नई दिल्ली. नागपंचमी पर सुबह जल्दी उठकर नहाकर सबसे पहले भगवान शंकर का ध्यान करें इसके बाद नाग-नागिन के जोड़े की प्रतिमा, प्रतिमा चाहे, सोने, चांदी या तांबे की हो. प्रतिमा के सामने ये मंत्र पढ़ें. अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम् शंखपाल धार्तराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा।। एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।

इस मंत्र के जाप के बाद आपको व्रत-उपासना का संकल्प लेना है. नाग-नागिन के जोड़े की प्रतिमा को दूध से स्नान करवाएं. इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराकर गंध, पुष्प, धूप, दीप से पूजन करें और सफेद मिठाई का भोग लगाएं. कल सुबह 7 बजकर 01 मिनट से आठ बजकर 25 मिनट के बीच आपको पूजा करनी है. पूरे 1 घंटे 24 मिनट का समय आपके पास होगा.

नाग पंचमी पर आपको कल पूरे दिन उपवास रखना होगा. सूरज ढलने के बाद नाग देवता की पूजा के लिये खीर के रुप में प्रसाद बनाया जाता है. उस खीर को सबसे पहले नाग देवता की मूर्ति और शिव मंदिर में जाकर भोग लगाया जाता है. उसके बाद इस खीर को प्रसाद के रुप में आप खुद ग्रहण करें. व्रत खत्म होने के बाद खाने में नमक और तले हुए खाने का इस्तेमाल ना करें. नाग पंचमी के दिन घर की दहलीज के दोनों ओर गोबर से पांच सिर वाले नाग की आकृ्ति बनाएं. गोबर न मिलने पर गेरू का प्रयोग भी किया जा सकता है और इसके बाद नाग देवता को दूध, दुर्वा, कुशा, गन्ध, फूल, अक्षत, लड्डूओं सहित पूजा करके नाग स्त्रोत या इस मंत्र का जाप करें. ऊँ कुरुकुल्ये हुँ फट स्वाहा” इस मंत्र की तीन माला जाप करने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं. नाग देवता को चंदन की सुगंध प्रिय होती है. इसलिये पूजा में चंदन का प्रयोग करना चाहिए

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