हैदराबाद. Lok Sabha Election Results 2019: Complete list of winners updating live-लोकसभा चुनाव 2019 के मतों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू हो गई है. तेलंगाना में मुख्यमंत्री केसीआर की लोकप्रियता मतगणना के दौरान भी दिखाई दे रही है. टीआरएस तेलंगाना की 17 लोकसभा सीटों में 11 पर आगे चल रहा है. बीजेपी को भी तेलंगाना में फायदा होता दिख रहा है. आदिलाबाद सहित कुल 3 लोकसभा सीटों पर बीजेपी को बढ़त मिली हुई है.  हैदराबाद से AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी आगे चल रहे हैं. कांग्रेस को 1 सीट पर बढ़त मिली हुई है. सिकंदराबाद से टीआरएस के उम्मीदवार तलासनी साई किरन यादव आगे चल रहे हैं.

मतगणना केंद्रों पर काउंटिंग रिजल्ट और रूझानों से ये पता चलेगा कि कौन किस सीट पर आगे चल रहा है, कौन पीछे चल रहा है, कौन हार रहा है, कौन जीत रहा है. वोटों की गिनती से ये साफ हो जाएगा कि केंद्र में मोदी सरकार वापसी कर पाएगी या देश को एक नया प्रधानमंत्री मिलेगा. दिल्ली की गद्दी पर काबिज होने के लिए दक्षिण भारत की 129 सीटों को साधना भी राष्ट्रीय दलों के लिए चुनौती है. तेलंगाना में लोकसभा की 17 सीटें हैं. तेलंगाना में AIMIM प्रमुख ओवैसी हैदराबाद सीट से दोबारा जीत की उम्मीद पाले हैं. वहीं तेलंगाना में केसीआर की टीआरएस भी काफी मजबूत है. तीसरे मोर्चे की अगुवाई में जुटे केसीआर को उम्मीद है कि तेलंगाना उनकी पार्टी को 2019 लोकसभा चुनावों में इतनी सीटें जरूर दे देगा कि टीआरएस की केंद्र की सरकार के गठन में एक महत्वपूर्ण प्लेयर के तौर पर उभरे. तेलंगाना की 17 सीटों में हैदराबाद, आदिलाबाद, महबूबाबाद, निजामाबाद, जाहिराबाद, नालगोंडा, चेवेल्ला, महबूबनगर, भोंगीर, पेडापल्ले, मल्कागिरि, खम्मम, करीमनगर, वारांगल, नागरकुरनूल, सिकंदराबाद सीटें आती हैं. जैसे-जसै रूझान आते जाएंगे हम आपको अपडेट करते जाएंगे.

तेलंगाना राज्य समिति (TRS) की साख पूरे राज्य में काफी मजबूत है. के चंद्रशेखर राव की तेलंगाना में लोकप्रियता काफी है. तेलंगाना में असददुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM की भी पकड़ है लेकिन मुख्यत: यह हैदराबाद और कुछ चुनिंदा इलाकों तक ही सीमित है. हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भी टीआरएस को भारी बहुमत मिला था. जिस तरह केसीआर तीसरे मोर्चे की अगुवाई करते हुए दिखे हैं पिछले एक साल में वह राजनीतिक पंडितों को उनकी तरफ आकर्षित करता है. देश में अगर त्रिशंकु सरकार बनने की नौबत आती है तो केसीआर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते नजर आएंगे. दक्षिण भारत में केसीआर की बढ़ती लोकप्रियता को नजरअंदाज करना किसी भी राष्ट्रीय दल के लिए इतना आसान नहीं होगा.