हाल ही में ‘लॉकअप सीजन 2’ में राम कपूर ने अपनी जिंदगी के बड़े राज से पर्दा उठाया है. उन्होंने बताया कि डॉक्टर्स ने उन्हें चेतावनी दी थी कि वह छह महीने में मर जाएंगे.
राम कपूर ने कहा कि डॉक्टर्स ने बताया कि वह बहुत अस्वस्थ हैं और छह महीने में उनकी मौत भी हो सकती है. इस बात के बारे में राम कपूर ने अपनी पत्नी गौतमी को भी नहीं बताया था.
इस वजह से बीमार हुए थे राम कपूर
‘लॉकअप 2’ में राम कपूर ने कहा, ‘मैंने दुनिया से एक राज छिपाकर रखा था. यहां तक कि मेरी पत्नी को भी इसके बारे में नहीं पता था. एक टीवी शो के दौरान मैं अपनी जिंदगी के सबसे बुरे डिप्रेशन से गुजर रहा था. लेकिन मेरे वजन की वजह से ही मुझे छोटे पर्दे पर बहुत प्यार मिला, मेरी इतनी चर्चा हुई कि कुछ समय के लिए मैं सबसे ज्यादा रेटिंग वाला टीवी स्टार बन गया था.’
राम कपूर ने आगे कहा, ‘लेकिन मेरे डॉक्टरों ने मुझसे कहा कि मैं अस्वस्थ हो गया हूं. छह महीने में मेरी मौत हो सकती है. मुझे डायबिटिक स्ट्रोक हो सकता था क्योंकि मैं दिन में तीन बार इंसुलिन ले रहा था. मेरा शुगर लेवल 400 से 600 के बीच रहता था और मैं दिन में 14 घंटे काम करता था. मैं अपने मोटापे को लेकर कुछ नहीं करना चाहता था क्योंकि मुझे बहुत प्यार और पैसा मिल रहा था. मैं इन सब चीजों कैसे छोड़ सकता था? लेकिन इसी वजह से मैं बहुत बदसूरत इंसान बन गया था.’
मुश्किल दौर से आये बाहर
राम कपूर ने बताया कि वह अपने बच्चों से बहुत प्यार करते हैं. राम कपूर ने कहा कि अगर वहां बच्चे ना होते तो डिप्रेशन के दौर में खुद को खो बैठते लेकिन बच्चों के लिए उन्होंने खुद पर काम किया. राम कपूर ने कहा, ‘अगर मेरे बच्चे नहीं होते, तो मैं भी वही करता जो हर्षद ने किया था. जब आपके बच्चे होते हैं, तो आप उनके लिए जीते हैं और आपको अपनी जिंदगी खत्म करने का कोई हक नहीं होता. बस इसी बात ने मुझे बचाया. यही एकमात्र कारण है कि मैं आज जिंदा हूं. 10 साल से ज्यादा हो गए हैं और आज मैं एक इंसान के तौर पर बहुत खुश हूं. गौतमी और मेरे बच्चों को भी अभी इसके बारे में पता चलेगा.’
बीते दिनों भी खोला एक बड़ा राज
इससे पहले भी ‘लॉकअप 2’ में राम कपूर ने बताया था कि उन्होंने पिता को मरने में मदद की थी. उनका कहना था, ‘मैंने अपने पिता की मौत की योजना बनाने में उनकी मदद की.’ राम कपूर ने बताया कि उनके पिता ने एक बार पैंक्रियाटिक कैंसर का सामना किया था, लेकिन 73 साल की उम्र में जब कैंसर दोबारा हुआ, तो वे फिर से इलाज नहीं करवाना चाहते थे. राम उनके साथ खड़े रहे और उनके फैसले का समर्थन किया.