नई दिल्ली: इरफान खान के निधन से पूरी फिल्म इंडस्ट्री में शून्य सा छा गया है. वह पिछले दो सालों तक न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर नामक बीमारी से लड़ते रहें लेकिन आज उनके जाने से पूरा फिल्मी जगत शोक में है. इरफान जाने से अपनी मेहनत और दमदार एक्टिंग की छाप छोड़ गए, जो सभी के लिए प्रेरणादायक है. इरफान खान बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी एक्टिंग का परचम लहरा चुके हैं. वे ऐसे एक्टर थे जिन्होंने ना शर्ट उतारी और ना ही सिक्स पैक शो किया. इसके बावजूद उनकी एक्टिंग लोगों के रूह तक उतर जाती थी.

जानिए इरफान खान के जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें. कैसे उन्होंने एक आम इंसान से फिल्मों तक का सफर तय किया-

क्रिकेटर बनना चाहते थे इरफान
राजस्थान के जयपुर में जन्मे इरफान खान को बचपन से ही क्रिकेट खेलना पसंद था. वह अपने पड़ोस और चौगान स्टेडियम में जाकर क्रिकेट खेलते थे. क्रिकेट के सीके नायडू ट्रॉफी के लिए उनका सेलेक्शन भी लगभग हो गया था. लेकिन जैसे ही उनके घर वालों को ये बात पता चली तो उन्होंने इसके लिए रजामंदी नहीं दी. परिवार वालों ने उन्हें पहले अपना ग्रेजुएशन पूरा करने को कहा. इस तरह से उनका क्रिकेट खेलना छूट गया.

कैसे हुआ एक्टिंग की तरफ रुझान
ग्रेजुएशन करने के दौरान इरफान ने कुछ नए कलाकारों के साथ एक्टिंग की तरफ ध्यान दिया. इसके बाद उनकी मुलाकात नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के ऐसे शख्स है हुई जो कॉलेजों में नाटक करते थे. इरफान भी उनकी टीम में शामिल हो गए और इसके बाद एक्टिंग में अपने करियर को लेकर वह गंभीर भी हो गए.

संघर्ष और चुनौतियां का सामना कर हासिल की कामयाबी
इरफान खान ने जब एनएसडी में दाखिला लिया था तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई. उस वक्त इरफान करियर के शुरुआती दौर में थे. पिता की मृत्यु के बाद उन्हें घर से पैसे मिलने भी बंद हो गए. इसके बाद इरफान ने एनएसडी से मिलने वाली फेलोशिप के जरिए अपना कोर्स पूरा किया.

करियर की शुरुआत
इरफान भले ही आज बॉलीवुड का जाना माना नाम है. लेकिन अपने करियर की शुरुआत उन्होंने छोटे पर्दे से की. उन्होंने टेलीविजन में छोटे मोटे रोल किए. इसके बाद वह चाणक्य, भारत एक खोज,कहकशां, सारा जहां हमारा, बनेगी अपनी बात, अंगूरी, स्पर्श और चंद्रकला जैसे सुपरहिट टीवी शो में काम किया. स्टार प्लस के शो डर में उन्होंने खतरनाक विलेन की भूमिका निभाई थी.

इरफान का फिल्मी करियर
इरफान खान ने साल 1988 में सलाम बॉम्बे के साथ बॉलीवुड में एंट्री की. हालांकि इस फिल्म से उनके लिए सिर्फ बॉलीवुड के दरवाजे खुले थे. सफलता अभी कोसो दूर थी. इसबीच वह कई फिल्मों में छोटे मोटे रोल करते रहे. लेकिन 2001 में आई डायरेक्टर आसिफ कपाड़िया की फिल्म द वॉरियर से उन्हें पहचान हासिल हुई. इसके बाद वह कमला की मौत, दृष्टि, एक डॉक्टर की मौत, वादे इरादे, घात और कसूर जैसी कई फिल्मों में दिखे. लेकिन 2005 में उन्हें फिल्म रोग में पहली बार लीड रोल में देखा गया.

इरफान खान की फिल्में
इरफान खान ने अपने 30 साल के करियर के दौरान 50 से अधिक हिंदी फिल्में की.यूं होता तो क्या होता,ये साली जिंदगी, किस्सा, रोग, डी-डे, जज्बा, लाइफ इन अ मेट्रो,साहेब बीवी और गैंगस्टर, मकबूल, पीकू, बिल्लू, कारवां, मदारी,स्लमडॉग मिलियनेयर, पान सिंह तोमर,तलवार, ब्लैकमेल,द लंचबॉक्स, हिंदी मीडियम जैसी कई फिल्में की. हिंदी फिल्मों के साथ ही उन्होंने स्पाइडर मैन, जुरासिक वर्ल्ड, द नेमसेक, लाइफ ऑफ पाई,ए माइटी हार्ट और इन्फर्नो जैसी हॉलीवुड फिल्मों में भी काम किया है. आखिरी बार इरफान अंग्रेजी मीडियम में नजर आए थे.

इरफान खान को इन फिल्मों के लिए मिले अवार्ड
करीब तीन दशक के अपने फिल्मी करियर में इरफान ने एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दी, जिसमें कई फिल्मों को राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय सम्मान भी मिले.
2004- हासिल फिल्म के लिए फ़िल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार
2008 – लाइफ़ इन अ मेट्रो के लिए फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार
2011- भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया
2012- पान सिंह तोमर राष्ट्रीय पुरुस्कार से सम्मानित किया गया

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