Angrezi Medium Movie Review: इरफान खान की मूवी हिंदी मीडियम तीन साल पहले केवल 14 करोड़ रुपए में बनी और 22 गुना से भी ज्यादा कमाई की थी इस फिल्म ने, पूरे 322.4 करोड़। ये तब हुआ जबकि मूवी में कोई भी बड़ी एक्ट्रेस नहीं थी, पाक एक्ट्रेस सबा कमर लीड रोल में थी. ऐसे में इसी मूवी के सीक्वल ‘अंग्रेजी मीडियम’ में तो करीना कपूर, डिम्पल कपाड़िया, पंकज त्रिपाठी, रणवीर शौरी, कीकू शारदा, राधिका मदान, मनु श्रषि, जाकिर हुसैन औऱ मेघना मलिक जैसे चर्चित चेहरे हैं और पिछली फिल्म के उनके साथी दीपक डोबरियाल भी। तो ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कामयाबी की वो कहानी दोहराई जा सकेगी.

पहले ये जान लीजिए कि इस मूवी में इरफान और दीपक डोबरियाल के अलावा कोई भी रिपीट है तो शायद म्यूजिक वाले सचिन जिगर की जोड़ी. बाकी सब कुछ बदल दिया गया है, कहीं से भी स्टोरी आपस में नहीं जुड़ी है, एडमीशन का चक्कर जरुर है लेकिन उसका मीडियम से कोई लेना देना नहीं है. शहर भी बदल दिया गया है और डायरेक्टर भी. पहले फिल्म दिल्ली पर बेस्ड थी, इस बार कहानी उदयपुर में रची गई है। डायरेक्टर साकेत चौधरी की जगह डिम्पल कपाडिया के फैमिली डायरेक्टर यानी बीइंग साइरस, फाइंडिंग फैनी औऱ कॉकटेल फेम होमी अदजानिया को मौका दिया गया है.

कहानी है घसीटेराम फैमिली की, जो एक मशहूर हलवाई थी। खानदान बड़ा होकर अब कई शहरों में बिखर गया है और सभी अलग अलग शहरों में इसी ब्रांड से मिठाई की दुकान चलाते हैं और आपस में केसबाजी भी करते रहते हैं. जबकि बाकी लोग इस ब्रांड को खरीदना चाहते हैं। ऐसे में बाजी हाथ लगती है, गोपी यानी दीपक डोबरियाल के हाथ, ब्रांड के कॉपीराइट का फैसला उसके हक में हो जाता है. लेकिन असली कहानी केस हार चुके उसके कजिन चम्पक बंसल यानी इरफान की है, जो अपनी बिना मां की बेटी राधिका मदान के बचपन के सपने यानी लंदन की यूनीवर्सिटी में एडमीशन करवाने को लेकर परेशान है. गोपी उसका इस हद तक जाकर साथ देता है कि घसीटेराम ब्रांड भी बिक जाता है.

दरअसल असली कहानी राधिका मदान या तारिका और उसके मां और बाप दोनों यानी इरफान खान की ही है, उसके लंदन में पढ़ने की ख्वाहिश की है, उनकी नोंक झोंक की है और जितने भी लम्हे इन बाप-बेटी के बीच फिल्माए गए हैं, वो वाकई में बेहतरीन हैं, फिल्म मे जान बनाए रखते हैं, आपको हंसी भी दिलाते हैं औऱ आंखों में आंसू भी. उसी तरह दीपक डोबरियाल और इरफान के बीच के सींस भी दमदार हैं. लेकिन बाकी करेक्टर्स वो भी इतने बड़े बड़े चेहरे क्यों इस मूवी में डाले गए, ये ऑडियंस समझ नहीं पाता। दरअसल वो बड़े चेहरों से बड़े रोल की उम्मीद करता है और उसमें फेल साबित होता है.

लंदन जाने के लिए और लंदन में एडमीशन के लिए, पैसे जुटाने के लिए इतनी बेवकूफी भरे प्लॉट डायरेक्टर ने रचे हैं कि कई बार वो कनविंसिंग नहीं लगते, कई बार इतने बड़े बड़े किरदारों को जगह देने के लिए सीन रचे गए हैं कि वो ऑडियंस को कन्फ्यूज कर देते हैं, बनावटी लगते हैं. ऐसे में बीच में वो मूवी कई बार ट्रैक से उतरती दिखाई देती है. लेकिन मूवी में एक जो देसीपन था, इरफान, दीपक, रणवीर शौरी, कीकू शारदा जैसे कलाकारों की भदेस डायलॉग डिलीवरी और राइटर के पंच थे, वो मूवी को वापस ट्रैक पर लेकर आते हैं और खास तौर पर राधिका और इरफान के बीच की नोंक झोंक भी. बाकी जो भी थे यानी करीना, डिम्पल, रणवीर शौरी, पंकज त्रिपाठी, जाकिर हुसैन, मेघना मलिक ये सब गेस्ट रोल मे ही दिखते हैं. म्यूजिक का रोल बस इतना है कि ये फिल्म का पेस बनाए रखता है. कहानी में भी एडमीशन के साथ साथ विदेश में भारतीयों की परेशानी, ठगी, बाप बेटी रिश्ते जैसी तमाम कहानियां डाल दी गई हैं, सो कभी कभी मूवी भटकती लगती है.

कुल मिलाकर उम्मीद नहीं है कि हिंदी मीडियम का रिकॉर्ड अंग्रेजी मीडियम तोड़ेगी, उसके पीछे कोरोना वायरस की दहशत भी है, दिल्ली में सारे सिनेमा हॉल्स 31 मार्च तक बंद रखने का ऐलान हो ही गया है. लोग भी मूवी कम देखने जा रहे हैं। लेकिन इतना जरूर है कि मूवी पैसा वसूल है. वैसे भी होमी अदजानिया का रिकॉर्ड फेलियर का नहीं है, तो सुपर डुपर हिट का भी नहीं है और शायद वो इसी लीक को बरकरार रखें। लेकिन कैंसर से जूझ रहे इरफान और दीपक की जोड़ी लाजवाब है और राधिका मदान ने भी इरफान की बेटी तारिका के रोल में शानदार काम किया है.

फिल्म रेटिंग- ***

विष्णु शर्मा