नई दिल्ली. इंडिया न्यूज के खास शो फैमिली गुरु में जय मदान ने तीज के बारे में बात की है साथ ही व्रत की कथा, मंत्र के बारे में बताया है. हरितालिका तीज के दिन महिलायें निर्जला व्रत रखती है. इस दिन शंकर-पार्वती की बालू या मिट्टी की मूति बनाकर पूजन किया जाता है. घर को साफ करके तोरण-मंडप सजाया जाता है. एक पवित्र चौकी पर शुद्ध मिट्टी में गंगाजल मिलाकर शिलिंग, रिद्धि-सिद्धि सहित गणेश, पार्वती और उनकी सखी को बनायें. इसके बाद देवताओं का आवाहन कर पूजन करें. इस व्रत का पूजन पूरी रात्रि चलता है. हर पहर में भगवान शंकर का पूजन व आरती होती है.

‘उमामहेश्वरायसायुज्य सिद्धये हरितालिका व्रतमहं करिष्ये’

इस मन्त्र का संकल्प करके पूजा सामग्री इकट्ठा कीजिए. हरतिालिका पूजन प्रदोष काल में किया जाता है. प्रदोष काल यानि दिन और रात के मिलने का समय. शाम के समय स्नान करके शुद्ध और साफ कपड़े पहन लीजिएगा. इसके बाद पार्वती तथा शिव की मिट्टी से प्रतिमा बनाकर विधिवत पूजन करें. इसके बाद सुहाग की पिटारी में सुहाग की सारी सामग्री सजा कर रखें, फिर इन सभी चीजों को पार्वती जी को अर्पित करें. शिव जी को धोती और अंगोछा अर्पित करें और इसके बाद सुहाग सामग्री किसी जरुरतमंद को दान करें. इस तरह पार्वती और शिव का पूजन कर हरितालिका व्रत कथा सुनें. कथा आगे आपको बताने वाली हूं. आज ही सुन लीजिए ताकि कल कोई गलता ना करें. कथा सुनने के बाद आपको

भगवान शिव की परिक्रमा करें फिर गणेश जी की आरती करें, फिर शिव जी और पार्वती जी की आरती करें. भगवान शिव की परिक्रमा करें. रात्रि जागरण करके सुबह पूजा के बाद माता पार्वती को सिन्दूर चढ़ायें. ककड़ी-हलवे का भोग लगांये और फिर उपवास तोड़े. अन्त में सारी सामग्री को एकत्रित करके एक गढढा खोदकर मिट्टी में दबा दें. आपको कुछ मंत्रों का जाप भी करना है. जो मां पार्वती और शिव शंकर को प्रसन्न करेंगे वो मंत्र आपको बताने वाली हूं.

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