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Satluj Re-release: ‘सतलुज’ को री-रिलीज करने की उठ रही मांग, हाईकोर्ट में दायर हुई याचिका, रिलीज के दो दिन बाद ही Zee5 को हटानी पड़ी थी फिल्म!

जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित फिल्म 'सतलुज' को रिलीज के दो दिन बाद ही ZEE5 से हटा दिया गया, जिसके खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है.

By: Shivangi Shukla | Published: July 9, 2026 2:53:21 PM IST



Jaswant Singh Khalra Biopic: जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 से रिलीज के दो दिन बाद ही हटा दिया गया, जिसको दोबारा रिलीज करने की मांग उठ रही है. 

इस मामले ने अब न्यायिक मोड़ ले लिया है. दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने की मांग को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है.

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दर्ज हुई याचिका 

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर याचिका में कहा गया है कि इस फिल्म को बिना किसी सार्वजनिक वैधानिक या न्यायिक आदेश के हटाया गया, जो संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकों के सूचना प्राप्त करने के अधिकार का उल्लंघन है. याचिकाकर्ता शरवण सिंह ने संविधान के अनुच्छेद-226 के तहत दायर याचिका में केंद्र सरकार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी), पंजाब सरकार, ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड तथा ज़ी5 को प्रतिवादी बनाया है.

इस याचिका में हाई कोर्ट से आग्रह किया गया है कि दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ को पूरे देश में ज़ी5 पर तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए जाएं. इसके अलावा याचिका में ये भी मांग की गयी है कि यदि फिल्म हटाने के पीछे कोई सरकारी, वैधानिक या न्यायिक आदेश है तो उसे सार्वजनिक किया जाये.

जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है ‘सतलुज’

यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता दिवंगत जसवंत सिंह खालरा के जीवन, उनके संघर्ष और पंजाब में साल 1995 में हुए कथित अवैध दाह संस्कारों के मामलों पर आधारित है. इसमें 1990 के दशक में पंजाब पुलिस द्वारा 25,000 से अधिक सिख युवाओं की राज्य-समर्थित गैर-न्यायिक हत्याओं और अवैध सामूहिक दाह संस्कार का विवरण दिया गया है. यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता ‘जसवंत सिंह खालरा’ के जीवन पर आधारित बायोपिक फिल्म है. इस फिल्म को संस्थागत स्तर पर भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है. जब फिल्म निर्माताओं ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को फिल्म सौंपी, तो उन्हें 127 कट लगाने की चौंकाने वाली मांग का सामना करना पड़ा, जिसमें सभी विशिष्ट नामों, पंजाब के संदर्भों, पुलिस बर्बरता के दृश्यों और मुख्य नायक की पहचान को हटाना शामिल था. इसके अलावा फिल्म को आधिकारिक तौर पर 2023 में टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (टीआईएफएफ) में एक भव्य विश्व प्रीमियर के लिए चुना गया था, लेकिन भारतीय अधिकारियों के उच्च स्तरीय हस्तक्षेप के बाद स्क्रीनिंग को अचानक रद्द कर दिया गया था.

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