नई दिल्ली: 

7.30 दीप उस वक्त घर वापस आता है जब रोमा और विराज पृथ्वी के साथ मिलकर उसका हर एक समान जाला रहे थे. लेकिन दीप को आता देख घरवाले सकते में आ जाते है. रोमा दीप को देखकर कहती है कि वो उसका समान सिर्फ तारा के मन में बैठे उसके प्रति प्यार को खत्म करने के लिये जलाया था.

9.35 दीप को देखकर आरोही उसके गले लग जाती है और उससे माफी मांगती है लेकिन दीप आरोही को नजरअंदाज करके अंदर चला जाता है.घर में बाबूजी को दीप बताता है कि उसने बड़ी ही मुश्किल से खुद अपने सीने से गोली निकाली है.तब वो जिंदा बच पाया है. 

9.40 रोमा तारा यानि आरोही को कहती है कि वो दीप के बारे में पता लगाए की वो आखिर इतना बदला हुआ क्यों लग रहा है वो तारा से कहती है कि वो दीप को ये बताने की कभी कोशीश ना करे कि उसके मरने का वे लोग जश्न मना रहे थे वरना वो दीप को हमेशा के लिये खो बैठेगी. 

9.45 आरोही अपने आप से कहती है कि वो अब दीप से प्यार करती है और वो किसी भी हालत में रोमा से दीप के ्सली माता पिता का पता लगा कर ही दम लेगी. वो कहती है कि दीप पर किये जानलेवा हमले का प्रायश्चित करने का यही एक मौका उसके लिये बचता है. 

9.50 आरोही कमरे में जाती है जहां दीप अपने जख्मों पर मलहम लगा रहा होता है जिसे देख आरोही की आंखों से आंसू निकलने लगते हैं वो दीप के पास जाती है और उसे दवा लगाने की कोशीश करती है लेकिन तभी दीप उसे धक्का देकर गिरा देता है. दीप के इस रवैये से आरोही परेशान हो जाती है. 

9.55 दीप आरोही से कहता है कि वो जानता है कि वो तारा नही बल्कि आरोही है. वो कहता है कि उसने आरोही के लिये कभी कुछ बुरा नही किया फिर भी आरोही ने उसे जान से मारने की कोशीश की. दीप आरोही से कहता है कि अब उसे आरोही से सिर्फ नफरत है. 

10 दीप और आरोही में लड़ाई होती है जिसके बाद दीप वहां से निकल जाता है लेकिन वहीं असली तारा आ जाती है और वो उसे रोकने की कोशीश करती है लेकिन दीप उसे धक्का देकर गिरा देता है जिससे तारा को चोट भी लगती है लेकिन उसकी चोट देखने के बाद भी दीप वहां नही रूकता है जिसे देख तारा को समझते देर नही लगती है कि आरोही का दिया जख्म दीप के दिल में इतना गहरा है कि वो उस चेहरे से ही नफरत करने लगा है. 

 

 

 

 

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