नई दिल्ली: इंडिया न्यूज के खास शो फैमिली गुरु में श्रृंगार और मां लक्ष्मी के बारे में बताया गाय है. दरअसल श्रृंगार का सीधा संबंध मां लक्ष्मी के रूप से होता है जो कि भगवान विष्णु की प्रिय हैं. मां लक्ष्मी हर वो चीज करती हैं जो उनके पति विष्णु जी को पसंद होती है. सोना विष्णु को परमप्रिय है और इसी कारण सोने के बने आभूषण सिर्फ नाभि के ऊपर के अंगों में पहने जाते हैं. पैरों में पहनकर हम संसार के पालक श्रीहरि विष्णु का अपमान तो नहीं कर सकते हैं इसी कारण पैरों में सोना छोड़कर हर धातु के आभूषण पहने जाते हैं. पायल मूल रूप से चांदी की होती है.

चांदी चंद्रमा की धातु है, चंद्रमा शरीर में मन का कारक होता है. पाजेब में बजने वाले घुंघरू मन को भटकने से रोकते हैं और पूरे परिवार को एक धागे में पिरोकर रखने का संदेश देते हैं. हिंदू धर्म में सोने की पायल नहीं पहनी जाती. सोने की पायल को पैरों में पहनना अपशगुन माना जाता है। यही वजह कि पायल ज़्यादातर चाँदी की ही बनवाई जाती हैं और चाँदी की यह पायल लड़कियों और महिलाओं के पैरों की शोभा बढ़ाती हैं.

पुराने समय में शादी के बाद महिलाओं को कहीं आने-जाने की पूरी आजादी नहीं होती थी. इसलिए जब वह घर में कहीं आती-जाती तो बिना उसके बताए भी पायल की आवाज से सभी सदस्य समझ जाते थे कि उनकी बहू वहां आ रही है या कहीं जा रही है.

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