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Last Land Of India: भारत की वो आखिरी जमीन, जहां से सीता जी को बचाने के लिए वानर सेना के साथ लंका तक पहुंचे थे राम जी

Last Land Of India | Ramayana: भारत के दक्षिणी छोर पर तमिलनाडु राज्य में स्थित धनुषकोडी को अक्सर 'भारत की आखिरी ज़मीन' कहा जाता है. यह जगह रामेश्वरम से लगभग 18 किलोमीटर दूर है और श्रीलंका के सबसे नज़दीकी भारतीय इलाकों में से एक है. यहाँ पहुँचते ही एक अनोखा नज़ारा देखने को मिलता है.

By: Heena Khan | Published: August 1, 2026 2:13:40 PM IST



Last Land Of India | Ramayana: भारत के दक्षिणी छोर पर तमिलनाडु राज्य में स्थित धनुषकोडी को अक्सर ‘भारत की आखिरी ज़मीन’ कहा जाता है. यह जगह रामेश्वरम से लगभग 18 किलोमीटर दूर है और श्रीलंका के सबसे नज़दीकी भारतीय इलाकों में से एक है. यहाँ पहुँचते ही एक अनोखा नज़ारा देखने को मिलता है. एक संकरी सड़क के दोनों ओर दूर-दूर तक फैला नीला समुद्र दिखाई देता है, जो इस जगह को बेहद खास बनाता है. यहाँ तेज़ हवाएँ चलती हैं और शांत समुद्र तट, साफ़ पानी और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है. जो लोग प्रकृति और सुकून पसंद करते हैं, उनके लिए धनुषकोडी एक शानदार पर्यटन स्थल है.

रामायण से जुड़ी पवित्र जगह

धनुषकोडी का धार्मिक महत्व भी बहुत बड़ा है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने यहीं से अपनी वानर सेना के साथ लंका तक पहुँचने के लिए राम सेतु का निर्माण कराया था, ताकि माता सीता को रावण की कैद से मुक्त कराया जा सके. ऐसा भी माना जाता है कि युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान राम ने अपने धनुष के एक वार से इस पुल के एक हिस्से को तोड़ दिया था. इसी वजह से इस स्थान का नाम धनुषकोडी पड़ा, जिसका अर्थ है “धनुष का सिरा”. यहाँ स्थित कोठंडारामस्वामी मंदिर भी रामायण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है. हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर के दर्शन करने और इस पवित्र स्थान की यात्रा करने आते हैं.

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चक्रवात के बाद बना भूतिया शहर

22 दिसंबर 1964 की रात धनुषकोडी पर एक भीषण चक्रवात आया, जिसने पूरे शहर को लगभग पूरी तरह तबाह कर दिया. इस प्राकृतिक आपदा में हज़ारों लोगों की जान चली गई और घर, रेलवे स्टेशन, चर्च तथा कई अन्य इमारतें नष्ट हो गईं. इसके बाद सरकार ने इस जगह को इंसानों के रहने के लिए अनुपयुक्त घोषित कर दिया. तभी से धनुषकोडी को “घोस्ट टाउन” (भूतिया शहर) कहा जाने लगा. आज भी यहाँ पुराने चर्च, रेलवे स्टेशन और टूटे हुए मकानों के खंडहर उस भयानक हादसे की याद दिलाते हैं. हालांकि, कोठंडारामस्वामी मंदिर इस चक्रवात में सुरक्षित बच गया और आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है. इतिहास, प्रकृति और धार्मिक महत्व का अनोखा संगम होने के कारण धनुषकोडी आज भी देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है.

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