नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 8 नवंबर को काला धन और आतंकी-नक्सली फंडिंग के खिलाफ 500 और 1000 के नोट बंद करने का ऐलान किया था तभी से डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए बैंक इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग पर कई तरह के चार्ज घटा या हटा रहे हैं. ऐसे में आपको ये ध्यान दिलाया जाए कि आप वीकेंड पर फिल्म देखने के लिए जब ऑनलाइन टिकट कटाते हैं तो सिनेमा हॉल वाले आपसे हर टिकट के लिए कम से कम 20 रुपया ज्यादा वसूलते हैं. सिर्फ इस बात का कि आप काउंटर से नहीं बल्कि डिजिटल तरीके से टिकट कटा रहे हैं. आपको पता होगा तो आपने नजरअंदाज कर दिया होगा. आपको पता नहीं होगा तो पूछेंगे कि जब आप अपने मोबाइल या कम्प्यूटर से टिकट कटा रहे हैं और ऑनलाइन पेमेंट भी कर दे रहे हैं तो प्रत्येक टिकट के लिए 20 रुपया ज्यादा चार्ज किस खुशी में वसूला जा रहा है. तो उस खुशी को कुछ ने सुविधा शुल्क का नाम दिया है और कुछ ने इसे साफ-साफ खोलकर कहा है कि इंटरनेट पर आपके डिमांड को हैंडल करने के लिए ये ज्यादा पैसा चाहिए.
 
फिल्म देखने के लिए ऑनलाइन टिकट बुक करने का चलन सबसे ज्यादा बड़े शहरों में है जहां लोग भागमभाग भरी जिंदगी में सिनेमा हॉल या मल्टीप्लेक्स जाने के बाद इसलिए मायूस होकर नहीं लौटना चाहते कि टिकट बिक गए. वो दफ्तर से या घर से ही मोबाइल या कम्प्यूटर के जरिए सीट तक चुनकर बुकिंग कर लेते है. लेकिन इसके लिए सिनेमा हॉल वाले या उनका टिकट बेचने वाली साइट्स आपसे हर टिकट के लिए 20 रुपए ज्यादा लेती है. जिस चीज से सिनेमा हॉल के स्टाफ के काम का बोझ कम हो रहा है उस चीज के लिए ज्यादा पैसा वसूलना आश्चर्यजनक है.
 
वेव सिनेमा, फन सिनेमा, स्पाइस सिनेमा और स्टार एक्स जैसे बड़े मल्टीप्लेक्स ब्रांड अपने सिनेमा हॉल की सीटें Book My Show वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन बुक करवाते हैं. पीवीआर सिनेमा और कार्निवल सिनेमा बुक माय शो के अलावा खुद की साइट पर भी ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सेवा देती है. लेकिन चाहे आप सिनेमा हॉल की साइट से खरीदो या बुक माय शो से, आपको हरेक टिकट के लिए कम से कम 20 रुपए ज्यादा देने ही पड़ेंगे. पीवीआर और कार्निवल सिनेमा इसे सुविधा शुल्क के नाम पर वसूलते हैं जबकि बुक माय शो साफ-साफ कहता है कि ये इंटरनेट हैंडलिंग फीस है. चार आदमी के एक परिवार को एक फिल्म देखने के लिए करीब 80-85 रुपए एक्स्ट्रा देने पड़ते हैं. तब जबकि उस ऑनलाइन टिकट को खरीदने-बेचने में सिनेमा हॉल के किसी स्टाफ ने कोई काम नहीं किया. ऑनलाइन बुकिंग तो एक तरह से सिनेमा हॉल का काम आसान करता है जिसमें काउंटर पर कैश या कार्ड से पेमेंट लेकर टिकट बेचने वाले स्टाफ की जरूरत नहीं है. जब सिनेमा हॉल को ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले की सेवा में कुछ करना नहीं पड़ रहा है तो फिर ये एक्स्ट्रा चार्ज वसूलना लोगों को काउंटर से टिकट खरीदने को बढ़ावा देने जैसा है.
 
वैसे भी देश में नोटबंदी के बाद बढ़े डिजिटल यानी कैशलेस लेन-देन में इस मार्च महीने के बाद से ही गिरावट दिख रही है. मार्च, 2017 में 119.07 करोड़ डिजिटल लेन-देन हुए थे जो अप्रैल महीने में 118.01 करोड़ और मई में 111.45 करोड़ था. नोटबंदी से पहले अक्टूबर, 2016 में डिजिटल लेन-देन की संख्या 71.27 करोड़ थी जो नवंबर में 83.48 करोड़, दिसंबर में 123.46 करोड़, जनवरी में 114.96 करोड़ और फरवरी में 101.18 करोड़ थी. नीचे तस्वीरों में देखिए कि दो टिकट और चार टिकट के लिए पीवीआर सिनेमा, कार्निवल सिनेमा और बाकी सिनेमा हॉल के टिकट बुक करने पर बुक माय शो पर कितना एक्स्ट्रा चार्ज वसूला जा रहा है.