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फिल्म- मैं वापस आऊंगा
कलाकार- नसीरुद्दीन शाह, दिलजीत दोसांझ, वेदांग रैना, शरवरी, बनिता संधू, मनीष चौधरी, दानिश पंडोर.
निर्देशक- इम्तियाज अली
रेटिंग- 3.5/5
नसीरुद्दीन शाह, दिलजीत दोसांझ और शरवरी वाघ अभिनीत फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई. इम्तियाज अली की फिल्म विभाजन के दौर की कहानी कहती है, जो एक निस्वार्थ प्रेम को दिखाती है. कैसे एक व्यक्ति 78 सालों से अपनी मोहब्बत को मरते दम तक संजो कर रखता है. इसी पर आधारित है ये फिल्म. चलिए जानते हैं फिल्म की कहानी और एक्टिंग और डायरेक्शन के बारे में. साथ ही ये फिल्म आपको देखनी चाहिए या नहीं. कैसी है फिल्म की कहानी?
क्या है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी चंडीगढ़ में रहने वाले 95 वर्षीय ईश्वर सिंह ग्रेवाल (नसीरुद्दीन शाह) से शुरू होती है. बढ़ती उम्र के कारण उनकी याददाश्त कमजोर हो चुकी है, लेकिन उनके मन में 78 सालों से एक ख्वाहिश बाकी है, अपने पुराने शहर सरगोधा लौटने की. उन्हें यह एहसास नहीं है कि सरगोधा अब भारत में नहीं, बल्कि पाकिस्तान में है. 1947 के बंटवारे के बाद यह इलाका पाकिस्तान का हिस्सा बन गया था. ईश्वर सिंह ग्रेवाल अपनी प्रेमिका जिया उर्फ अफसाना (शरवरी वाघ) से एक बार मिलना चाहते हैं, जो सरगोधा में रहती हैं. अचानक हार्ट अटैक आने से ईश्वर सिंह अस्पताल में भर्ती हो जात है, लेकिन उसके मन की अंतिम इच्छा उसे मरने नहीं देती है, क्योंकि वह जिया से मरने की इजाजत चाहता है. ईश्वर सिंह की इस दबी इच्छा को पूरी करने के लिए उनका पोता निर्वैर (दिलजीत दोसांझ) मदद करता है. क्या ईश्वर सिंह अपनी प्रेमिका को आखिरी बार मिल पाएगा? या दबी रह जाएगी ये इच्छा. ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.
कैसी है एक्टिंग?
फिल्म में अगर एक्टिंग की बात करें, तो नसीरुद्दीन शाह ने लोगों का दिल जीतने का काम किया है. वहीं वेदांग रैना, जो नसीरुद्दीन शाह के युवा किरदार में नजर आए हैं. उन्होंने भी अच्छी भूमिका निभाई है. इसके अलावा शरवरी वाघ और दिलजीत दोसांझ ने भी जबरदस्त एक्टिंग की है.
डायरेक्शन कैसा है?
इम्तियाज अली ने निर्देशन अच्छा किया है. फिल्म का पहला पार्ट देखकर आपको थोड़ा कहानी कम समझ आएगी और श्लो भी लगेगी. लेकिन जैसे ही दूसरा भाग आता है, तो कहानी में जान आ जाती है. और क्लाइमैक्स सीन में तो डायरेक्टर ने छक्का मारने का काम किया. यह फिल्म धैर्य मांगती है. पहला भाग थोड़ा और अच्छा किया जा सकता था. लेकिन निर्देशन अच्छा है.
फिल्म देखें या नहीं?
अगर आप निस्वार्थ भाव के प्रेम को देखना चाहते हैं, तो इसे देख सकते हैं. साथ ही अगर आप अच्छी कहानी और धैर्य के साथ चीजें देखना चाहते हैं, तो भी इसे देख सकते हैं. नसीरुद्दीन शाह, दिलजीत के फैन हैं तो आप सिनेमाघरों में जा सकते हैं.
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