लखनऊ. लोकसभा चुनाव 2019 में अब कुछ ही समय बाकी है. देशभर की सभी राजनीतिक पार्टियों ने तैयारियां शुरू कर दी है. साल 2014 के आम चुनावों में जाट लैंड से मशहूर यूपी की बागपत लोकसभा सीट जब चर्चाओं में आई, जब मोदी लहर के आगे जाटों के सबसे बड़े नेता और रालोद चीफ अजीत सिंह बीजेपी कैंडिडेट सत्यापल मलिक के सामने चुनाव हार गए और तीसरे नंबर पर रहे. वहीं अखिलेश यादव की पार्टी से उतरे पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद दूसरे नंबर पर रहे. जबकि मायावती के जाट कैंडिडेट प्रशांत चौधरी दलित वोटबैंक के साथ कुछ कमाल नहीं दिखा सके और वे चौथे नंबर पर रहे.

2014 में बागपत लोकसभा सीट पर 15 लाख 5 हजार 175 वोटर्स थे. जिनमें भाजपा के विजयी उम्मीदवार डॉ. सत्यपाल सिंह को 4 लाख 23 हजार 475 वोट मिले. जबकि सपा उम्मीदवार गुलाम मोहम्मद को सिर्फ 2 लाख 13 हजार 609 मत मिले और वे दूसरे नंबर पर रहे. वहीं सीट पर 5 बार से सांसद रहे आरएलडी चीफ चौधरी अजीत सिंह को सिर्फ 1 लाख 99 हजार 516 वोट और बसपा उम्मीदवार प्रशांत चौधरी को मात्र 1 लाख 41 हजार 743 वोट मिले.

वहीं अगर वोट प्रतिशत की बात करें तो 2014 में बागपत सीट पर बीजेपी उम्मीदवार को 42.15 फीसदी वोट मिले. दूसरे नंबर पर रहे सपा कैंडिडेट को 21. 26, आरएलडी चीफ अजीत सिंह को 19.86 और बसपा के उम्मीदवार को 14.11 फीसदी वोट मिले. बता दें कि बागपत सीट रालोद का गढ़ मानी जाती है. पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह भी बागपत से सांसद रहे जिसके बाद उनके बेटे अजीत सिंह इस सीट से 5 बार सांसद रहे. इस सीट पर बीजेपी का इतिहास कुछ खास तो नहीं रहा लेकिन 2014 में मोदी लहर चौधरी अजीत सिंह के हारने का एक बड़ा कारण बन गई.

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