नई दिल्ली. जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में 14 सितंबर को होने वाले जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल पहली बार अपने कैंडिडेट उतारेगी और उसकी तरफ से अध्यक्ष कैंडिडेट होंगे जयंत कुमार जिज्ञासु जो कुछ दिन पहले जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार पर जातिवादी, संगठन को कमजोर करने जैसे आरोप लगाकर सीपीआई और उसके छात्र विंग एआईएसएफ से इस्तीफा दे चुके हैं.

अब तक की खबरों के मुताबिक जेएनयू छात्र संघ चुनाव में इस बार भी आईसा, एसएफआई समेत वाम छात्र संगठन गठबंधन बनाकर लड़ेंगे ताकि भाजपा से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी को रोका जा सके. खबर है कि इस बार एआईएसएफ भी वाम गठबंधन का हिस्सा बन सकता है जो पिछले साल इससे अलग अकेले लड़ा था.

आरजेडी के छात्र विंग की तरफ से प्रेसिडेंट कैंडिडेट बनने जा रहे जयंत कुमार जिज्ञासु आईआईएमसी से पत्रकारिता में डिप्लोमा के बाद जेएनयू से पीएचडी कर रहे हैं. कन्हैया कुमार के विवादित नारेबाजी प्रकरण के बाद से कन्हैया के सबसे करीबी बनकर उभरे जयंत ने कन्हैया पर जातिवादी राजनीति, खुद को आगे बढ़ाने की कीमत पर संगठन और पार्टी को कमजोर करने का आरोप लगाया था. तीन साल से सक्रिय रूप से एआईएसएफ से जुड़े और इस्तीफा के वक्त संगठन के जेएनयू सचिव रहे जयंत ने कहा था कि वंचित तबके के लोगों को बंधुआ मजदूर समझ लिया गया है, झंडा कोई ढोता है, नेता कोई बनता है.

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दूसरी तरफ जेएनयू कैंपस में गठबंधन के तहत उम्मीदवारों के नाम भी सामने आने लगे हैं. लेफ्ट एलायंस में तहत हर बार की तरह अध्यक्ष का कैंडिडेट आईसा से होगा जिसके लिए एनसाई बालाजी का नाम तय माना जा रहा है. एबीवीपी की तरफ से ललित कुमार पांडेय को अध्यक्ष कैंडिडेट बनाने की खबर है.

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कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से विकास यादव प्रेसिडेंट उम्मीदवार हो सकते हैं. छात्र राजद की तरफ से जयंत कुमार जिज्ञासु का नाम भी तय माना जा रहा है. खबर है कि दिल्ली में मौजूद लालू यादव के बेटे और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव ने जयंत जिज्ञासु की उम्मीदवारी को हरी झंडी दे दी है.

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जयंत जिज्ञासु ने आरोप लगाया कि जब पूरा कैंपस कम्पलसरी अटेंडेंस के ख़िलाफ़ लड़ रहा था तो कन्हैया कुमार ने सबसे पहले जाकर अटेंडेंस शीट पर साइन कर दिया जो छात्र आंदोलन और जेएनयू कम्युनिटी के साथ गद्दारी थी. जयंत ने कन्हैया पर बतौर छात्र संघ अध्यक्ष छात्रावास आवंटन में ओबीसी आरक्षण के प्रस्ताव को वीटो लगाकर खारिज करने का भी आरोप लगाया. जयंत ने अपने इस्तीफे में इन दो बातों को लेकर कन्हैया से अपनी नाराजगी का इजहार किया था.

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