नई दिल्ली: रिलीज से पहले ही विवादों में आई रणवीर सिंह, शाहिद कूपर और दीपिका पादुकोण की फिल्म पद्मावती के मामले में अब केंद्रीय मंत्री उमा भारती भी कूद पड़ी हैं. उमा भारती ने ट्विटर पर खुला खत जारी कर संजय लीला भंसाली पर निशाना साधा है. उमा ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा नहीं जा सकता है. उन्होंने कहा है कि मैं सोचने की आजादी का सम्मान करती हूं और मानती हूं कि अभिव्यक्त करने का भी मानव समाज को एक अधिकार है. इस ट्वीट के बाद एक दिसंबर को रिलीज हो रही फिल्म को लेकर विवाद और बढ़ गया है. हालांकि मोदी सरकार की सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति इरानी पहले ही साफ कर चुकी हैं कि फिल्म पद्मावती की रिलीज को लेकर कोई समस्या नहीं हो, इसके लिए सरकार ध्यान रखेगी.
 
उमा भारती ने अपनी चिट्ठी में अलाउद्दीन खिलजी को व्यभिचारी हमलावर कहा जिसकी पद्मावती पर बुरी नजर थी. उन्होंने इस विवाद को सुलझाने के लिए सलाह दी है. उन्होंने कहा है कि फिल्म रिलीज से पहले फिल्मकार, आपत्ति करने वाले समुदायों के प्रतिनिधि, इतिहासकार और सेंसर बोर्ड मिलकर इस पर सही फैसला करें. उमा भारती ने एक के बाद एक कई ट्वीट भी किए. इनमें लिखा है, ‘रानी पद्मावती के विषय पर मैं तटस्थ नहीं रह सकती’ मेरा निवेदन है कि पद्मावती को राजपूत समाज से न जोड़कर भारतीय नारी की अस्मिता से जोड़ा जाए. उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि तथ्य को बदला नहीं जा सकता, उसे अच्छा या बुरा कहा जा सकता है. सोचने की आजादी किसी भी तथ्य की निंगा या स्तुति का अधिकार हमें देती है. जब आप किसी ऐतिहासिक तथ्य पर फिल्म बनाते हैं तो उसके फैक्ट को वायलेट नहीं कर सकते.
 
केंद्रीय मंत्री ने आगे लिखा कि रानी पद्मावती की गाथा ऐतिहासिक तथ्य है. अलाउद्दीन खिलजी एक व्यवचारी हमलावर था. उसकी बुरी नजर रानी पद्मावती पर थी तथा इसके लिए उसने चित्तौड़ को नष्ट कर दिया था. रानी पद्मावती ने हजारों उन स्त्रियों के साथ जिनके पति वीरगति को प्राप्त हो गई थी, जीवित ही स्वंय को आग के हवाले कर जौहर कर लिया था.