What Is GRAP: कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने दिल्ली-NCR के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) फ्रेमवर्क में बदलाव किया है, जिससे बिगड़ते एयर पॉल्यूशन के अलग-अलग स्टेज पर कई पाबंदियां लागू हो गई हैं. बड़े बदलावों में, GRAP-3 के तहत BS-III पेट्रोल और BS-IV डीज़ल या पुरानी हल्की मोटर गाड़ियों पर लगी पाबंदियों को हरियाणा के सोनीपत तक बढ़ा दिया गया है. बदले हुए फ्रेमवर्क में इंटर-सिटी और इंटर-स्टेट बसों पर भी कुछ पाबंदियां GRAP-1 में लाई गई हैं, जबकि GRAP-3 और GRAP-4 के तहत ज़रूरी सामान ले जाने वाली कुछ माल गाड़ियों को मिली छूट हटा दी गई है. ऐसे में आज हम जानेंगे कि GRAP क्या होता है और इसका क्या असर पढ़ता है?
क्या होता है GRAP?
प्रदूषण के दिनों में अक्सर GRAP से जुड़ी हैडलाइन खबरों में देखने को मिलती हैं. GRAP का मतलब है ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान. यह एक साइंटिफिक तरीके से बनाया गया सिस्टम है जिसे 2017 में दिल्ली-NCR में बढ़ते एयर पॉल्यूशन से निपटने के लिए एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) के आधार पर अलग-अलग तरीकों को एक्टिवेट करके शुरू किया गया था.
GRAP स्टेज 2 – ‘बहुत खराब’ AQI (301-400)
जब एयर क्वालिटी ‘बहुत खराब’ कैटेगरी में आ जाती है, तो GRAP 2 एक्टिवेट हो जाता है. इसमें कंस्ट्रक्शन साइट्स पर धूल पर सख्त कंट्रोल और बिना पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस वाले डीज़ल जनरेटर पर बैन शामिल है.
GRAP स्टेज 3 – ‘गंभीर’ AQI (350 से ऊपर)
स्टेज 3 में और भी सख्त पाबंदियां लगती हैं, जैसे सभी गैर-ज़रूरी कंस्ट्रक्शन और तोड़-फोड़ के काम को रोकना, गाड़ियों की आवाजाही को कम करना, और बाहर कम निकलना कम करने के लिए क्लास 5 तक के स्कूलों को बंद करने की सलाह देना.
GRAP स्टेज 4 – ‘गंभीर+’ AQI (450 से ऊपर)
इस इमरजेंसी लेवल पर, ट्रांसपोर्ट पर सख्त पाबंदियां लागू हो जाती हैं. ज़हरीले एमिशन को बहुत कम करने के लिए सभी डीज़ल ट्रकों और कमर्शियल गाड़ियों (ज़रूरी सामान ले जाने वाली गाड़ियों को छोड़कर) की एंट्री बैन कर दी गई है.
GRAP दिल्ली की कैसे मदद करता है
पॉल्यूशन लेवल को खास एक्शन से जोड़कर, GRAP समय पर और टारगेटेड रिस्पॉन्स पक्का करता है. यह तरीका गंभीर पॉल्यूशन एपिसोड के दौरान धूल, गाड़ियों से होने वाले एमिशन और इंडस्ट्रियल पॉल्यूटेंट को कम करता है, जिससे पब्लिक हेल्थ को बचाने में मदद मिलती है. हालांकि GRAP एक साफ़ फ्रेमवर्क देता है, लेकिन इसे लागू करना और एजेंसी के बीच तालमेल बनाना मुश्किल बना हुआ है. दिल्ली के स्मॉग लेवल को कम करने में GRAP की सफलता के लिए पब्लिक का पालन और अधिकारियों द्वारा समय पर एक्शन लेना बहुत ज़रूरी है.
नई GRAP पाबंदियों के बारे में आपको ये बातें जाननी चाहिए:
सोनीपत को GRAP-3 पाबंदियों में जोड़ा गया
बदले हुए फ्रेमवर्क के तहत, GRAP-3 के तहत BS-III पेट्रोल और BS-IV डीज़ल या स्टैंडर्ड से नीचे के हल्के मोटर व्हीकल (चार पहिया) के चलने पर लगी पाबंदियां अब सोनीपत में भी लागू होंगी. पहले, ये पाबंदियां गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में थीं.
बस पाबंदियां GRAP-1 में चली गईं
GRAP-1 के तहत, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और आस-पास के राज्यों, जिनमें पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं, से आने वाली इंटर-सिटी और इंटर-स्टेट बसों को दिल्ली-NCR में तब तक एंट्री नहीं करने दी जाएगी, जब तक कि वे इलेक्ट्रिक, CNG या BS-VI डीज़ल गाड़ियां न हों. पहले, यह पाबंदी सिर्फ़ GRAP-2 से लागू की गई थी. GRAP-3 और GRAP-4 के तहत ज़रूरी सामान ले जाने वाली BS-IV और उससे नीचे के मालवाहक गाड़ियों को मिली छूट हटा दी गई है.