नई दिल्ली. गीतकार जावेद अख्तर और फिल्म डायरेक्टर शेखर कपूर के बीच ट्विटर पर जंग छिड़ गई है. शेखर कपूर ने ट्विटर पर एक पोस्ट डाली जिसमें उन्होंने लिखा कि मैंने जिंदगी एक रिफ्यूजी के तौर पर शुरू की. मां-बाप बच्चों के लिए अपना सबकुछ दे देते हैं. मैं हमेशा से बुद्धिजीवियों से डरता था. वो मुझे छोटा महसूस कराते थे. फिर अचानक मेरी फिल्मों की वजह से मुझे प्यार दिखाने लगे. मैं अब भी उनसे डरता हूं. उनका प्यार सांप के डसने जैसा है. अब भी मैं एक रिफ्यूजी हूं. इसके जवाब में जावेद अख्तर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आपको मनोचिकित्सक से मिलना चाहिए. आप भारत में भी खुद को रिफ्यूजी महसूस करते हैं तो खुद को सुरक्षित कहां महसूस करेंगे, पाकिस्तान में?

बता दें कि पिछले दिनों अपर्णा सेन, अनुराग कश्यप सहित 49 हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर देश में मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई थी. इसके जवाब में कंगना रनौत सहित 62 हस्तियों ने चिट्ठी लिखकर कहा कि ये लोग सेलेक्टिव विरोध करते हैं. इस तरह से यह मामला राजनीतिक रंग ले चुका है. जावेद अख्तर अपनी बेबाक टिप्पणी के लिए जाने जाते हैं. शेखर कपूर के ट्वीट पर उन्होंने बेहद सख्त लहजे में जवाब दिए हैं. वहीं शेखर कपूर ने भी जावेद अख्तर के एक के बाद एक जवाबी ट्वीट्स पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है. 

ये था शेखर कपूर का ट्वीट जिस पर सारा बवाल शुरू हुआ

इस ट्वीट में शेखर कपूर ने लिखा- मैंने अपनी जिंदगी की शुरूआत बंटवारे के साथ की एक रिफ्यूजी के तौर पर. मां बाप ने अपना सबकुछ झोंक दिया ताकि उनके बच्चों की जिंदगी बन सके. मैं हमेशा से बुद्धिजीवियों से डरता था. वो मुझे छोटा और तुच्छ महसूस कराते थे. फिर अचानक मेरी फिल्मोें की वजह से मुझसे स्नेह दिखाने लगे. मैं अभी भी बुद्धिजीवियों से डरता हूं. उनका स्नेह मेरे लिए सांप के डसने जैसा है. अभी भी एक रिफ्यूजी हूं.

जावेद  अख्तर ने इस ट्वीट पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और लिखा- किन बुद्धिजीवियों का स्नेह आपको सांप के डसने जैसा लगता है? श्याम बेनेगल, अदूर गोपाल कृष्णा, राम चंद्र गुहा? सच में? शेखर साहब आप की तबीयत ठीक नहीं है. एक अच्छे मनोचिकित्सक से मिलने में कोई शर्मिंदगी की बात नहीं है.

जावेद अख्तर यहीं नहीं थमे उन्होंने एक और ट्वीट दागा और लिखा- आपने अपने ट्विटर बायो में लिखा है कि आप अतीत के कारण पूर्वाग्रह में नहीं हैं और न ही भविष्य को लेकर डरे हुए हैं. आप इस लम्हे में जी रहे हैं और उसी सांस में आप यह भी कह देते हैं कि आप विभाजन के वक्त भी रिफ्यूजी थे और अब भी हैं. यह विरोधाभास देखने के लिए किसी को मैग्नीफाइंग ग्लास लेकर देखने की जरूरत नहीं है.

संडे की फुरसत का पूरा फायदा उठाते हुए जावेद अख्तर ने तीसरा जवाबी ट्वीट किया– आप का मतलब क्या है कि आप अब भी अपने आप को रिफ्यूजी समझते हैं. क्या इसका मतलब है कि आप भारत में अपने आप को बाहरी समझते हैं. क्या आप भारत को अपनी मातृभूमि नहीं मानते. अगर आप भारत में अपने को रिफ्यूजी मानते हैं तो कहां आपको ऐसा नहीं लगेगा? पाकिस्तान में? इस मेलोड्रामा को बंद करो बेचारे अमीर लेकिन तन्हा आदमी.

शेखर कपूर ने जावदे अख्तर के लगातार ट्वीट्स के बाद जवाब दिया- एक बार जब आप रिफ्यूजी हो जाते हैं फिर आप हमेशा जिप्सी जैसा महसूस करते हैं. 

फिल्म इंडस्ट्री में भी विचारधारा के स्तर पर स्पष्ट खेमेबाजी है. कुछ लोग सरकार के विरोध में हैं तो कुछ लोग सरकार के साथ. जावेद अख्तर ने लोकसभा चुनावों में बेगूसराय जाकर कन्हैया कुमार का प्रचार भी किया था. हालांकि कन्हैया कुमार चुनाव हार गए थे. इस मामले में भी शेखर कपूर और जावेद अख्तर के बीच तनातनी काफी बढ़ गई है.

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