नई दिल्ली: कालसर्प दोष को ठीक करने वाले उपायों को कर इस दोष को दूर किया जा सकता है. जन्म कुंडली में कालसर्प दोष हो तो व्यक्ति के हर बनते दिखा लीजिएगा. कुंडली में जब ग्रहों के साथ राहु व केतु का मेल हो जाए तो कालसर्प दोष होता है. जिसकी वजह से जातक की जिंदगी में कई तरह की परेशानियां खड़ी होती हैं. लेकिन कुछ उपायों को कर इस दोष से छुटकारा पाया जा सकता है.

कालसर्प दोष निवारण उपाय
1. शिवलिंग पर रोज मीठा दूध उसी में भांग डाल दें, फिर चढ़ाएं इससे गुस्सा शांत होता है, साथ ही सफलता तेजी से मिलने लगती है.
किसी शुभ मुहूर्त में ओउम् नम: शिवाय’ की 21 माला जाप करने के बाद शिवलिंग का गाय के दूध से अभिषेक करें और शिव को प्रिय बेलपत्र को अर्पित करें. साथ ही तांबे का बना सर्प शिवलिंग पर समर्पित करें.

2. पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका में क्लेश हो रहा हो, आपसी प्रेम की कमी हो रही हो तो भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या बालकृष्ण की मूर्ति जिसके सिर पर मोरपंखी मुकुट धारण हो घर में स्थापित करें और रोज उनका पूजन करें और ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम: शिवाय का जाप करे. कालसर्प योग की शांति होगी.

3. सवा महीने जौ के दाने चिड़ियां को खिलाएं.
4. शुभ मुहूर्त में मुख्य द्वार पर अष्टधातु या चांदी का स्वस्तिक लगाएं और उसके दोनों ओर मेटल से बना नाग होना चाहिए.
5. अमावस्या के दिन पितरों को शान्त कराने के लिए दान करें और कालसर्प योग शान्ति पाठ कराये.
6. शुभ मुहूर्त में नागपाश यंत्रा अभिमंत्रित कर धारण करें और बेडरुम में बेडशीट और पर्दे में लाल रंग के प्रयोग में लायें.
7. हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ करें और मंगलवार के दिन हनुमान पर सिंदूर, चमेली का तेल व बताशा चढ़ाएं.
8. काल सर्प दोष निवारण यंत्रा घर में स्थापित करके उसकी पूजा करें.
9. सोमवार को शिव मंदिर में चांदी के नाग की पूजा करें, पितरों का स्मरण करें और श्रध्दा से नाग देवता को प्रवाहित करें.
10. सावन में 30 दिनों तक महादेव का अभिषेक करें. कुछ ही दिनों बाद सावन शुरू हो जाएगा.
11. हर सोमवार को दही से भगवान शंकर पर – हर हर महादेव’ कहते हुए अभिषेक करें. हर रोज सावन के महीने में करें
कालसर्प योग वाले सावन के महीने में रोज रूद्र-अभिषेक कराए और महामृत्युंजय मंत्र की एक माला रोज करें. सावन आने ही वाला है.
12. किसी शुभ मुहूर्त में मसूर की दाल तीन बार गरीबों को दान करें.
13. किसी शुभ मुहूर्त में सूखे नारियल के फल को तीन बार प्रवाहित करें.
14. मंगलवार एवं शनिवार को रामचरितमानस के सुंदरकाण्ड का पाठ जरुर करें.
15. 86 शनिवार का व्रत करें और राहु,केतु व शनि के साथ हनुमान की आराधना करें. शनिवार को श्री शनिदेव का तैल से अभिषेक करें
16. नव नाग स्तोत्रा का एक वर्ष तक प्रतिदिन पाठ करें.
17. एक वर्ष तक गणपति अथर्वशीर्ष का नित्य पाठ करें

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