नई दिल्ली: सात चरणों में होने वाले लोकसभा चुनावों में से तीसरे चरण का मतदान पूरा हो चुका है. मंगलवार को हुए तीसरे चरण के मतदान में 63.24 फीसदी वोटिंग हुआ है. तीसरे चरण के मतदान के बाद लोकसभा की कुल 543 सीटों में से 303 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है और अब 240 सीटों पर ही मतदान होना बाकी है. इस बार बीजेपी के खिलाफ विपक्ष एकजुट होकर चुनाव लड़ रहा है लिहाजा लड़ाई बीजेपी बनाम महागठबंधन की हो गई है. 2014 के नतीजों पर नजर डालें तो एनडीए के खाते में 340 सीटें गई थी जबकि खुद बीजेपी 282 सीटों पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत लाने में कामयाब रही थी. 2014 में पीएम मोदी का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा था लेकिन इस बार हालात पिछले लोकसभा चुनावों जैसे नहीं है.

कहते हैं कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ होते हुए जाता है, लखनऊ यानी उत्तर प्रदेश की राजधानी जहां बीजेपी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बनकर बैठे हैं अखिलेश यादव और मायावती जिन्होंने गठबंधन कर बीजेपी के लिए यूपी की डगर बेहद मुश्किल बना दी है. सपा-बसपा के गठबंधन से निश्चित तौर पर बीजेपी को झटका लगेगा और बाकी रही सही कसर कांग्रेस पूरी कर देगी. अब बात करते हैं राजस्थान की जहां बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस ज्यादा मजबूत स्थिति में नजर आ रही है.

लोकसभा चुनाव से पहले राजस्थान की दो लोकसभा सीटों अलवर और अजमेर के अलावा अलवर, अजमेर मांढलगढ़ विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ था जहां तीनों ही सीटों पर कांग्रेस ने बीजेपी को हरा दिया था. इसके अलावा 200 सीटों वाली राजस्थान विधानसभा में भी पिछले साल हुए चुनावों में कांग्रेस को 99 सीटें मिली थी जबकि बीजेपी 73 सीटों पर सिमट गई थी.

राजस्थान सीमा से सटे मध्य प्रदेश की बात करें तो बीजेपी ने यहां भी अपनी सरकार गंवाई है. जाहिर है बीजेपी के लिए यहां माहौल अनुकूल नहीं है. कमोबेश छत्तीसढ़ में भी यही हालत रहने वाले हैं. राजनीतिक विशलेषकों का कहना है कि बीजेपी इन राज्यों में कम से कम पचास सीटें गवां सकती है. कहा जा रहा है कि इनमें से आधी सीटें अकेले यूपी की होगी बशर्ते कांग्रेस सपा-बसपा के दलित-मुस्लिम वोटबैंक में सेंध नहीं लगा पाती है.

राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक अब इस लिस्ट में पंजाब और जम्मू-कश्मीर को भी जोड़ दें तो दोनों राज्यों से बीजेपी कम से कम दस सीटें गवां सकती है. वहीं गुजरात की बात करें तो यहां भी बीजेपी की कम से कम 10 सीटें कम होगी जबकि 2014 में यहां से बीजेपी ने क्लीन स्वीप किया था. इसके अलावा बात करें महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तराखंड की तो यहां परिणाम कमोबेश 2014 लोकसभा चुनावों जैसा ही होगा.

बंगाल, ओडिशा और दक्षिण भारत से जुड़ी है बीजेपी की आस

अब उन राज्यों की बात करते हैं जहां से बीजेपी को सबसे ज्यादा उम्मीदे हैं जिनमें सबसे बड़ा राज्य है पश्चिम बंगाल. पिछली बार पश्चिम बंगाल में बीजेपी का सूपड़ा साफ हो गया था लेकिन इस बार बीजेपी वहां नंबर दो की पोजिशन पर है. ओडिशा में भी बीजेपी मजबूत हुई है. आंध्र प्रदेश और तेंलगाना में भी वाइएसआर कांग्रेस और टीआरएस के जरिए एनडीए को अच्छी सीटें मिलने का अनुमान है.

तमिलनाडू की बात करें तो यहां भी एनडीए की सहयोगी पार्टियों के जरिए पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार अच्छी सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है. पिछले लोकसभा चुनाव में तमिलनाडू से बीजेपी को सिर्फ एक सीट मिली थी लिहाजा यहां से जितनी भी सीटें एनडीए के खाते में जाएगी वो बोनस ही समझा जाएगा.यानी पश्चिम बंगाल, ओडिशा और नॉर्थ-ईस्ट से बीजेपी को 25-30 सीटें मिल सकती है वहीं सहयोगी पार्टियों टीआरएस और वाइ एस आर कांग्रेस के जरिए एनडीए को 30 सीटें मिल सकती है.

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