेक्टर 9, 9ए, 4, 5, 31, 38, 39, 40, 45, 46, 51 और 52 समेत कई इलाकों में सड़कों और गलियों में पानी भर जाता है. यह कहानी सिर्फ 2026 की नहीं बल्कि हर वर्ष की है. इसी तरह पुराने शहर में ओल्ड रेलवे रोड, न्यू रेलवे रोड, बसई रोड और पटौदी रोड पर भी जलभराव वाहन चालकों को परेशान कर देता है. बारिश से हालात यह बना जाते हैं कि कई रिहायशी इलाकों में लोगों को गंदे पानी और कीचड़ के बीच से होकर निकलना पड़ा.
बारिश के मौसम में मिलेनियम सिटी का यह भ्रम टूट जाता है. ओल्ड रेलवे रोड, न्यू रेलवे रोड और दौलताबाद फ्लाईओवर के आसपास भी बारिश लोगों की जिंदगी मुश्किल में डाल देती है. इन इलाकों में सड़कों पर पानी और गड्ढों के कारण वाहन चालक धीमी गति से चलने के मजबूर होते हैं.
हाई वे तक होता है प्रभावित
बारिश के बाद बने हालात के चलते दिल्ली-जयपुर हाईवे समेत शहर की मुख्य सड़कों पर वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग जाता है. चौराहे और रिहायशी इलाके पानी से लबालब हो जाते हैं. पुराने गुरुग्राम के बसई रोड और पटौदी रोड पर करीब दो फुट तक पानी भर जाता है. जलभराव के कारण कई स्थानों पर लंबा जाम लग जाता है.


