मुंबई. आज एक खास बंदे की जयंती है, बॉलीवुड का एक ऐसा डायरेक्टर, जिसे उस दौर में थप्पड़बाज डायरेक्टर माना जाता था। पता नहीं कितनों के पड़े होंगे, लेकिन इस राज का खुलासा केवल राज कपूर और तनूजा ने ही किया। दोनों ही उस डायरेक्टर को बड़े ही सम्मान के साथ याद करते थे, उसके थप्पड़ों ने उनके कैरियर की कहानी ही बदलकर जो रख दी थी। इस थप्पड़बाज डायरेक्टर का नाम था, केदार शर्मा या किदार शर्मा। राजकपूर और तनूजा ही नहीं गीता बाली, मधुबाला, माला सिन्हा और भारत भूषण जैसे मशहूर सितारों का सितारा बॉलीवुड के फलक पर उनकी वजह से ही चमका था. पहले बात राजकपूर के थप्पड़ कांड की। ये थप्पड़ राज कपूर ने खाया था अपने पिता पृथ्वीराज कपूर की ही फिल्म विषकन्या के सैट पर। उस एक थप्पड़ ने राज कपूर की जिंदगी बदलकर रख दी। राज कपूर ने खुद अपनी बेटी रितु नंदा को उस थप्पड़ कांड के बारे में बताया था, जो रितु की किताब ‘राज कपूर स्पीक्स में दर्ज है। राज कपूर ने

बताया, ‘’मैं तीन साल से केदार शर्मा का जूनियर मोस्ट असिस्टेंट था मेरा एक काम हर शॉट से पहले क्लैप देना भी था। मेरी कैमरामेन से अच्छी दोस्ती थी, हर शॉट से पहले वो मेरा क्लोजअप ले लेता था और बाद में फोटो दे देता था। एक दिन मैंने तेजी से क्लैप दबाया और आगे बढ़ गया लेकिन एक एक्टर की दाढ़ी उस क्लैप बोर्ड में फंस गई और पूरी यूनिट पेट पकड़कर हंसने लगी। गुस्से में शर्माजी ने एक तेज थप्पड़ मेरे गाल पर जड़ दिया। मैं अवॉक था, बिना कहे सैट से चला गया। लेकिन मैंने कभी उनसे एक शब्द नहीं कहा क्योंकि गलती मेरी थी।‘’

दरअसल एक दौर में कभी पृथ्वीराज कपूर ने बॉलीवुड में ब्रेक पाने में केदार शर्मा की मदद की थी, सो जब राजकपूर ने अपना कैरियर फिल्मों में काम करने की बात कही तो उन्होंने केदार से कहा कि वो तबला बजाता है, गाता है और कल वो क्या होगा इसके बारे में कुछ ज्यादा ही बातें करता है। केदार शर्मा ने कहा, मेरे पास भेज दो। केदार जमीं से उठे डायरेक्टर थे, तो काफी सख्त थे। राज कपूर को केदार शर्मा ने हर काम करवाया, सैट पर पोंछा लगाने से लेकर क्लैपिंग करने तक। ऐसे में ये थप्पड़ कांड राज कपूर के कैरियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वॉंइंट लेकर आया. राज कपूर की तरह केदार शर्मा ने भी फिल्म विषकन्या के सैट पर हुई इस थप्पड़ वाली घटना के बारे में कपूर्स, द फर्स्ट फैमिली ऑफ इंडियन सिनेमा’ की राइटर मधु जैन को बताया, “ मैं सनसैट के दौरान का एक सीन शूट करना चाहता था, लेकिन राज कपूर लेट था। वो आया, आते ही पहले शीशे के पास गया, अपने बालों में कंघा किया, खुद को शीशे में निहारा और फिर क्लेपिंग के लिए गया। जब उसने एक एक्टर की दाढ़ी क्लेपिंग बोर्ड में फंसा दी, तो मेरा गुस्सा काबू से बाहर हो गया। मैंने उसे एक थप्पड़ मार दिया। राज ने इस बारे में कभी एक शब्द नहीं बोला।“

सेट पर इस थप्पड़ के पड़ते ही सन्नाटा छा गया, कोई मामूली क्लैपिंग बॉय तो था नहीं। जिस फिल्म की शूटिंग चल रही थी, उसी के हीरो का बेटा था वो। ऐसे में तमाम तरह की बातें बनीं। इधर राज कपूर ने कुछ नहीं कहा और चुपचाप चले जाना बेहतर समझा। लेकिन अगले दिन केदार शर्मा की एक बात पर राज साहब रो ही पड़े. केदार शर्मा ने अगले दिन की घटना का जिक्र भी मधु जैन से किया है, “ थप्पड़ मारने के बाद मुझे भी काफी बुरा लगा था। मैंने उसको अगले दिन सुबह बुलाया और उसे अगली फिल्म का कांट्रेक्ट दे दिया, वो कांट्रेक्ट था मेरी अगली फिल्म नील कमल में उसे हीरो बनाने का कांट्रेक्ट।‘’ राज कपूर तो ये सुनकर रोने ही लगे. उनको अंदाजा नहीं था कि उनका बरसों पुराना ख्वाब पूरा होने जा रहा है, वो हीरो बनने जा रहे हैं। जब केदार शर्मा ने उनसे पूछा कि अब क्यों रो रहे हो, कल तो रोए नहीं जब थप्पड़ पड़ा था। तो राजकपूर का जवाब था, ‘’इसलिए रो रहा हूं कि आपने मुझे आज कुछ अच्छा काम दिया है।‘’ आगे बोले, ‘’वॉयलेंस में इमोशंस नहीं होते, गुडनैस में होते हैं।‘’ इस तरह राज कपूर की जिंदगी में केदार शर्मा का ये थप्पड़ बड़ा बदलाव लेकर आया। शादीशुदा और एक बच्चे का बाप बनने के बाद राजकपूर की बॉलीवुड में पारीनीलकमल के साथ शुरू हुई।

राज कपूर ही नहीं गीता बाली, भारत भूषण, मधु बाला, माला सिन्हा और तनूजा जैसे कितने ही बड़े सितारे थे जिनका कैरियर को केदार शर्मा ने लांचिंग पैड दिया। ऐसा नहीं था कि सबको थप्पड़ मार कर ही सुधारते रहे केदार शर्मा… हालांकि राजकपूर के अलावा इस थप्पड़ कांड के बारे में तनूजा ने भी बताया था। काजोल अपने कैरियर में कितनी भी सीरियस रही हों लेकिन तनूजा शुरूआत में बिलकुल नहीं थीं। उनकी मां शोभना समर्थ ने उनको अपनी दो फिल्मों में तनूजा का रोल दिया, चाइल्ड एक्ट्रेस के तौर परहमारी बेटी में और फिर छबीली में। लेकिन मम्मी की फिल्में होने के चलते वो सीरियस ही नहीं होती थीं। ऐसे में शोभना को तलाश थी एक ऐसे डायरेक्टर की जो उनकी बेटी को लाइन पर ला सके।

उनकी तलाश खत्म हुई केदार शर्मा पर जाकर, जो उन दिनों अपने बेटे अशोक को लांच करने के लिए एक नई हीरोइन की तलाश में थे। केदार शर्मा ने तनूजा को उस रोल के लिए साइन तो कर लिया, लेकिन जल्द ही उन्हें समझ आ गया कि तनूजा अपने काम को लेकर सीरियस नहीं है। माना जाता था कि तनूजा ने स्कूल से बचने के लिए फिल्मों की राह पकड़ ली थी। इस फिल्म का नाम था हमारी याद आएगी। पूरी फिल्म के दौरान केदार शर्मा अल्हड़ किशोरी तनूजा की हरकतों से, हर बात पर मस्ती करने की आदतों से परेशान रहे। लेकिन उन्होंने बड़े ही धैर्य के साथ खुद को संभाले रखा।

तनूजा ने एक इंटरव्यू में बताया, “Frankly speaking, I never took acting so seriously as Nutan did. So, it didलt affect me much initially, She was a mature and versatile actress far ahead of me. I was casual, fun loving and this nature of mine was reflected in my performances… I still remember I simply could not lip the duet “Sochta Hoon Yeh Kya Kiya Maine”. Kidar Sharma never lost patience and after five takes, he did extract the right performance from me.’’। यहां तक तो सब ठीक था, केदार शर्मा तनूजा की सारी मस्तियां और नखरे सहते रहे या बच्ची समझकर नजरअंदाज करते रहे।

लेकिन फिर आया फिल्म का क्लाइमेक्स सीन, केदार शर्मा ने अपनी बायोग्राफी ‘द वन एंड लोनली केदार शर्मा’  में लिखा है, “उस दिन एक सीन शूट होना जिसमें जब तनूजा को पता चलता है कि उसका लवर अशोक मर चुका है, तो उसे अपनी कांच की चूड़ियां तोड़नी थी। सब कुछ बिलकुल पारम्परिक तरीके से होना था”। केदार शर्मा का बेटा और फिल्म का हीरो दम तोड़ देता है और जब उसकी डैडबॉडी ले जाई जा रही होती है, हीरोइन तनूजा अपनी कांच की चूड़ियां तोड़ती हैं… लेकिन केदार शर्मा को फिल्म का क्लाइमेक्स सीन भी दो मिनट में ही निपटाना पड़ गया था तनूजा के रवैये के चलते।

दरअसल तनूजा उस दिन मस्ती के मूड में थीं, रोने की एक्टिंग करते करते हंसने लगती थीं। कई रीटेक हो चुके थे, ग्लेसरीन की शीशी भी खत्म हो गई, लेकिन केदार शर्मा को परफेक्ट शॉट नहीं मिल पा रहा था, उस पर तनूजा की हंसी उनके गुस्से में और इजाफा करने लगी और गुस्से में उन्होंने तनूजा के थप्पड़ जड़ दिया। वो पैर पटकते हुए सीधे पहुंची घर अपनी मां के पास, लेकिन मां वापस उन्हें लेकर आ गई सैट पर और तब रोते हुए तनूजा ने वो शॉट शूट किया। फिर भी वो बात नहीं आ पाई और क्लाइमेक्स कमजोर होने के चलते फिल्म पिट गई। तनूजा का कैरियर तो बाद मे चल गया लेकिन केदार शर्मा का बेटा गुमनामी में चला गया.

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