नई दिल्ली: परेशानी बन कर उभर रहे निजी बिल्डरों ने जिस तरह मनमानी मचा रखी है उससे आम जनता बेहद परेशान है. इस समय हर तरफ यही देखने को मिल रहा है. जेपी, आम्रपाली, यूनिटेक जैसे नामी बिल्डर ग्राहकों पर अब तक भरोसा नहीं कायम कर पाए.
 
कभी ग्राहकों को फ्लैट समय पर नहीं मिलते तो कभी सुविधाएं. लेकिन एक और मुद्दा है जो बिल्डरों की लापरवाही की वजह से ग्राहकों के लिए ना सिर्फ मुसीबत बना हुआ है बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकता है. जी हां बिल्डर पैसा बचाने और बनाने के चक्कर में कंसट्रक्शन की क्वालिटी से समझौता कर रहे है और बिल्डिंग में दोयम दर्जे का सामान इस्तेमाल कर ग्राहकों के लिए नहीं मुसीबत खड़ी कर रहे है.
 
बिल्डरों की इस लापरवाही और मनमानी से कैसे निपटेगा ग्राहक.घर एक सपना शो में आपका स्वागत है आज हम बिल्डरों की इसी जानलेवा लापरवाही पर सवाल उठाने जा रहे है.साथ ही ग्राहकों को आगाह करने जा रहे है कि कैसे वो बिल्डरों की इस धोखाधड़ी से अपना बचाव कर सकते है.
 
साल 2009  में इन्होने ग्रेटर नोएडा वेस्ट इलाके में सुपरटेक बिल्डर से एक फ्लैट खरीदा था . पूरे पैसे देने के बावजूद बिल्डर ने जैसे तैसे इन्हे घर का पजेशन दिया लेकिन फ्लैट मिला.तो मोहित को नई मुसीबत से दो चार होना पड़ा. मोहित ने जैसे ही अपने नए घऱ में कदम रखा.उस घर ने आते ही मोहित और उनके परिवार को अपनी असलियत दिखानी शुरु कर दी.
 
घर की दीवारों और छत से प्लास्टर के नाम पर चिपकाई गई सूखी रेत गिरने लगी. लगा जैसे..कुछ और वक्त बीतेगा तो ये छत भी गिर जाएगी. प्लास्टर का गिरना आम बात है लेकिन नए घर की छत से प्लास्टर का गिरना.धोखे की बात है जो बिल्डर मोहित को दे चुका था.
 
मोहित के नए घर में हुई इस घटना ने पूरे प्रोजेक्ट पर सवालिया निशान लगा दिए और साथ ही पजेशन ले चुके लोगों के बीच इस खबर ने हड़कंप भी मचा दिया.लाजमी भी है क्योकि इतनी कमजोर बिल्डिंग कब गिर जाए .

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