नई दिल्ली: महानायक अमिताभ बच्चन के बारे में जितना भी लिखा जाए उतना कम है. कॉमेडी हो या एंग्री यंग मैन का रोल, रूपहले पर्दे पर हर किरदार को शहंशाह ने खुलकर जिया और लोगों के बीच गहरी छाप छोड़ी. जीवन के 75 वसंत देख चुके अमिताभ आज करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं. आनी वाली कई पीढ़ियां उनसे प्रेरित होती रहेंगी. अमिताभ बच्चन के 75वें जन्मदिन के मौके पर आज हम आपको उनकी 75 अनसुनी कहानियां बता रहे हैं. इनमें से एक कहानी है उस वक्त की जब फिल्म शहंशाह की शूटिंग चल रही थी और क्लाइमेक्स शूट करने के दौरान अमिताभ ने पुलिस की वर्दी पहनने से मना कर दिया था. तीन घंटों तक शूटिंग रूकी रही लेकिन फिर टीनू आनंद ने ऐसी बात कही कि अमिताभ कुछ भी कह नहीं सके और अंत में वर्दी में ही फिल्म का क्लाइमेंक्स शूट किया गया. क्या था पूरा मामला इस कड़ी की 10वीं किश्त में पढ़िए…
 
जया बच्चन ने लिखी थी अमिताभ की किस सुपरहिट फिल्म की कहानी?
 
 
बहुत कम लोगों को पता होगा कि शहंशाह फिल्म का मेन आइडिया खुद जया बच्चन का था. दरअसल जया बच्चन ने ये आइडिया अमिताभ के जरिए टीनू आनंद को दिया और उन्हें काफी पसंद भी आया. ये गेटअप बच्चन की एंग्री यंग मैन की स्क्रीन इमेज को भी सूट करता था, टीनू भी फौरन तैयार हो गए. जया बच्चन के आइडिया की स्क्रिप्ट लिखी टीनू के पिता इंदर आनंद ने और स्क्रीनप्ले लिखा संतोष सरोज ने. कहा जाता है कि फिल्म का क्लाइमेक्स टीनू आनंद के पिता ने अपने आखिरी दिनों में बिस्तर पर लेटे लेट ही लिखा था. लेकिन टीनू आनंद ने इस फिल्म के लिए पूरा क्रेडिट स्क्रीन पर जया बच्चन को दिया और परदे पर लिखा आया स्टोरी बाई जया बच्चन. 
 
याराना के इस पूरे गाने में अमिताभ पकड़े रहे जैकेट का स्विच
 
 
अमिताभ बच्चन अपने एक डांसिगं सोंग को याराना में एक नया टच देना चाहते थे. दरअसल इस गाने में उन्होंने एक खास किस्म की जैकेट इस्तेमाल की थी, जिसमें छोटे छोटो सैकड़ों बल्ब जलते बुझते रहते हैं. अमिताभ ने इस तरह की जैकेट इस्तेमाल करने का आइडिया दिया, लेकिन उस वक्त ऐसी कोई टेक्नीक नहीं थी, जिससे कि वो बल्ब अपने आप जल बुछ सकें. ऐसे में अमिताभ ने टेक्नीशियन से बात की और फॉरमूला ये निकाला गया कि जैकेट में एक खास जगह पर एक स्विच लगाया जाएगा, जिसे बच्चन नाचते नाचते ही ऑन ऑफ करते रहेंगे. ये काफी मुश्किल था, क्योंकि डांस स्टेप भी याद रखने थे, परफॉर्म भी करना था और बिना रुके लगातार उस स्विच को ऑन ऑफ भी करना था, लेकिन अमिताभ ने इसे बखूबी अंजाम दिया.
 
अमिताभ ने शम्मी कपूर से क्यों मांगी धुन इस्तेमाल करने की परमीशन?
 
 
अभिमान की तरह ही अमिताभ बच्चन को सिलसिला फिल्म भी अपनी जैसी ही कहानी लगती थी. इसलिए कहानी और किरदारों ही नहीं अमिताभ बच्चन ने फिल्म के म्यूजिक पर भी निजी रूप से दिलचस्पी ली थी. होली के गीत के लिए उनके कहने पर उनके पिता हरिवंश राय बच्चन की कविता रंग बरसे भीगे चुनर वाली को लिया गया तो म्यूजिक डायरेक्टर क्लासिकल म्यूजिक के मास्टर शिव-हरि की जोड़ी थी. ये गाना आज भी होली के फंक्शंस में गाया बजाया जाता है. इसी तरह अमिताभ ने एक और गाना फिल्म में शामिल करवाया, उसके बोल थे- नीला आसमां. दरअसल इस गाने की धुन 1975 में अमिताभ बच्चन और शम्मी कपूर ने मिलकर तैयार की थी, उन दिनों वो फिल्म ‘जमीर’ की शूटिंग कर रहे थे. जब अमिताभ ने शम्मी कपूर से इस धुन को अपनी फिल्म सिलसिला में इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी तो शम्मी कपूर को उस धुन की याद आई, वो तो भूल ही चुके थे, बोले- गो अहेड, जैसे चाहे इस्तेमाल कर लो. इस तरह ये गाना फिल्म में शामिल किया गया.  
 
परवीन बॉबी और स्मिता पाटिल को सिलसिला से यश चोपड़ा ने क्यों हटाया?
 
 
सिलसिला को अमिताभ और रेखा की आखिरी फिल्म के तौर पर याद किया जाता है और जया बच्चन के भी होने से ये फिल्म उनके निजी रिश्तों की वजह से चर्चा में रही. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि यश चोपड़ा रेखा और जया से पहले स्मिता पाटिल और परवीन बॉबी को साइन कर चुके थे. जिनमें से स्मिता को जया का और परवीन बॉबी को रेखा वाला रोल करना था. जब वो अमिताभ बच्चन को ये बात बताने गए, तो अमिताभ ने पूछा कि क्या ये आपकी आइडियल कास्टिंग है? तो यश चोपड़ा ने कहा, मैं तो जया और रेखा को साइन करना चाहता था तो अमिताभ ने एक लम्बा पॉज लिया और बोले कि मुझे कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन उन लोगों को राजी आपको करना होगा. तब यश चोपड़ा ने रेखा और जया से बात की, दोनों ने ही हां कर दी. चोपड़ा ने उन दोनों को अच्छे से समझा दिया कि सैट पर कोई गडबड़ नहीं होनी चाहिए. इधर यश चोपड़ा की दूसरी मुश्किल भी थी, स्मिता और परवीन को मना करना. परवीन से उनकी ट्यूनिंग अच्छी थी, उसे बुरा नहीं लगा लेकिन शशि कपूर को ये जिम्मेदारी दी गई कि वो स्मिता को मना करे, फिर भी स्मिता ने इसे दिल पे ले लिया था. वैसे ये अकेली फिल्म थी, जिसमें शशि कपूर ने अमिताभ के बड़े भाई का रोल किया था, वरना हर फिल्म में अमिताभ ने ही शशि कपूर के बड़े भाई का रोल किया है चाहे वो सुहाग हो या दीवार.
 
अमिताभ बच्चन ने पुलिस की वर्दी पहनने से क्यों कर दिया साफ इनकार?
 
 
शहंशाह को डायरेक्ट किया था कभी उनको अपने कैरियर की पहली फिल्म सात हिंदुस्तानी दिलाने वाले टीनू आनंद ने. टीनू से उनके दोस्ताना रिश्ते थे, लेकिन फिल्म के क्लाइमेक्स सीन को शूट करते वक्त टीनू और अमिताभ में एक बात पर इस कदर बिगड़ी कि तीन घंटे तक शूटिंग शुरू ही नहीं हो सकी. गुस्से में अमिताभ दूसरे कमरे में जाकर बैठ गए. दरअसल अमिताभ चाहते थे कि क्लाइमेक्स सीन में वो अपने फनी इंस्पेक्टर वाले किरदार की वर्दी पहनने के बजाय एक स्टाइलिश व्लैजर पहनें. लेकिन टीनू आनंद ने साफ मना कर दिया। अमिताभ गुस्सा हो गए. तब सैट पर टीनू के पिता और फिल्म के लेखक इंदर राज आनंद आए. उन्होंने अमिताभ को डस्टबिन में पड़े हरे, सफेद और केसरिया रंग के तीन टुकड़े दिखाए और कहा कि इन टुकड़ों को देखो, इनकी कोई कीमत नहीं है. लेकिन अगर ये तीनों जुड़ जाएं तो क्या फिर उन्हें कोई डस्टबिन में डालने की हिम्मत कर पाएगा? इसके लिए तुम किसी की जान भी ले सकते हो. जो हमारे दिलों में तिरंगे की इज्जत है, वहीं एक पुलिस वाले के लिए उसकी वर्दी की होती है. अगर वो क्लाइमेक्स सीन में वर्दी पहनेगा तो उससे अलग ही फर्क पड़ेगा. अमिताभ इंदर राज आनंद के सामने निरुत्तर थे, एक तो बड़े थे, दूसरे उनका तर्क काफी वजनदार था. अमिताभ चुपचाप उठे और वर्दी पहन ली, तब जाकर शूटिंग दोबारा शुरू हो पाई थी.
 

 

 

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