इंदौर: चुनाव के दौरान नेताओं को जिन दो चीजों की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ती है वो है जनता का समर्थन और पैसा. यही वजह है कि चुनाव आयोग की लाख सख्ती के बावजूद चुनाव के दौरान भारी मात्रा में ब्लैक मनी का इस्तेमाल होता है लेकिन ऐसा कभी नहीं होता कि कोई नेता चुनाव आयोग से ही चुनाव लड़ने के पैसे मांग बैठे. लेकिन वो कहते हैं ना साहब एमपी गजब है..सबसे अजब है तो यहां की राजनीति भी अजब है. ऐसे ही एक अजब-गजब नेता हैं किशोर समरीते जिन्होंने चुनाव आयोग से 75 लाख रुपये देने की मांग की है और पैसे ना देने पर चुनाव आयोग से अपनी एक किडनी बेचने की इजाजत मांगी है.

समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक रह चुके किशोर समरीते ने जिला चुनाव अधिकारी दीपक आर्य को चिट्ठी लिखी है कि चुनाव आयोग ने चुनाव लड़ने के लिए खर्च की अधिकतम सीमा 75 लाख रूपये रखी है लेकिन उनके पास चुनाव लड़ने के पैसे नहीं है. ऐसे में वो चुनाव आयोग से गुजारिश करते हैं कि या तो उन्हें 75 लाख रूपये दिेए जाएं ताकि वो चुनाव लड़ सकें या फिर उन्हें इजाजत दी जाए कि वो अपनी एक किडनी बेच दें ताकि वो चुनाव लड़ने लायक फंड जुटा सकें.

किशोर समरीते का कहना है कि वो बाकी नेताओं की तरह भ्रष्ट नहीं हैं इसलिए उनके पास चुनाव लड़ने के पैसे नहीं है. वो आगे लिखते हैं कि चुनाव प्रचार में सिर्फ पंद्रह दिन का समय बचा है और वो फंड नहीं जुटा पा रहे हैं. ऐसे में या तो चुनाव आयोग उन्हें 75 लाख रूपये दे या फिर बैंक से उन्हें लोन दिलवा दे और वो भी नहीं कर सकते तो उन्हें अपनी एक किडनी बेचने की इजाजत दे. सिमराते इस बार बालाघाट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में हैं. चुनाव आयोग के पास इस तरह का पहला मामला आया है. देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग इस लेटर के जवाब में क्या कहता है. 

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