बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. हॉकी खिलाड़ी संदीप सिंह की बायोपिक ‘सूरमा’ की कहानी यूं तो पंजाब की बैकग्राउंड पर बनी है, लेकिन एक बिहारी कोच हैरी के तौर पर विजय राज ने फिल्म में मजा डाल दिया है. हालांकि वो बोलने में बिहारी लहजा नहीं अपनाते, लेकिन तेवर और डायलॉग्स जरूर बिहारी हैं. ऐसे में फिल्म पंजाब के अलावा बिहार से जुड़े लोगों को खास मजा देगी.

फिल्म में एक तो फाड़ देने वाले डायलॉग्स हैं, जो ज्यादातर कोच का रोल कर रहे विजय राज के हिस्से में हैं, दूसरे रोमांटिक या शरारत भरे डायलॉग्स हैं, जो तापसी और दिलजीत के बीच हुए हैं, कुछ इमोशनल भी हैं. पहले कोच के डायलॉग्स पढ़िए. जब मेरठ के साथ पटियाला के मैच में जब मेरठ वाले दर्शक तमंचों के साथ मैदान में आते हैं और उनके खिलाड़ी भी पटियाला के खिलाड़ियों के साथ बार बार बॉडीगेम करते हैं तो विजय राज तमंचे वालों के पास पहुंचकर ये दमदार डायलॉग बोलकर उसकी फूंक खिसका देते हैं–

कोच (विजय राज): तमंचे को अपने कच्छे में डाल दो बचुआ, हम बिहारी हैं थूक के माथा में छेद कर देंगे.

ऐसे ही जब संदीप सिंह के बड़े भाई विक्रम के रोल में अंगद बेदी जब संदीप (दिलजीत) की ड्रैग फ्लिकिंग स्टाइल देखकर उसे सीधे पटियाला स्पोर्ट्स एकडमी के कोच हैरी (विजयराज) के पास पहुंचते हैं और उनसे जिद करते हैं कि एक बार इसका गेम देख लो, तो विजयराज का संदीप (दिलजीत) को चेतावनी का अंदाज बड़ा स्टाइलिश है-

कोच: हमारे पटना में एक कहावत है बेटा- दौड़ा-दौड़ाकर ठोकना. तू चिंता मत कर तुझे गालियां देकर छोड़ूंगा. और तू (अंगद बेदी) सीनियर प्लेयर होकर जो मेरा टाइम वेस्ट कर रहा है. उसके लिए तुझे दौड़ाऊंगा भी और ठोकूंगा भी.

उसी तरह विजयराज का कोचिंग स्टाइल भी डिफरेंट है, ट्रेनिंग और मैच के दौरान के कुछ डायलॉग्स पढ़िए–

कोच: डिफेंडर बनने का बेसिक जान ले. अपनी टीम का गोल बम है. तुरंत बाहर फेंक दो और डी के बाहर की लाइन गर्लफ्रेंड की तरह है, अपोजिट टीम को टच भी न करने दो.

संदीप सिंह: 12 गोल खा लेंगे 13वां अपना होगा.
कोच: 13वीं मरने के बाद होती है मैं इनकी आज देखना चाहता हूं.

चेयरमैन (कुलभूषण खरबंदा): घास पर ऐसा ड्रैगफ्लिक मार रहा है. टर्फ में तो..
कोच: नेट फाड़ देगा सर.

दिलजीत और तापसी की लव स्टोरी भी मस्ती और रोमांटिक डायलॉग्स के सहारे ही आगे बढ़ती है. पहली मुलाकात के दो डायलॉग्स पढ़िए

हरप्रीत (तापसी): तू बिक्रम का प्रा (भाई) है?
संदीप सिंह (दिलजीत): हां बिक्रम का ही हूं अपना मत बना लेना

संदीप सिंह (दिलजीत): हॉकी खेले हुए टाइम हो गया जी, सो गोल नहीं हुआ

हरप्रीत (तापसी): लाइफ में गोल होगा ना तो यहां भी हो जाएगा

इमोशनल डायलॉग्स भी कम नहीं है फिल्म में

बिक्रमजीत (अंगद बेदी): भाई हूं तेरा, मुझे भी पता है कि क्यों आया है. हेल्प चाहिए न पैर पकड़कर माफी मांग.
संदीप सिंह: माफ कर दे भाई. इंडिया के लिए खेलना है.
बिक्रम: इंडिया के लिए या उस लड़की के लिए.
संदीप सिंह: पहली बार पैरों पर खड़ा हुआ था प्रीत के लिए, रिहैब गया था आप लोगों के लिए इंडिया खेलना है इंडिया के लिए.

संदीप सिंह: मुझे पता था तू आएगी

हरप्रीत: मुझे लगा मैं इंडिया के प्लेयर से मिलने जा रही हूं, जो ये जानकर टूट गया होगा कि अब वो हॉकी नहीं खेल पाएगा. लेकिन, मैं ऐसे लड़के से मिली जो आज भी मुझे देखकर खुश है.

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