Anti-Paper Leak Bill 2026 Kya Hai: 29 जुलाई 2026 को लोकसभा ने ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ पास किया. यह 2024 में लागू हुए कानून का अपडेटेड वर्शन है. इस कानून में NEET, JEE, SSC, UPSC और अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक होने (खासकर संगठित तरीके से लीक होने) के मामलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट, 60 दिन में जांच, 10 साल की जेल और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है.
औपचारिक रूप से बिल हुआ पास
नए एंटी पेपर लीक बिल 2026 को लोकसभा ने औपचारिक रूप से पास कर दिया है. 2024 के कानून में किए गए संशोधन से परीक्षा पेपर लीक होने की जांच और मुकदमा चलाना आसान और दोषियों के लिए अधिक महंगा (सख्त) हो गया है. NEET, JEE Main, CUET, UGC NET, SSC, UPSC, RRB और IBPS परीक्षाओं की तैयारी करने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए ऐसे संशोधन महत्वपूर्ण हैं. नीचे दी गई गाइड में बिल में किए गए बदलावों और सजा के ढांचे के बारे में बताया गया है.
एंटी पेपर लीक बिल 2026 क्या है?
एंटी पेपर लीक बिल 2026, जिसका औपचारिक नाम ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ है, मौजूदा ‘पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024’ में एक संशोधन है. इसे 24 जुलाई 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद 29 जुलाई 2026 को लोकसभा ने पास किया. यह बिल 2024 के एक्ट की जगह नहीं लेता, बल्कि उसे और मजबूत बनाता है. इसका मुख्य मकसद वही है: संगठित पेपर लीक नेटवर्क को सजा देना, न कि ईमानदार उम्मीदवारों को. नया बदलाव सजा की गति और सख्ती से जुड़ा है. संसद में बिल पेश करने वाले केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ये संशोधन “ईमानदारी की भावना” के साथ और 2024 के कानून को लागू करने के दौरान मिले अनुभवों के आधार पर किए गए हैं.