नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव 2019 के अंतिम चरण की वोटिंग से पहले इंडिया न्यूज (India News), न्यूज एक्स (NEWSX) को पीएम नरेंद्र मोदी ने इंटरव्यू में विपक्ष के इस आरोप को खारिज कर दिया कि वो विकास और देश के जरूरी मसलों पर चुनाव लड़ने के बजाय राष्ट्रवाद के नाम पर चुनाव लड़ रहे हैं. नरेंद्र मोदी ने कहा है कि गुजरात और उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव जीएसटी और नोटबंदी के मुद्दे पर लड़ा गया था जिसे बीजेपी ने जीता. इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया था- विपक्ष का आरोप है कि आप डेवलपमेंट, जीएसटी, नोटबंदी और रोजगार के मुद्दे पर चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. आप राष्ट्रवाद के नाम पर इन मुद्दों से विपक्ष और देश की जनता का ध्यान भटकाते हैं और विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं देते हैं. पूर्वी यूपी की कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी आपको इन मसलों पर बहस करने की खुली चुनौती भी दे चुकी हैं लेकिन फिर भी आप इसका जवाब नहीं दे रहे हैं. इस सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और गुजरात का चुनाव नोटबंदी और जीएसटी पर ही लड़ा था और हमें जीत मिली जबकि विपक्ष को इन चुनावों में मुंह की खानी पड़ी.

अपने इंटरव्यू के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की जनता को सही और गलत की जानकारी हैं. देश की जनता जानती है कि नोटबंदी और जीएसटी से देश को कितना फायदा हुआ है. इसी का नतीजा था कि गुजरात और उत्तर प्रदेश चुनाव में देश की जनता ने हमें वोट दिया जो कि विपक्ष के मुंह पर  तमाचा है. मोदी नाम ही है विकास का और मोदी हमेशा विकास और देश की जनता की खुशहाली के लिए लड़ता रहेगा और जब तक देश में भारतीय जनता पार्टी का शासन रहेगा देश की जनता को विपक्ष वेबकूफ नहीं बना सकेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नंवबर 2017 को रात देश के नाम संबोधन के बाद देश भर में 500 और 2000 की पूरानी नोटों को बैन कर दिया था. नोटबंदी की वजह से देश में नगदी का संकट खड़ा हो गया है. इसके अलावा कई रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि नोटबंदी की वजह लाखों की संख्या में लोग बेरोजगार हो गए. नोटबंदी से सबसे ज्यादा नुकसान छोटे व्यपारियों और मजदूर वर्ग हुआ. नोटबंदी के बाद से विपक्ष पीएम नरेंद्र मोदी पर हमलावर रहता है. विपक्ष कई बार नोटबंदी को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी पर आरोप लगा चुका है कि नोटबंदी से न आंतकवाद की कमर टूटी और न ही देश में कालाधन कम हुआ बल्कि नोटबंदी की वजह से देश में बेरोजगारी और बढ़ गई.

भारत में गुड्स ऐंड सर्विस टैक्स (GST) जुलाई 2017 में लागू किया गया था. जीएसटी लागू करने के बाद सरकार ने 44 दिन के अंदर टैक्स स्लैब में कई बार बदलाव किया था जिसके बाद सरकार की काफी आलोचना हुई थी. विपक्ष ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार आधी-अधूरी तैयारियों के साथ जीएसटी को लागू किया है जिसके कारण हर दिन इसमें बदलाव किया गया और केंद्र सरकार द्वारा ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि व्यापारी वर्ग को फायदा दिया जा सके.

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