नई दिल्ली: मनुष्य के जीवन में पूजा-पाठ का अपना अलग स्थान है. कुछ लोग इस पर विश्वास रखते हैं कुछ इसे शांति के रूप में अपनाते हैं. सभी लोग मंदिर, तीर्थ जाते हैं लेकिन मुराद हर किसी की पूरी नहीं होती है. कई बार तो नुकसान भी उठाना पड़ता है. आज हम मनोकामना पूरी करने वाले पूजा के बारे में आपको बताएंगे. जिसमें हम बताएंगे कि आपको कुंडली के हिसाब से किस-किस देवी देवताओं की पूजा करनी चाहिए और किसकी नहीं. साथ में किन लोगों को पूजा-पाठ करने से अशुभ फल मिलते हैं ये भी आपको बताएंगे.

गुरु मंत्र में जीडी वशिष्ठ पूजा की विधि बताते हुए कहते हैं कि आपको पूजा पाठ भी आपके जरूरत के हिसाब से करनी चाहिए. जीत चीज की जरूरत उस देवी-देवता का पूजा करें. क्योंकि जो चीज आपके भाग्य में नहीं उसको बिना तपस्या के पाया नहीं जा सकता है. इसलिए किसी चीज को पाने के लिए उससे संबंधित पूजा पाठ करने की जरूरत है. उदाहरण के लिए आप कमजोर हो या फिर अस्वस्थ्य हो लेकिन पहलवान बनना चाहते हो तो आपक बजरंग बली की पूजा पूरे विधि विधान से करनी होगी.

मंगलवार के व्रत को पूरी सिद्धत से करने होंगे. आप हनुमान जी के व्रत करते हैं फिर आपको उनके हिसाब से कपड़े भी पहनने पड़ेंगे. झूठ नहीं बोलने पड़ेंगे. खाने में किस प्रकार का खान खाना है इन सबका ध्यान रखना होगा. क्योंकि जब तक अपने आपने पूजा-पाठ में सभी चीजों का बैलेंस बनाकर नहीं चलेंगे कुछ हासिल नहीं होगा. इसी तरह से जन्म कुंडली के अंदर सूर्य और राहु का इकट्ठा होना या फिर चंद्र-केतू या फिर चंद्र-राहु का इकट्ठा होना भी दिक्कत है. इसलिए अपने कुंडली के अनुसार अपने दोष को जानकर पूजा पाठ करेंगे तो भगवान का आशीर्वाद जरूर बनेगा. आंख बंद करके पूरी तरीके अध्यात्मिक हो जाना कई बार घातक हो जाता है.

जिन लोगों को प्रापर्टी बनाकर उससे पैसे कमाना है या फिर ब्याज खाना है तो उन लोगों को अपने गुरू को अच्छा रखना होगा. जिसको अपने शरीर के अंदर परिवार को बढ़ाने वाले जोश चाहिए, अपनी इच्छाओं की पूर्ती के लिए पूरी ताकत और दिमाग चाहिए उनके सही मायने में शुक्र की मतलब मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. इसमें भी गौ सेवा महत्वपूर्ण है. किस इंसान को किस तरह से अपनी कुंडली के अनुसान पूजा करना चाहिए उसकी पूरी जानकारी आप वीडियो में सुन सकते हैं.

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