दुनिया में कुल 7 महाद्वीप और करीब 204 देश हैं. इन देशों का आकार और आबादी एक-दूसरे से काफी अलग है. लेकिन इन सबके बीच ऑस्ट्रेलिया बेहद अनोखा है, यह दुनिया का इकलौता ऐसा देश है, जो अपने आप में एक पूरा महाद्वीप भी है.
क्षेत्रफल के लिहाज से यह दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश है और भारत से करीब ढाई गुना बड़ा है. लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसका लगभग 95% हिस्सा या तो पूरी तरह खाली पड़ा है या वहाँ नाम-मात्र के लोग रहते हैं.
आखिर इतना विशाल भू-भाग होने के बावजूद यहाँ का 95% हिस्सा वीरान क्यों है? आइए इसके पीछे के मुख्य कारणों पर नज़र डालते हैं:
समुद्र तटों पर बसा ‘ऑस्ट्रेलिया’
जिओसाइंस ऑस्ट्रेलिया (Geoscience Australia) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश का कुल क्षेत्रफल लगभग 76.9 लाख वर्ग किलोमीटर है. यहाँ की कुल आबादी करीब 2.78 करोड़ है.
बेहद कम जनसंख्या घनत्व: विशाल ज़मीन की तुलना में आबादी इतनी कम है कि यहाँ का जनसंख्या घनत्व औसतन सिर्फ 4 लोग प्रति वर्ग किलोमीटर है. (तुलना के लिए, भारत में यह आंकड़ा लगभग 430 लोग प्रति वर्ग किलोमीटर है.)
ऑस्ट्रेलिया की 85% से भी ज़्यादा आबादी सिडनी, मेलबर्न, ब्रिसबेन, पर्थ और एडिलेड जैसे तटीय (Coastal) शहरों में रहती है. देश के विशाल अंदरूनी हिस्से को स्थानीय भाषा में ‘आउटबैक’ (Outback) कहा जाता है, जो पूरी तरह सन्नाटे में डूबा हुआ है.
आखिर 95% हिस्सा खाली क्यों है? 4 बड़ी वजहें
1. भीषण सूखा और जानलेवा मरुस्थल
अंटार्कटिका के बाद ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे सूखा महाद्वीप है. देश का लगभग 70% हिस्सा अर्ध-शुष्क या मरुस्थलीय (Desert) है. यहाँ ‘ग्रेट विक्टोरिया’, ‘सिम्पसन’, ‘ग्रेट सैंडी’ और ‘तानामी’ जैसे विशाल और खूंखार रेगिस्तान फैले हैं. अंदरूनी हिस्सों में साल भर तापमान बेहद ज्यादा रहता है और कई-कई सालों तक बारिश की एक बूंद तक नहीं गिरती.
2. मीठे पानी की भारी किल्लत
इतने बड़े अंदरूनी इलाके में पूरे साल बहने वाली (Perennial) नदियों का लगभग नामोनिशान नहीं है. मरे-डार्लिंग (Murray-Darling) जैसी जो कुछ नदियाँ हैं भी, वे सिर्फ दक्षिण-पूर्वी किनारों तक सीमित हैं. बिना पानी के इंसानी बस्ती का बसना लगभग असंभव है.
3. बंजर और पोषक तत्वों से हीन मिट्टी
ऑस्ट्रेलिया की ज़्यादातर ज़मीन खेती के लायक नहीं है. यहाँ की मिट्टी लाखों साल पुरानी है, जिसमें फॉस्फोरस और नाइट्रोजन जैसे ज़रूरी पोषक तत्वों की भारी कमी है. पानी की किल्लत और खराब मिट्टी के कारण विशाल इलाकों में फसल उगाना नामुमकिन हो जाता है.
4. बुनियादी ढाँचे का अभाव
इतने सुनसान इलाके में सड़क, रेलवे, बिजली और इंटरनेट पहुँचाना बेहद खर्चीला और मुश्किल काम है. इसके अलावा अंदरूनी हिस्सों में बेहतर स्कूल और अस्पतालों का अभाव है. यही वजह है कि लोग हर तरह की सुविधाओं से लैस तटीय शहरों में रहना पसंद करते हैं.
खाली है, लेकिन बेकार नहीं!
यह समझना गलत होगा कि ऑस्ट्रेलिया का यह 95% खाली हिस्सा किसी काम का नहीं है. असल में यह इलाका कुदरत के अनमोल खजाने से भरा पड़ा है. ऑस्ट्रेलिया के अंदरूनी हिस्सों में लोहा (Iron Ore), सोना, यूरेनियम और लिथियम के विशाल भंडार हैं. इन संसाधनों को निकालने के लिए सरकार और माइनिंग कंपनियाँ अस्थायी बस्तियाँ (Mining Camps) बनाती हैं. यहाँ कर्मचारी शिफ्टों में काम करते हैं और काम खत्म होते ही वापस अपने तटीय शहरों में लौट जाते हैं.