नई दिल्ली. इंडिया न्यूज के खास सो फैमिली गुरु में जय मदान ने लोहड़ी के ऊपर बात की है. त्योहार की तरह ही बहुत सारी खुशी और उळास के साथ भारत में लोगों लोहड़ी का त्योहार मनाते है, यह ऐसा त्यौहार है जो, एक ही स्थान पर परिवार के सभी सदस्यों, रिश्तेदारों और दोस्तों को एक साथ लाता है. आज के दिन लोग मिलते है और एक-दूसरे को मिठाई बॉटकर खुशिया मनाते हैं. ये फसल की कटाई का त्योहार है जो किसानों के लिए बहुत महत्व रखता है. लोग इस दिन आलाव जलाते है, तब गाना गाते है और उस के चारो ओर नाचते है. आलाव के चारो ओर गाते और नाचते समय आग मे कुछ रेवडी, टॉफी, तिल के बीज, पॉपकॉर्न, गुड चीज़ें आग मे डालते है. यह देश के अलग अळग हिस्सों में अलग अलग नाम से मनाया जाता है जैसे आंध्र प्रदेश मे भोगी, असम मे मेघ बिहू, यू0 पी0 बिहार और कर्नाटक मे मकर संक्रांति, तमिलनाडू मे पोंगल. शाम को एक पूजा समारोह रखा जाता है जिसमे लोग अग्नि की पूजा करते है और आलाव के चारो ओर परिक्रमा करते है भविष्य की समृद्धि के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते है. लोग टेस्टी खाना खाते हैं… जैसे मक्के की रोटी, सरसो का साग, तिल, गुड, गज्जक, मूंगफली, पॉपकॉर्न आदि. सभी नाचते है गाते है और लोहडी के प्रसाद का आनंद लेते है.

लोहडी का त्योहार किसानों के लिए नए साल के लिए एक शुरुआत का प्रतीक है. ये भारत और विदेशो मे रहने वाले सभी पॅजाबियो हर साल मनाते हैं. लोहडी का त्यौहार न्यूली वेड के लिए बहुत अहम है. इस दिन, दुल्हन सभी चीजो से सजती हैं, जैसे नई चूड़ियाँ, कपड़े, अच्छी बिंदी, मेंहदी, साड़ी, स्टाइलिश बाल अच्छी तरह नए कपड़े और रंगीन पगड़ी पहने पति के साथ तैयार होती है। इस दिन हर नई दुल्हन को उसकी ससुराल की तरफ से नए कपड़े और गहने बहुत से तोहफे दिये जाते है. दोनों परिवार दूल्हे और दुल्हन के सदस्यों की ओर से मेहमानों को एक साथ बुलाया जाता है. न्यूली वैड एक स्थान पर बैठा दिया जाता है और परिवार के लोग, पड़ोसियों, दोस्तों, रिश्तेदारों से गिफ्ट दिये जाते है. वे सब उनके बेहतर जीवन और उज्जवल भविष्य के लिए नये जोड़े को आशीर्वाद देते है.

तुरंत पैदा हुए बच्चों के लिए भी लोहड़ी बहुत अहम होती है. परिवार का हर सदस्य जरूरी चीजों गिफ्ट देकर परिवार में एक नए बच्चे का स्वागत करते हैं. बच्चे की माँ अच्छी तरह से तैयार बच्चे को अपनी गोद में लेकर एक स्थान पर बैठती हैं. बच्चा नये कपङे, गहनो और मेन्हदी लगे हाथो मे बहुत अच्छा लगता है. बच्चा नाना-नानी और दादा-दादी दोनों की तरफ से कपड़े, गहने, फल, मूंगफली, मिठाई, और बहुत सारे तोहफे पाता है. लोहड़ी के दिन सुबह में, घर के बच्चे बाहर जाने के लिए और कुछ पैसे और कुछ खाने की चीज जैसे तिल या तिल के बीज, गजक, मूंगफली, गुड़, मिठाई, रेवङी, की मांग करते है. वे दुल्हा बत्ती की तारीफ करते हुए पंजाबी लोकगीत गाते हैं. शाम को सूरज के ढलने के बाद लोग एक साथ कटी हुई फसल के खेत मे एक बहुत बङा आलाव जलाते है। शहरों में घर के बाहर जलाया जाता है. लोग आलाव के चारो ओर घेरा बनाकर गीत गाते और नाचते है

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