हैदराबाद. आंध्र प्रदेश में लोकसभा चुनाव के साथ ही इस बार विधानसभा चुनाव भी हुए हैं जिनमें जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए प्रदेश की तेलुगू देशम पार्टी और चंद्रबाबू नायडू सरकार को उखाड़ फेंका. आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव 2019 में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश की 175 विधानसभा सीटों में से 152 सीट पर जीत दर्ज की. वहीं टीडीपी को काफी कम सीटें मिलीं और चंद्रबाबू नायडू की पार्टी ने महज 22 सीटों पर जीत दर्ज की. जेएसपी को महज एक सीट मिली. कांग्रेस और बीजेपी को आंध्र प्रदेश में एक भी सीट नहीं मिली. वहीं लोकसभा चुनाव 2019 में आंध्र प्रदेश की 25 लोकसभा सीटों में से 22 पर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की जीत हुई है और 3 सीटें टीडीपी जीत पाई हैं.

आपको बता दूं कि आंध्र प्रदेश की सियासत के नए बादशाह बन कर उभरे जगन मोहन रेड्डी की कहानी किसी सुपरहिट फिल्म की कहानी जैसी है. आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वाईएसआर रेड्डी के बेटे जगन मोहन पिता की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत के बाद सियासत में आए. 2009 में आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएसआर रेड्डी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत के बाद पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई. राज्य में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने आत्मदाह कर लिया. जगन मोहन ने इन लोगों के परिवार से मिलने का फैसला किया. उन्होंने इसे ओदरपू यात्रा (सहानुभूति यात्रा) का नाम दिया. कांग्रेस पार्टी को यह नागवार गुजरा. कांग्रेस ने जगन मोहन को अपनी यात्रा रद्द करने को कहा लेकिन जगन मोहन ने इस आदेश को दरकिनार कर अपनी यात्रा जारी रखी. जगन मोहन ने पार्टी को कहा कि यह उनका निजी मामला है और पार्टी को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. कांग्रेस ने इसे अनुशासनहीनता करार देते हुए जगन मोहन को पार्टी से निकाल बाहर किया. जगन मोहन ने नई पार्टी बनाने की घोषणा कर दी.

नई पार्टी से शुरू हुआ आंध्र प्रदेश में राजनीति का नया दौर
मार्च,2011 में जगन मोहन रेड्डी ने वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की स्थापना की. कांग्रेस को क्या मालूम था कि जिस शख्स को उन्होंने पार्टी से निकाला है एक दशक बीतने से भी पहले वहीं व्यक्ति पूरी कांग्रेस पार्टी को राज्य से उखाड़ फेंकेगा. YSRCP के अध्यक्ष के तौर पर जगन मोहन ने कडपा लोकसभा से चुनाव लड़ा और लगभर साढ़े पांच लाख वोटों से जीते. एक नई पार्टी के मुखिया की यह एक धमाकेदार एंट्री थी.जगन मोहन के कांग्रेस छोड़ने के बाद उनके समर्थक रहे कई नेता कांग्रेस छोड़कर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए. 2012 में 2 लोकसभा सीटों पर उप चुनाव हुए जहां YSRCP को जीत हासिल हुई.

CBI जांच और 16 महीने की जेल
जगन मोहन रेड्डी से कांग्रेस आलाकमान सख्त नाराज था. एक तो राज्य में तेलंगाना राज्य की मांग के लिए आंदोलन हिंसक होता जा रहा था दूसरी तरफ जगन मोहन के साथ कांग्रेस के कई नेता पार्टी छोड़कर YSRCP में शामिल हो गए थे. इसने राज्य में कांग्रेस पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं. जगन मोहन को इसकी सजा मिली. साक्षी टीवी के मालिक जगन मोहन पर वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप लगा. सीबीआई जांच हुई और जल्द ही जगन मोहन जेल की सलाखों के भीतर थे. उन्हें 16 महीने जेल में रहना पड़ा. जेल में बंद जगन मोहन के पक्ष में राज्य में माहौल बन चुका था. लोग मानने लगे कि उन्हें कांग्रेस पार्टी जबरन परेशान कर रही है.

तेलंगाना राज्य के गठन के खिलाफ 125 घंटे की भूख हड़ताल
आंध्र प्रदेश में तेलंगाना राज्य के निर्माण के लिए मांग तो 1949 से ही उठ रही थी लेकिन एक दशक पहले इसने हिंसक रूप ले लिया. के चंद्रशेखर राव के नेतृत्व में तेलंगाना राज्य के गठन की मांग ने जोर पकड़ लिया. आंध्र प्रदेश का एक हिस्सा जल उठा. जगन मोहन इस दौरान जेल में थे. केंद्र सरकार ने नए तेलंगाना राज्य के निर्माण की मंजूरी दे दी थी. जगन मोहन ने इसके खिलाफ जेल में ही भूख हड़ताल शुरू की. 125 घंटे की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की. जब उनकी तबीयत बिगड़ने लगी तो जगन को उस्मानिया हॉस्पीटल में भर्ती किया गया. जगन और उनकी मां विजयम्मा ने विधायकी से इस्तीफा दे दिया. जगन मोहन ने रिहा होने के बाद तेलंगाना राज्य के निर्माण के विरोध में 72 घंटे के बंद का ऐलान किया. जगन मोहन की स्वीकार्यता आंध्र प्रदेश में इन दोनों प्रदर्शनों के बाद व्यापक तौर पर बढ़ी.

2014 लोकसभा चुनावों के बाद पलटी किस्मत
2014 लोकसभा चुनावों में पहली बार चुनाव लड़ रही पार्टी ने आंध्र प्रदेश में 8 लोकसभा सीटें जीतीं. केंद्र की सत्ता से कांग्रेस की विदाई हो गई. कांग्रेस को पूरे देश से लोकसभा की सिर्फ 44 सीटें मिलीं. ये कांग्रेस का सार्वाधिक खराब प्रदर्शन था. मोदी सरकार के आने के बाद जगन मोहन की रिहाई संभव हुई. तेलंगाना राज्य बन जाने के बाद आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडु की तेलगुदेशम पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. जगन मोहन रेड्डी की YSRCP को भी 175 में से 67 सीटें मिलीं. आंध्र प्रदेश विधानसभा में जगन मोहन की पार्टी मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी. जगन मोहन की पार्टी ने 9 लोकसभा सीटें भी जीत लीं. ये एक नई पार्टी के लिहाज से शानदार प्रदर्शन था.

प्रजा संकल्प यात्रा- 3000 किलोमीटर से ज्यादा, 13 जिले 430 दिन
नेता विपक्ष रहते हुए 6 नवंबर 2017 को जगन मोहन रेड्डी ने प्रजा संकल्प यात्रा निकाली. इस यात्रा में जगन मोहन रेड्डी ने 3000 किलोमीटर से ज्यादा की पैदल यात्रा तय की. इस दौरान वह रोजाना सैकड़ों लोगों से मिलते और अपनी बात रखते. 430 दिनों तक चली इस यात्रा में जगन मोहन ने 125 विधानसभा सीटों, 13 जिलों की यात्रा तय की. यह यात्रा 9 जनवरी 2019 तक चली. बीच में कुछ समय तक इस यात्र को रोकना पड़ा क्योंकि जगन मोहन रेड्डी पर हैराबाद एयरपोर्ट पर जानलेवा हमला हो गया. उनके ऊपर हमलावर ने चाकू से हमला कर दिया जिससे उनके कंधे पर काफी चोट आई. जगन को सर्जरी से गुजरना पड़ा लेकिन ठीक होने के बाद उन्होंने दोबारा अपनी प्रजा संकल्प यात्रा को पूरा किया.

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ जुगलबंदी
कहा जाता है कि जगन मोहन की प्रजा संकल्प यात्रा की सलाह मशहूर राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने ही दिया था. प्रशांत की कंपनी आईपैक जगन मोहन के पॉलीटिकल कैंपेन को देखती है. इन दोनों युवाओं की जोड़ी ने आंध्र प्रदेश की राजनीति को बदल कर रख दिया है. पहली बार चुनाव लड़ने वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी आंध्र प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल के तौर पर उभरी. लेकिन किसे मालूम था कि अपने दूसरे विधानसभा चुनाव में ही जगन मोहन दो तिहाई से ज्यादा बहुमत से राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे. 23 मई, 2019 को आंध्र प्रदेश में लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा चुनाव के भी नतीजे आए हैं. राज्य की 175 विधानसभा सीटों में से 147 सीटें जगन मोहन की पार्टी जीत रही है , सत्ताधारी टीडीपी को 28 सीटें और 1 सीट जनसेना पार्टी को मिलती हुई नजर आ रही है. वहीं राज्य की 25 लोकसभा सीटों में YSRCP 23 सीटें जीतती नजर आ रही है. पूरे देश में घूम-घूमकर तीसरे मोर्चे की अगुवाई करने वाले चंद्रबाबू नायडु की पार्टी टीडीपी को केवल 2 सीटों पर बढ़त हासिल है. चंद्रबाबू नायडु लोकसभा तो हारे हीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री का भी पद गंवा बैठे. आने वाली 30 मई को जगन मोहन रेड्डी आंध्र प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे.

कांग्रेस का अहंकार और जगन मोहन का पलटवार
उन्हें अपनी पार्टी से निकालने वाली कांग्रेस की हालत ये है कि विधानसभा और लोकसभा में आंध्र प्रदेश कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल पाया है. जगन मोहन रेड्डी ने अकेले पूरी कांग्रेस पार्टी को आंध्र प्रदेश की सियासत से निकाल बाहर किया है.अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने के महज 8 साल बाद जगन मोहन रेड्डी उसी राज्य के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं जहां कभी उनके पिता मुख्यमंत्री थे. फर्क बस ये है कि वाईएसआर रेड्डी कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे और जगन मोहन रेड्डी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री बनेंगे. जगन मोहन की राजनीतिक यात्रा उन्हें भारत के सियासत का एंटी हीरो बनाती है.

जगन मोहन ने कांग्रेस के अंहकार को जिस तरीके से जमीनदोज किया है उसकी दूसरी मिसाल ढूंढे नहीं मिलती. जगन मोहन का राजनीतिक सफर यह भी साबित करता है कि राजनीति में बादशाह वहीं है जो जनता की नब्ज पकड़ना जानता है. जगन मोहन युवा हैं और संभावनाओं से भरे हुए भी. उनकी राजनीतिक ट्रेनिंग जितनी उनके पिता ने जीते जी नहीं की उससे ज्यादा उनकी मौत ने कर दी. जगन मोहन रेड्डी का मुख्यमंत्री बनना वाईएसआर रेड्डी को एक बेटे की श्रद्धांजलि है. उस बेटे को जिसे अपनी पिता के लिए अफसोस करने, लोगों से मिलने से रोका गया. आज उसने कांग्रेस की वो हालत कर दी है जिस पर अफसोस भी नहीं किया जा सकता.

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