What is Machan Vidhi: मचान विधि! ये वो तरीका है जिसने किसानों को नई राह दिखाई और उनकी किस्मत बदलकर रख दी. बता दें कि उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले के झंझरी डेवलपमेंट ब्लॉक के एक किसान ने ‘मचान’ (trellis) तकनीक से लौकी की खेती करके अपनी किस्मत बदल डाली. इस खेती के तरीके से हर सीज़न में लाखों रुपये की कमाई होती है. उनकी सफलता को देख हर किसान इसी तरीके को अपनाने की कोशिशों में लगा हुआ है, इस खेती से होने वाले मुनाफे ने किसानों को एक अलग ही उम्मीद दी है. चलिए जान लेते हैं कि मचान विधि किया है जो आज के दौर में तेजी से ट्रेंड कर रही है.
जानें क्या है मचान विधि (Machan Vidhi Kya Hai)
इस विधि को अपनाने से पहले आपके लिए ये समझना बेहद जरूरी है कि ये किस प्रकार की खेती है. बता दें कि मचान विधि में, सब्ज़ियों की बेलों को ज़मीन पर फैलने के बजाय लकड़ी या बांस के ढांचे (मचान) पर चढ़ाया जाता है. इस तरीके से सब्ज़ियां ज़मीन से ऊपर रहती हैं, जिससे उन्हें भरपूर धूप और हवा मिलती है. साथ ही, इस तरह उगाई गई फ़सलों को कीड़ों और बीमारियों से कम नुकसान होता है.
मचाने खेती से उग सकती हैं ये सब्जियां
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मचान विधि (ट्रेलिस विधि) से उगाई जाने वाली मुख्य सब्जियों में लौकी, करेला, तोरई, खीरा और कद्दू शामिल हैं. इन सब्जियों की बेलें लंबी होती हैं, जिन्हें आसानी से ट्रेलिस पर चढ़ाया जा सकता है. बता दें कि ये वो सब्जियां हैं जो मार्किट में भी सबसे ज्यादा बिकती हैं.
मचान तकनीक के फायदे
इस तरीके से लौकी की क्वालिटी बेहतर होती है. फल सड़ने और कीड़ों के हमले की समस्या कम होती है, जिससे पैदावार बढ़ती है. साथ ही, फल तोड़ना भी आसान हो जाता है. बेहतर क्वालिटी के कारण, बाज़ार में फसल की अच्छी कीमत मिलती है.
खाद का इस्तेमाल
नियमित सिंचाई, समय पर खाद देने और जैविक तरीके से कीड़ों की रोकथाम पर खास ध्यान दिया जाता है. इससे फसल स्वस्थ रहती है और लंबे समय तक पैदावार मिलती रहती है. वे बताते हैं कि मचान का ढांचा बनाने में शुरुआती लागत तो आती है, लेकिन ज़्यादा पैदावार और बाज़ार में बेहतर कीमत से यह निवेश आसानी से वसूल हो जाता है. वे आगे कहते हैं कि वे बहुत कम मात्रा में केमिकल खाद का इस्तेमाल करते हैं और ज़्यादातर जैविक खाद पर निर्भर रहते हैं; इससे बहुत अच्छी क्वालिटी की लौकी मिलती है जिसे ग्राहक बहुत पसंद करते हैं.