नई दिल्ली. पंजाबी फिल्म ‘द मास्टरमाइंड: जिंदा-सुक्खा’ के खिलाफ मिली शिकायतों के बाद सेंसर बोर्ड ने फिलहाल इसकी रिलीजिंग पर रोक लगा दी है. उधर सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी के इस फैसले के खिलाफ फिल्म निर्माता और बोर्ड के मेंबर अशोक पंडित ने ही झंडा बुलंद कर दिया है. अशोक का आरोप है कि निहलानी बोर्ड को अपने निजी प्रोडक्शन हाउस की तरझ चला रहे हैं. 
 
पंडित ने कहा कि निहलानी हर बोर्ड की हर समिति के चेयरमैन खुद बने हुए हैं, हर फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद आखिरी फैसला अपनी मनमनमर्जी से करते हैं कि फिल्म रिलीज होगी या नहीं. पंडित ने कहा कि निहलानी को समझना चाहिए कि बोर्ड फिल्म को सर्टिफिकेट देने के लिए है न कि बैन कर देने के लिए. लोकतंत्र में फिल्मों को बैन करना एक बचकानी हरकत है. अगर किसी फिल्म से कानून उल्लंघन की स्थिति बनती है तो पुलिस और सरकार इस समस्या से निपटेगी न कि बोर्ड यह काम करेगा. 
 
आपको बता दें कि यह फिल्म खालिस्तानी उग्रवादी हरजिंदर सिंह सुक्खा और सुखदेव सिंह सुक्खा के जीवन की घटनाओं पर बनायी गयी है. इन दोनों पर आर्मी में जनरल रहे और ब्लू स्तर ऑपरेशन के कर्ता-धर्ता एएस वैद्य के क़त्ल का रोप था इसके आलावा. साथ ही कांग्रेस नेता ललित माकन और अर्जन दास के क़त्ल का भी इन्हीं दोनों पर आरोप था. फिल्म में भी इन्हीं घटनाओं को दिखाया गया है जिस पर आपत्ति दर्ज कराई गईं हैं. 
 
 
 

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