नई दिल्ली. मां दुर्गाजी की सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती हैं. दुर्गापूजा के सातवें दिन मां कालरात्रि की अराधना, उपासना और साधना की जाती है. दो तरीके से मां काली की पूजा की जाती है. इस दिन साधक का मन ‘सहस्रार’ चक्र में स्थित रहता है.

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इसके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है. मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं. इसी कारण इनका एक नाम ‘शुभंकारी’ भी है. अतः इनसे भक्तों को किसी प्रकार भी भयभीत अथवा आतंकित होने की आवश्यकता नहीं है.