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KBC 18: करोड़पति बनने से कुछ कदम दूर टाइल लगाने वाला मिस्त्री? KBC में बैठ बताई दर्दभरी कहानी; बिना लाइफलाइन लिए कमाल खेले किशन

KBC 18 Kishan Lal Kumawat: KBC एक ऐसा दिलचस्प शो है जो लोगों की जिंदगी बदल देता है. वहीं हाल ही में, 'कौन बनेगा करोड़पति 18' में IIT-बॉम्बे के टॉपर योगेश साहू ₹1 करोड़ के सवाल तक पहुँचे, लेकिन एक सवाल के गलत तरीके से पूछे जाने की वजह से वो 'करोड़पति' नहीं बन सके.

By: Heena Khan | Last Updated: September 2, 2026 1:26:57 PM IST



KBC 18 Kishan Lal Kumawat | Kaun Banega Crorepati 18 | Kishan Lal Kumawat Success Story: KBC एक ऐसा दिलचस्प शो है जो लोगों की जिंदगी बदल देता है. वहीं हाल ही में, ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ में IIT-बॉम्बे के टॉपर योगेश साहू ₹1 करोड़ के सवाल तक पहुँचे, लेकिन एक सवाल के गलत तरीके से पूछे जाने की वजह से वो ‘करोड़पति’ नहीं बन सके. वहीं अब, यह मौका राजस्थान के एक दिहाड़ी मज़दूर किशन लाल कुमावत नाम के एक मिस्त्री के हाथ लगा. दरअसल, वो आने वाले एपिसोड में ₹1 करोड़ के सवाल का जवाब देते हुए नज़र आएँगे. किशन 31 अगस्त के एपिसोड में हॉट सीट पर बैठे; उन्होंने अपने गेमप्ले और जानकारी से अमिताभ बच्चन को प्रभावित तो किया ही, साथ ही अपने संघर्ष की कहानी से उन्हें भावुक भी कर दिया यह एक ऐसा इमोशनल पल था जिसने दर्शकों की आँखों में भी आँसू ला दिए.

बिना लाइफलाइन लिए खेला गेम 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ में जिस तरह से किशन ने सवालों के जवाब दिए उनकी हर तरफ तारीफ हो रही है, ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने बिना किसी लाइफ़लाइन का इस्तेमाल किए आसानी से पहला स्टेज पार कर लिया, एक ऐसा कारनामा जिसने अमिताभ को हैरान कर दिया. जब अमिताभ ने उनके काम के बारे में पूछा, तो किशन ने बताया कि वो लोगों के घरों में टाइल लगाने का काम करते हैं, लेकिन ऐसा करते समय उन्हें अक्सर भेदभाव का सामना करना पड़ता है.

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किशन संग होता था भेदभाव

दरअसल KBC शो के मेकर्स ने एक प्रोमो में दिखाया कि किशन कह रहे हैं कि ,’मैं टाइल लगाने का काम करता हूँ, लेकिन कई घरों में हमें भेदभाव का सामना करना पड़ता है. जिन लोगों के घरों में हम टाइल लगाते हैं, वे अक्सर हमें खाना देने से मना कर देते हैं. अगर हम पानी माँगते हैं, तो वे बर्तन धोने वाली टंकी की ओर इशारा करते हैं और वहीं से पानी पीने के लिए कहते हैं. कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में आर्किटेक्ट और इंजीनियर भी होते हैं.  उन्हें चाय दी जाती है, लेकिन हमें नहीं. क्या फ़र्क है? उनके पास डिग्रियाँ और शिक्षा होती है जिससे उन्हें वह सम्मान मिलता है. हमें वह नहीं मिलता.” यह सुनकर अमिताभ बच्चन और दर्शक दोनों ही भावुक हो जाते हैं.

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