अपनी बेबाक फिल्मों से ग्लैमरस दुनिया के पीछे छिपे सच को पर्दे पर लाने वाले मशहूर निर्देशक मधुर भंडारकर एक बार फिर चर्चा में हैं. ‘चांदनी बार’, ‘पेज 3’, ‘फैशन’ और ‘कॉरपोरेट’ जैसी यादगार फिल्में देने वाले मधुर भंडारकर सोमवार, 10 अगस्त को We Women Want Conclave 2026 कार्यक्रम में पहुंचे.
बातचीत के दौरान मधुर भंडारकर ने अपने 25 साल के फिल्मी सफर, बॉलीवुड के अंदरूनी सच, हीरो-हीरोइन के बजट के फर्क और अपनी आने वाली फिल्म ‘वाइब्स ऑफ बॉलीवुड’ (Vibes of Bollywood) पर खुलकर दिल की बात रखी.
‘जितने में पूरी फिल्म बनी, उससे ज्यादा का करीना का ड्रेस बजट था’
मधुर भंडारकर ने अपनी लैंडमार्क फिल्म ‘चांदनी बार’ को याद करते हुए बताया कि इस फिल्म को जल्द ही 25 साल पूरे होने वाले हैं. इस फिल्म ने न सिर्फ तब्बू को पहचान दी, बल्कि मधुर के करियर का रुख भी मोड़ दिया.
बजट का एक दिलचस्प किस्सा शेयर करते हुए उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “चांदनी बार महज 1.5 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी. अगर आज के दौर से इसकी तुलना करें, तो साल 2012 में आई मेरी ही फिल्म ‘हीरोइन’ में करीना कपूर के कपड़ों का बजट ही 2 करोड़ रुपये से ज्यादा था.” उनका मानना है कि कम बजट के बावजूद जो प्यार इस फिल्म को दर्शकों से मिला, वही उनकी असली ताकत है.
नई फिल्म ‘वाइब्स ऑफ बॉलीवुड’
अपनी नई फिल्म के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि पहले इसका नाम ‘बॉलीवुड वाइफ्स’ रखने का विचार था, लेकिन बाद में इसे ‘वाइब्स ऑफ बॉलीवुड’ किया गया.
फिल्म की रिसर्च के बारे में बताते हुए मधुर ने खुलासा किया कि उन्होंने बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों की पत्नियों से मुलाकात की. मधुर ने बताया, “मैं 2-3 बॉलीवुड वाइफ्स से मिला. उन्होंने मुझे काफी अंदर की जानकारियां (डोप) दीं, लेकिन साथ ही यह शर्त भी रखी कि उनका नाम कहीं सामने न आए. यह फिल्म बॉलीवुड के रेड कार्पेट, अवॉर्ड नाइट्स और घरों के भीतर होने वाले तनाव और इमोशंस की एक सच्ची झलक दिखाएगी.”
‘इंडस्ट्री में आज भी है फर्क, फीमेल-लीड फिल्मों को समझा जाता है छोटा’
महिला केंद्रित फिल्में बनाने के लिए मशहूर मधुर भंडारकर ने इंडस्ट्री में मिलने वाले बजट के अंतर पर दर्द भी बयां किया. उन्होंने कहा कि जब आप किसी बड़े मेल स्टार (हीरो) को लेकर फिल्म बनाते हैं, तो प्रोड्यूसर्स तुरंत बड़ा बजट देने को तैयार हो जाते हैं. लेकिन जैसे ही बात हीरोइन-ओरिएंटेड फिल्म की आती है, तो उसे ‘छोटी फिल्म’ मान लिया जाता है.
मधुर भंडारकर ने कहा कि, ‘यह फर्क आज भी कायम है. जिस दिन दर्शक थिएटर्स में जाकर किसी हीरोइन की फिल्म को भी उतना ही प्यार देंगे, जितना किसी बड़े सुपरस्टार की फिल्म को देते हैं, उसी दिन सिनेमा इंडस्ट्री में असली बदलाव आएगा. ‘
‘मेरा कोई कैंप या गैंग नहीं है’
बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान पर बात करते हुए मधुर ने साफ कहा कि वो किसी गुटबाजी का हिस्सा नहीं हैं. उन्होंने कहा, ‘मैं एक इंडिपेंडेंट फिल्ममेकर हूं. मेरा कोई कैंप, लॉबी या गैंग नहीं है. मैं अपने मन से फिल्में बनाता हूं और लंबा ब्रेक भी लेता हूं. मेरे लिए सबसे बड़ी ताकत वो दर्शक हैं जो मुझसे मिलकर कहते हैं कि मधुर, आप जिस तरह की फिल्में बनाते हैं, वैसी ही बनाते रहिए.’
अपनी रिसर्च की प्रक्रिया पर उन्होंने बताया कि वो सिर्फ ऊपरी बातें नहीं सुनते, बल्कि जमीनी स्तर पर उतरते हैं. फिर चाहे ‘जेल’ फिल्म के लिए कैदियों और वकीलों से मिलना हो, या ‘इंडिया लॉकडाउन’ के लिए मुंबई के कमाठीपुरा जाकर सेक्स वर्कर्स का दर्द समझना हो—वो हर किरदार को गहराई से महसूस करने के बाद ही पर्दे पर लाते हैं.