Sunday, September 25, 2022

Raju Srivastav Biography: 58 साल की आयु में दुनिया को अलविदा कह गए राजू, ऐसा था सफरनामा

नई दिल्ली. Raju Srivastav Biography: लगभग 40 दिनों तक दिल्ली के AIIMS अस्पताल में जीवन और मृत्यु की लड़ाई लड़ने के बाद बुधवार सुबह 10.20 बजे डॉक्टर्स ने राजू श्रीवास्तव को मृत घोषित कर दिया. उनके निधन की इस खबर से पूरा देश शोक में डूब गया है. कल यानी गुरुवार को दिल्ली में ही राजू श्रीवास्तव को अंतिम विदाई दी जाएगी. इस बात की जानकारी उनके परिवार के सदस्य ने दी है. आइए आज आपको राजू के जीवन के बारे में बताते हैं:

शुरूआती जीवन

25 दिसंबर 1963 को राजू श्रीवास्तव का कानपूर में जन्म हुआ था, वह एक मध्यमवर्गीय भारतीय परिवार से ताल्लुकात रखते थे, उनके पिता का नाम रमेश चंद्र श्रीवास्तव था और वो एक कवी थे. उनके पिता को सभी लोग ‘बलाई काका’ के नाम से बुलाते थे. राजू को बचपन से कॉमेडी करना बहुत अच्छा करता था, वो शुरू से ही दूसरों की नक़ल उतारते थे.

टीवी का सफर

  • राजू श्रीवास्तव कॉमेडी की दुनिया का एक जाना-माना नाम थे, लेकिन इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए उन्होंने बहुत कड़ी मेहनत की थी. उन्होंने भारतीय स्टेज शो के साथ-साथ विदेशों में भी पशोज़ किए हैं. राजू के करियर के शुरूआती दौर में उन्हें अमिताभ बच्चन का चेहरा माना जाता था, शुरूआती दौर में उन्होंने बॉलीवुड फिल्मों में छोटे-छोटे रोल किए हैं. राजश्री प्रोडक्शंस की ‘मैंने प्यार किया’ फिल्म में राजू का बहुत ही छोटा सा रोल था, लेकिन जब भी वो स्क्रीन पर आए दर्शकों को हंसा कर गए. उन्होंने बाजीगर, मुझसे दोस्ती करोगी, बॉम्बे से गोवा जैसी प्रसिद्ध फिल्मों में भी छोटे-छोटे रोल किए हैं.
  • राजू के भले ही फिल्में की थी, लेकिन उन्हें पहचान ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ से मिली, वो इस शो में सेकेंड रनर-अप रहे थे.
  • इसके बाद उन्होंने ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज-चैंपियंस’ में भाग लिया, यहाँ उन्होंने जीत हासिल की और ‘द किंग ऑफ कॉमेडी’ का खिताब अपने नाम किया.
  • राजू ने ‘बिग बॉस’, ‘बिग ब्रदर’ जैसे रियलिटी शोज़ में भी हिस्सा लिया. वहीं उन्होंने अपनी पत्नी के साथ ‘नच बलिए’ सीजन – 6 में भाग लिया था, इसके अलावा राजू ने अन्य टीवी शो में भी भाग लिया.
  • बाद में उन्होंने कॉमेडी शो “कॉमेडी का महा मुकाबला” में भाग लिया, इसके अलावा वो कॉमेडी नाइट्स विद कपिल में भी नज़र आ चुके हैं.

राजू की शादी

राजू श्रीवास्तव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले थे। साल 1993 में उनकी शादी शिखा श्रीवास्तव के साथ हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजू श्रीवास्तव अपने भाई की शादी में बारात लेकर फतेहपुर पहुंचे थे। यहां उन्हें एक लड़की दिखी, जिससे उन्हें पहली नजर में ही प्यार हो गया था। उन्होंने मन ही मन उस लड़की को अपना लाइफ पार्टनर मान लिया था। यहां तक कि राजू ने मन बना लिया था कि अगर वो शादी करेंगे तो इसी लड़की से करेंगे।

कौन थी वो लड़की ?

शादी के दौरान ही उन्होंने उस मिस्ट्री गर्ल के बारे में पता करना शुरू किया। बाद में उन्हें मालूम हुआ कि वह लड़की कोई और नहीं बल्कि उनकी होने वाली भाभी की चचेरी बहन है। जिसका नाम शिखा है और वह अपने परिवार के साथ इटावा में रहती थी। फिर क्या था, राजू अपने भाई के साथ किसी न किसी बहाने अक्सर इटावा आने-जाने लगे थे। वहां शिखा से भी उनकी मुलाकात होती थी, लेकिन राजू के दिल की बात उनके जुबां तक नहीं आ सकी। वह हिम्मत तो बहुत जुटाते, लेकिन कभी अपने प्यार का इजहार नहीं कर पाते।

समय ऐसी ही मुलाकातों में गुजरता गया….इसके बाद साल 1982 में राजू अपना करियर बनाने के लिए मुंबई पहुंच गए। यहां उन्होंने अपनी किस्मत आजमाई और काफी भी किया। इस दौर में भी वह शिखा को भूले नहीं। राजू अक्सर उन्हें चिट्ठियां भेजा करते थे। इतना ही नहीं बल्कि इस बात की भी जानकारी रखते थे कि कहीं शिखा की शादी किसी और से न हो जाए।

12 साल बाद मिला प्यार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजू श्रीवास्तव ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उन्हें इस बात का अंदाजा था कि शिखा भी उन्हें अच्छा मानती हैं। क्योंकि जब भी शादी के लिए उनके पास कोई रिश्ता आता था, तो वह उसे मना कर देती थीं। वहीं, जब राजू का करियर ने नया मोड़ ले लिया। वह मुंबई में सेटल हो गए, तो उन्होंने शिखा से रिश्ते की बात करने के लिए अपने घर वालों को राजी किया। जिस पर दोनों परिवारों ने एक-दूसरे से राजू और शिखा के रिश्ते की बात की। इसके बाद शिखा के भाई राजू के मुंबई स्थित घर गए और वहां उनका घर, लाइफस्टाइल देखा। जिसके बाद तसल्ली होने के बाद अपनी बहन का हाथ राजू के हाथों में देने का निर्णय लिया। अंत में दोनों परिवारों ने शिखा और राजू की शादी के लिए हामी भर दी और इस तरह करीब 12 सालों बाद राजू और शिखा की शादी हो गई।

राजनीतिक सफर

राजू न सिर्फ हास्य कलाकार थे बल्कि वो राजनीति से भी जुड़े हुए थे, उन्होंने साल 2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था. वहीं, साल 2014 में पार्टी ने इन्हें उत्तर प्रदेश के कानपुर से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया लेकिन राजू ने टिकट वापस कर दिया.
पहले तो कॉमेडी किंग ने राजनीति में एंट्री मार के सभी को चौंकाया, उसके बाद उन्होंने सपा का टिकट वापस कर के चौंकाया. उन्होंने एक चैनल को दिए गए इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया कि उन्होंने टिकट क्यों वापस किया. गजोधर भैया ने इस संबंध में बताया कि ‘मैंने सपा की कानपुर इकाई में अनुशासन की कमी देखी है, वहां हर कोई खुद को नेता समझता है. मुलायम जी जो भी काम करने को कहते हैं उसके इतर ही काम होता है. वहां ऐसा माहौल था कि मुझे लग रहा था कि चुनाव न लड़ना ही बेहतर होगा, ऐसा बिल्कुल नहीं है कि मैंने इसके खिलाफ शिकायत नहीं की, मैंने अखिलेश ओर मुलायम जी तक अपनी बात पहुंचाई, लेकिन किसी ने इस दिशा में कोई एक्शन नहीं लिया, ऐसे में मुझे लगा कि मेरी अनदेखी की जा रही है इसलिए मैंने टिकट वापस कर दिया.’

कॉमेडी के क्षेत्र में एक लंबे संघर्ष के बाद ऐसी क्या नौबत आई कि राजू को दोबारा राजनीति में एंट्री लेनी पड़ी, इस सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा था कि मैंने अपने जिंदगी बहुत सी दिक्कतें झेली हैं. संघर्ष देखा है, एक समय वो भी आया जब दहेज़ न देने के कारण बहन की शादी टूटी, रिश्वत न देने के कारण नौकरी छूटी, ऐसे में मैं राजनीति में कॅरियर बनाने के बाद लोगों की मदद करना चाहता हूं.

जब भाजपा में आए राजू

सपा से अलग होने के बाद साल 2014 में राजू श्रीवास्तव ने भाजपा का दामन थाम लिया, और इसकी वजह थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. वहीं, भाजपा में शामिल होने के सवाल पर राजू का कहना था कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बहुत ज्यादा प्रभावित हुए थे और इसी वजह से उन्होंने भाजपा का दामन थामा था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजू श्रीवास्तव को स्वच्छ भारत अभियान के लिए ब्रैंड एंबेसडर नामांकित भी किया था, इस अभियान का हिस्सा बनने के बाद उन्होंने देश के कई शहरों में जाकर सफाई अभियान का बढ़-चढ़कर प्रचार किया था. इतना ही नहीं, भाजपा ने राजू को अपना स्टार प्रचारक भी बनाया था.

 

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