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R Madhavan: आर माधवन ने अपने ही बेटे की तरक्की पर क्यों उठाए सवाल? कहा, ‘मेरे बेटे से बेहतर स्विमर हैं भारत में’

आर माधवन ने बेटे वेदांत के स्टारडम पर बड़ा बयान दिया है. अभिनेता का कहना है कि भारत में उनके बेटे से भी बेहतर स्विमर हैं, लेकिन उन्हें वह तवज्जो नहीं मिलती. जानिए आखिर माधवन ने ऐसा क्यों कहा.

By: Shivani Singh | Last Updated: August 4, 2026 7:53:29 PM IST



आर माधवन महामारी के दौरान अपने गृहनगर चेन्नई से दुबई शिफ्ट हो गए थे. यह फैसला उनके अपने करियर के लिए नहीं, बल्कि उनके बेटे वेदांत के करियर के लिए था, जो एक बेहतरीन युवा तैराक हैं. हालांकि, माधवन ने हाल ही में माना कि भारत में उनके बेटे से भी बेहतर तैराक मौजूद हैं, लेकिन उन्हें उतना ध्यान या अटेंशन नहीं मिलता क्योंकि वे किसी मशहूर अभिनेता के बच्चे नहीं हैं.

माधवन ने कहा, ‘वेदांत के साथ-साथ भारत में ऐसे कई तैराक हैं जो उससे भी बेहतर हैं. लेकिन चूंकि वे मेरे बेटे नहीं हैं, इसलिए उन्हें वह सुर्खियां नहीं मिलतीं.’ उन्होंने आगे बताया, ‘मैं जहां भी जाता हूं, लोग मेरे बेटे की बात करते हैं क्योंकि वह मेरा बेटा है. मैंने उससे बस एक ही बात कही: ‘स्टारडम बहुत खतरनाक चीज़ है, मेरे दोस्त. तुम्हें यह बहुत कम उम्र में मिल गया है. इसे संभालना सीखो क्योंकि यह आता-जाता रहता है, और इससे तुम्हारा मानसिक सुकून प्रभावित नहीं होना चाहिए.’

वेदांत, जो इस समय एशियाई खेलों के लिए भारतीय दल के साथ अहमदाबाद में ट्रेनिंग ले रहे हैं, शायद अपने करियर की शुरुआत में इतनी सफलता हासिल नहीं कर पाते अगर उनके माता-पिता उनके सपनों का समर्थन करने के लिए दुबई नहीं गए होते. माधवन ने ‘बिहाइंडवुड्स टीवी’ पर बात करते हुए समझाया, ‘किसी बच्चे के अंतरराष्ट्रीय एथलीट बनने में एक ‘ग्रोथ स्पर्ट’ (अचानक शारीरिक विकास) का दौर होता है. किशोरावस्था के दौरान, 10 से 17 साल की उम्र के बीच, आप अचानक देखते हैं कि बच्चा एक महीने में 3 इंच बढ़ जाता है! इसे ही ग्रोथ स्पर्ट कहते हैं. अगर वे उस दौरान कड़ी मेहनत नहीं करते हैं, तो उनका शरीर कभी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार नहीं हो पाएगा.’

दुर्भाग्य से, वेदांत का यह ग्रोथ स्पर्ट 2020 में शुरू हुआ जब वह 14 साल के थे, लेकिन महामारी के कारण भारत के सभी सार्वजनिक स्विमिंग पूल अनिश्चित काल के लिए बंद थे. अभिनेता ने याद करते हुए कहा, ‘इसलिए, हमने घर के स्विमिंग पूल में और गोवा में दोस्तों के पूल में ट्रेनिंग देने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी.’ एक दिन उनकी पत्नी सरिता ने कहा, “तुम आओ या न आओ, मुझे एक स्विमिंग पूल चाहिए.’ चूंकि भारतीय राष्ट्रीय टीम उस समय दुबई में ट्रेनिंग कर रही थी, इसलिए उन्होंने बिना ज्यादा सोचे-समझे वहां शिफ्ट होने का फैसला कर लिया, जहां वेदांत ने अगले दो सालों तक ट्रेनिंग ली.

भले ही दुबई जाने का फैसला सरिता का था, लेकिन माधवन का कहना है कि उन्होंने भी अपने बेटे की प्रोफेशनल स्विमर बनने की इच्छा का पूरा समर्थन किया. अभिनेता ने कहा, ‘एक जरूरी बात है जो मैं माता-पिता से कहना चाहता हूं. आज के दौर में, मुझे नहीं पता कि सिर्फ पढ़ाई कितनी महत्वपूर्ण है, लेकिन माता-पिता को यह जरूर देखना चाहिए कि क्या बच्चे में कम उम्र में ही किसी काम को लेकर ‘लगन’ (ग्रिट) है या नहीं, और उनकी मदद करनी चाहिए. माता-पिता इस चीज़ को पहचान सकते हैं.’

माधवन ने आगे कहा, ‘मैंने वेदांत को कई खेलों में डाला, लेकिन तैराकी के साथ दुनिया भर में एक ही नियम है: चाहे कुछ भी हो जाए, आपको सुबह 5:30 बजे पूल में होना ही चाहिए. मौसम चाहे जैसा भी हो, दुनिया भर का नियम है कि सुबह 5:00 से 7:00 बजे तक और शाम को 5:00 से 7:00 बजे तक स्विमिंग करनी होती है, और बीच में फिजिकल ट्रेनिंग होती है. मुझे उसे स्विमिंग के लिए कभी जगाने की जरूरत नहीं पड़ी; वह सुबह 4:30 बजे ही मेरे कमरे में तैयार होकर खड़ा रहता था. तो वह अनुशासन उसमें शुरू से ही आ गया था.’

अपने बेटे के लिए दुबई शिफ्ट होने के बावजूद, माधवन भारतीय फिल्मों में काम करना जारी रखे हुए हैं. वे जल्द ही कृष्णकुमार रामकुमार की तमिल पीरियड ड्रामा फिल्म ‘GDN’ में नजर आएंगे, जो महान आविष्कारक और इंजीनियर गोपालस्वामी दोराईस्वामी नायडू की बायोपिक है, जिन्हें “भारत का एडिसन” भी कहा जाता है. यह फिल्म 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है.

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