नई दिल्ली. हमारा शरीर पांच तत्त्वों से मिलकर बना है. इन पंचतत्त्वों में असन्तुलन से रोगों की उत्पत्ति होती है. अंगुलियों की सहायता से विभिन्न मुद्राओं द्वारा इन पंचतत्त्वों को सन्तुलित कर स्वास्थ्य रक्षा एवं रोग निवारण किया जा सकता है.

कुछ मुद्राएं तत्काल असर करती हैं. कुछ मुद्राएं लम्बे समय के अभ्यास के बाद अपना स्थायी प्रभाव प्रकट करती हैं. इन्हें चलते- फिरते, उठते- बैठते 45 मिनट तक करने से पूर्ण लाभ होता है.

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