Salman Khan Jail Journey | Salman Khan Jail Story | Salman Khan In Alliance: सुपरस्टार सलमान खान ने एलायंस के घरवालों को जेल की मुश्किल घड़ी के बारे में बताया, जब एक प्रतिभागी ने मुख्यालय के अंदर क्लॉस्ट्रोफोबिया से जूझने की बात स्वीकार की. तब सलमान ने अपने पिछले जेल अनुभवों को बताया. इतना ही नहीं, सोहेल खान ने दिन की घटनाओं के दौरान घबराने की बात कबूल की. जब सलमान ने पूछा कि क्या हुआ, तो सोहेल ने जवाब दिया, “बस…” और सलमान ने उन्हें याद दिलाने से पहले “क्लॉस्ट्रोफोबिक” के साथ अपना वाक्य पूरा किया, “4 दिन और.” अपनी बेहद परेशानी के बारे में बताते हुए सोहेल ने कहा, “आप घर गए हैं ना… खूब हरियाली है, खुली हवा है, काफी समय बाहर बिताते हैं.”
जेल में ऐसी कटी सलमान की रातें
सलमान ने बताया कि टेलीविजन शो अस्थायी रहता है, जबकि असल जिंदगी में लोग अप्रत्याशित समय और मुश्किल दौर से गुजरते हैं. पिछली अदालती सुनवाई के दौरान, वो अपनी शारीरिक स्थिति पूरी करने के लिए अपनी हिरासत की अवधि बढ़ाना चाहता था. इस दौरान सलमान ने कहा कि “जब मैं कई साल पहले जेल गया था, तब मेरी ज़मानत के लिए कोर्ट में सुनवाई चल रही थी. मुझे पहले से लग रहा था कि ज़मानत की अर्जी खारिज हो जाएगी, इसलिए मैं सोच रहा था कि बाहर जाकर फिर वापस क्यों आना पड़े. लेकिन जिस दिन लगा कि अब मैं जेल से बाहर निकलने वाला हूँ, तो सच कहूँ तो मुझे थोड़ा बुरा लग रहा था. क्योंकि जेल में मैं सिर्फ पानी और जो दाल मिलती थी, उसी पर रहकर इतनी अच्छी एक्सरसाइज कर रहा था कि मेरी बॉडी बहुत फिट और मस्कुलर हो गई थी. तब मैंने मज़ाक में कहा कि काश 4–5 दिन और जेल में रुकना पड़ जाता. वहाँ एक आदमी तो कहने लगा, ‘भाई मत जाओ, भाई मत जाओ.’ यानी वह चाहता था कि मैं वहीं रुका रहूँ.”
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एक ही कमोड और छिपकली
60 साल के इस व्यक्ति ने जेल की ज़िंदगी को एक “मुश्किल सफ़र” बताया और कहा, “पता है, इन चीज़ों के लिए आपको अपना दिमाग बंद करना पड़ता है यार सोहेल… कभी-कभी हम गुस्सा हो जाते हैं और कहते हैं कि ‘ये तो घर से निकाल ही देंगे’. लेकिन मैंने अपनी ज़िंदगी में जो हालात देखे हैं… आपको पता नहीं होता कि आप कब अंदर जा रहे हैं और कब बाहर आएंगे, और वहाँ खिड़कियाँ होती हैं, स्लाइडिंग दरवाज़े होते हैं… आपके साथ बहुत से लोग होते हैं, एक जैसी सोच वाले लोग. इतनी छोटी सी जगह में हमारे सामने सलाखें होती थीं. एक इंडियन-स्टाइल कमोड, कभी छिपकली दिख जाती थी और फिर लोगों का आना-जाना लगा रहता था, वहाँ 50-60, 70 लोग होते थे और सिर्फ़ एक बाथरूम.”