नई दिल्ली : देशभर में रियल एस्टेट रेग्युलेटर बिल लागू  हो चुका है और बिल के मुताबिक सरकार बिल्डर्स पर शिंकजा भी कस रही है, लेकिन आज भी बिल्डर्स अपनी मनमानियों से बाज नहीं आ रहे हैं. एनसीआर हो या फिर एमएमआर रिजन. सवाल है कि क्यों बिल्डर्स रेरा का पालन नहीं कर रहे हैं. क्यों बिल्डर्स अपने मुताबिक रेरा के नियमों तोड़ मरोड़ कर रहे हैं.
 
बिल्डर्स ग्राहकों से फ्लैट का पैसा तो पूरा वसूल रहे है, लेकिन घर बनाने के लिए जिस कन्सट्रक्शन मटेरियल का इस्तेमाल कर रहे हैं, वो ना सिर्फ क्वालिटी के लिहाज से बेकार है बल्कि उन लोगों की जिंदगी के लिए घातक है जो मकान में रहने वाले है.
 
जब इंसान का घर ही मौत को दावत देने लगे तो फिर वो खुद को कहां सुरक्षित महसूस करेगा. एक के बाद एक हो रहे हादसे ने असुरक्षा के इस भाव को और बडा कर दिया है. अभी कुछ दिन पहले यूपी के नोएडा सेक्टर-78 में अंतरिक्ष गोल्फ-2 सोसायटी की दीवार अचानक गिर गई और दीवार के पीछे 5 लोग दब गए.
 
 
इतना ही नहीं इसमें 2 लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि 3 लोग बुरी तरह जखमी हुए. बिल्डिंग पुरानी होती तो भी कोई बात थी. नई बिल्डिंग में ये हादसा हैरान करता है. ये पहला मौका नहीं है इससे पहले भी नोएडा समते कई शहरों में बिल्डर्स की बनाई इमारते धड़ा-धड़ गिर रही हैं. ऐसा इसीलिए हो रहा है कि क्योकि बिल्डर्स ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में घटिया कंसट्रक्शन मटेरियल का इस्तेमाल कर रहे है.
 
जहां एक तरफ सरकार सस्ते घरों की बात कर रही हैं वहीं दूसरी तरफ बिल्डर सस्ता कंस्ट्रक्शन मैटीरियल लगा कर लोगों की जान खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं, वो भी सरकार और प्रशासन के कड़े नियमों के बाद. जो नियम कहता है उसके मुताबिक घर की टोटल कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में मैटीरियल्स की हिस्सेदारी 47 परसेंट होती है, लेकिन बिल्डर्स इस नियम को जानकर भी अनजान बने हुए है.

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