नई दिल्ली. सूचना और क्रांति के दौर में भले ही हम अंतरिक्ष और चांद पर घर बसाने की बात कर रहे हैं या सोच रहे हों, लेकिन अंधविश्वास अभी भी हमारा पीछा नहीं छोड़ रही है. वैज्ञानिक युग के बढ़ते प्रभाव के बावजूद अंधविश्वास की जड़ें समाज से उखड़ नहीं रही हैं. भारत में अंधविश्वास की जड़ें मजबूत हैं, क्योंकि भारत में धार्मिक मान्यताओं पर लोगों की आस्था भारी पड़ जाती है. जिसका कई लोग गलत फायदा उठाते हैं. ईश्वर में आस्था बहुत जरूरी है. जीवन को दिशा देने के लिए मन में श्रद्धा रखना भी बहुत जरूरी है, लेकिन सही और गलत का ज्ञान होना भी उतना ही जरूरी है.

लेकिन क्या जानते हैं कि आप अंधविश्वास में कब फंस जाते हैं, बीमारियों को अंधविश्वास से कौन जोड़ता है. इनके अलावा अंधविश्वास में अति करने वालों की मानसिकता को कैसे पहचानें, अंधविश्वास के अभिशाप से समाज को कैसे बचाए. साथ ही अंधविश्वास के नाम पर हो रहे कारोबार से कैसे बच सकते हैं. जब आप किसी ऐसे रिश्ते के ऊपर भरोसा कर लेते हैं जो आपके साथ केवल अपना समय बिता रहा हैं उसे अंधविश्वास कहा जाता है.

ऐसे वो कौन से लोग होते हैं जो किसी भी बात पर आसानी से विश्वास कर लेते हैं और वह अंधविश्वास के फेर में फंस जाते हैं.  चालाकी ना होने की वजह से इन्हें को बरगलाना बहुत आसाना होता है. अगर आपके भी जेहन में अंधविश्वास से संबंधित कोई सवाल आ रहा है तो आपके सभी सवालों का जवाब देंगे एस्ट्रो साइंटिस्ट जीडी वशिष्ठ इंडिया न्यूज के खास प्रोग्राम गुरु मंत्र में.

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