1930 का दशक जब महिलाओं का घर से बाहर निकलना भी एक बड़ा मुद्दा था. उस दौर में फिल्मों में काम करना तो बहुत दूर की बात थी. यहां तक कि फिल्मों में महिलाओं के किरदार भी पुरुष साड़ी पहनकर निभाया करते थे. लेकिन फिर एक ऐसी महिला सामने आई, जिसने समाज के सारे कायदे कानूनों को ताक पर रख दिया. दुर्गा खोटे एक पढ़ी लिखी परिवार से आती थी, जिसने जब बड़े पर्दे पर कदम रखा तो भारतीय सिनेमा का इतिहास हमेशा के लिए बदल गया. 18 की उम्र में शादी के बाद 26 साल में वह विधवा हो गई थीं. इतना ही नहीं, उन्होंने 40 साल के नौजवान बेटे को भी खो दिया था.
पढ़ी-लिखी एक्ट्रेस थीं दुर्गा खोटे
दुर्गा खोटे का जन्म 14 जनवरी 1905 को मुंबई के एक प्रतिष्ठित और पढ़े लिखे कोंकणी परिवार में हुआ था. उनका बचपन का नाम वीटा लाड था. जब उस जमाने में लड़कियों की पढ़ाई रोक दी जाती थी तब दुर्गा खोटे ने सेंट जेवियर्स कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की. कम उम्र में ही उनकी शादी विश्वनाथ खोटे से हो गई. दो प्यारे बेटे हुए बकुल और हरीन. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. महज 26 साल की उम्र में दुर्गा जी के पति का अचानक निधन हो गया. उनके सिर पर दो छोटे बेटों बकुल और हरीन की जिम्मेदारी आ गई.
आर्थिक तंग से जूझने लगी दुर्गा खोटे
पति की मौत के बाद दुर्गा खोटे आर्थिक तंगी से जूझने लगी. फिर उन्होंने फैसला किया कि वो अभिनय करेंगी. हालांकि, रिश्तेदारों ने विरोध किया और समाज ने ताने दिए. लेकिन अभिनेत्री ने हार नहीं मानी. साल 1931 में उन्होंने एक मूक फिल्म से शुरुआत करने के बाद 1932 में आई फिल्म ‘अयोध्याचा राजा’ में उन्होंने रानी तारामती का किरदार निभाया. यह फिल्म बहुत बड़ी हिट साबित हुई और इसके साथ ही दुर्गा खोटे बन रातों-रात स्टार बन गईं. वह भारतीय सिनेमा की पहली सफल महिला स्टार हो गईं. वह कभी भी किसी डायरेक्टर या प्रोड्यूसर के सामने झुकती नहीं थीं. एक्ट्रेस ने उस जमाने में फिल्मों में काम करके अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता खोल दिया.
बेटे के निधन से टूट गईं दुर्गा खोटे
40 से 42 की उम्र में दुर्गा खोटे ने अपने बेटे को खो दिया. पति के बाद जवान बेटे का जाना उनके लिए सबसे दर्दनाक साबित हुआ. अपने 50 सालों के लंबे करियर में उन्होंने 200 से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया. लेकिन 1960 में आई के आसिफ की ऐतिहासिक फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ में उनके किरदार को कौन भूल सकता है? शहंशाह अकबर की पत्नी और सलीम की मां महारानी जोधाबाई के किरदार में दुर्गा खोटे ने जान फूंक दी थी.
इन फिल्मों में भी किया काम
एक्ट्रेस ने अपने करियर में ‘आनंद’, ‘बॉबी’, ‘विदाई’ और ‘कर्ज’ जैसी फिल्मों में भी अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया. भारतीय सिनेमा में उनके इस अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1968 में पद्मश्री और 1983 में भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया. 22 सितंबर 1991 को 86 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था.
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