नई दिल्ली. मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए हम सभी भगवान के दर पर जाते हैं. इसी क्रम में कई लोग तीर्थ यात्रा पर भी होकर आते हैं, लेकिन क्या तीर्थ यात्रा का फल सभी को मिल पाता है. अपने शरीर को कष्ट देकर प्रभु के दरवार पर पहुंचने वालों की भगवान सुनते भी हैं या नहीं आज गुरु मंत्र शो में इसी विषय पर बात की जाएगी कि किसे और कब तीर्थ यात्रा की जानी चाहिए.

इंसान जब से धरती पर आया है एक बौद्धिक जिज्ञासु प्राणी रहा है और हमेशा इंसान कोशिश करता रहता है कि ज्यादा से ज्यादा सीखे, ज्यादा से ज्यादा जाने और ज्यादा से ज्यादा करे. सिर्फ एक इसी कारण की वजह से जैसे-जैसे इंसान अपने आधात्मक को जानता गया और उसके अंदर आस-पास के लोगों का कर्म देखकर उसे ही मानता गया और अपनाता गया. जो कि काफी हद तक तो सही था लेकिन कई हद तक गलत भी.

इंसान इस बात को अच्छे से जानता है कि अगर आपको ताकत चाहिए तो हनुमान जी कि पूजा करो और पैसा चाहिए तो माता लक्ष्मी की पूजा करो. अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए मनुष्य तीर्थ यात्रा पर निकल जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि तीर्थ यात्रा का क्या फल मिलता है, शक्तिपीठ के दर्शन कब, किसे और क्यों करने चाहिए, वैष्णों देवी और अमरनाथ यात्रा का क्या फल मिलता है और शारीरिक कष्ट देकर तीर्थ यात्रा करने का फल कैसे मिलता है आपके इन सभी सवालों का जवाब दे रहे है एस्ट्रो साइंटिस्ट जीडी वशिष्ठ जी इंडिया न्यूज के खास प्रोग्राम गुरु मंत्र में…

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